‘सत्यनारायण’ कथा का उद्गम स्थान तथा तीर्थस्थान‘नैमिषारण्य’ की महिमा !

उत्तर प्रदेश राज्य की राजधानी लक्ष्मणपुरी (लखनऊ) से ९० कि.मी. की दूरीपर सीतापुर जनपद में नैमिषारण्य स्थित है । वह गंगा नदी के गंगानदी की उपनदी गोमती नदी के बाएं तटपर स्थित है ।

गुजरात के सारंगपुर के कष्टभंजन मंदिर, वेरावल का भालका तीर्थ एवं सोमनाथ के ज्योतिर्लिंग के करें दर्शन !

गुजरात के स्वामीनारायण संप्रदाय के गुरु स्वामी गोपालानंद सारंगपुर जब गांव में आए थे, तब उन्हें ज्ञात हुआ कि उस क्षेत्र में अनेक वर्षों से वर्षा होने से यह क्षेत्र वीरान हो गया है । तब उन्होंने हनुमानजी से प्रार्थना की और उनकी प्रेरणा से वहां हनुमानजी की स्थापना की । हनुमानजी के कारण संकट दूर होने से उस मंदिर को कष्टभंजन हनुमान मंदिर नाम पडा ।

श्रीकृष्णजी का क्षेत्र गुजरात के प्राचीन गणपति मंदिर की विशेषता एवं महत्त्व !

१९.३.२०१९ को पू. (डॉ.) उलगनाथन्जी ने बताया, ‘‘परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के हिन्दू राष्ट्र स्थापना के कार्य में उत्पन्न बाधाएं दूर होने हेतु सद्गुरु (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी गुजरात राज्य की राजधानी के पास जो गणेशजी का प्राचीन मंदिर है, उस मंदिर में जाकर वहां बैठकर ५ मिनटतक नामजप करें तथा इस मंदिर की जानकारी लें ।’’

प्रभु श्रीरामजी से संबंधित श्रीलंका एवं भारत के विविध स्थानों का भावपूर्ण दर्शन करते हैं !

रामायण का काल अर्थात लाखों वर्ष प्राचीन है । उससे हिन्दू संस्कृति की महानता और प्राचीनता की प्रचीती होती है ।

कल्याण का ऐतिहासिक त्रिविक्रम देवस्थान तथा हिन्दुआें को एकसंध रखनेवाले वैकुंठ चतुर्दशी का महत्त्व !

कार्तिक शुद्ध चतुर्दशी को वैकुंठ चतुर्दशी के नाम से तथा इस मास की पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है ।

मनुष्य को २३ पवित्र तीर्थस्थलों के दर्शन का पुण्य प्रदान करनेवाली अमरनाथ यात्रा !

श्री अमरनाथ हिन्दुआें का मुख्य तीर्थक्षेत्र है । प्राचीन काल में उसे अमरेश्वर के नाम से जाना जाता था ।

सतना (मध्यप्रदेश) स्थित प्रसिद्ध श्री शारदा देवी शक्तिपीठ !

सतना, मध्यप्रदेश स्थित रामगिरि पर्वत पर श्री शारदा देवी का मंदिर है । श्री विष्णु ने शिव की पीठ पर विद्यमान माता सती की निष्प्राण देह के सुदर्शन चक्र से ५१ टुकडे किए । जहां जहां वे गिरे, वहां शक्तिपीठ निर्मित हुआ । यहां सती देवी का दाहिना स्तन गिरा था ।

शिवगंगा (तमिलनाडु) गांव के निकट भागंप्रियादेवी के स्थान पर प्रतीत हुए सूत्र

लगभग प्रतिदिन अनेक मंदिरों में ले जाकर महर्षि हमसे भिन्न-भिन्न धार्मिक कृत्य करने के लिए कहते हैं तथा प्रार्थनाएं भी करवाते हैं । अनिष्ट शक्तियों के निवारणार्थ किए जानेवाले कृत्य देवालय में करने से इसमें होनेवाले अनिष्ट शक्तियों के आक्रमण से अपनेआप ही रक्षा होने में सहायता मिलना |

नगर जनपद के श्रद्धास्थान २०० वर्ष प्राचीन ‘श्री विशाल गणपति’ !

महाराष्ट्र में स्थित ‘नगर’ शहर के ‘ग्रामदेवता’ मालीवाडा के श्री सिद्धिविनायक का मंदिर विशाल और बहुत जागृत है । यह मंदिर २०० वर्ष पुराना है । ये, भक्तों की मनोकामना पूर्ण करनेवाले देवता के रूप में प्रसिद्ध हैं । यह मूर्ति साढे ग्यारह फुट ऊंची, पूर्वाभिमुखी और दाएं सूंड की है ।

स्वयंभू गणेशमूर्ति

श्री विघ्नेश्‍वर, श्री गिरिजात्मज एवं श्री वरदविनायक की मूर्तियां स्वयंभू हैं । बनाई गईं श्री गणेशमूर्ति की तुलना में स्वयंभू गणेशमूर्ति में चैतन्य अधिक होता है । स्वयंभू गणेशमूर्ति द्वारा वातावरणशुद्धी का कार्य अनंत गुना अधिक होता है ।