विजयवाडा (आंध्र) प्रदेश का कनकदुर्गा मंदिर

आंध्र प्रदेश के कृष्णा नदी के तटपर बंसा हुआ बडा नगर है ‘विजयवाडा’ ! यहां कृष्णातटपर इंद्रकीलादी नामक पर्वत है, जहां ऋषिमुनियों ने तपश्चर्या की थी ।

शरयु तटपर स्थित मनुनिर्मितनगरी अयोध्या !

हिन्दुओं के उपास्यदेवता प्रभु श्रीरामचंद्रजी का जन्मस्थान है अयोध्यानगरी ! समय के तीव्रगति से आगे बढते समय अपने गौरवशाली इतिहास का अध्ययन एवं आचरण करना ही हिन्दुओं के लिए हितकारी होगा ।

प्रभु श्रीरामचंद्रजी के सान्निध्य के कारण पवित्र अयोध्यानगरी की पवित्रमय वास्तु !

जिस पवित्र स्थानपर प्रभु रामचंद्रजी का राज्याभिषेक हुआ, उस पवित्र स्थान को अब ‘राजगद्दी’ कहा जाता है ।

कश्मीर घाटी के कई वर्षों से बंद कुछ मंदिरों की जानकारी

‘रूट्स इन कश्मीर’के प्रवक्ता अमित रैना ने बताया, ‘‘वर्ष १९८६ के पश्चात धर्मांधों ने कश्मीर के कई मंदिरों को अपना लक्ष्य बनाया था ।

भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करनेवली कश्मीर की श्री खीर भवानीदेवी !

श्रीनगर से ३० कि.मी. की दूरीपर स्थित तुल्लमुल्ल का सुप्रसिद्ध श्री खीर भवानीदेवी का मंदिर ! कश्मीर के गंदेरबल जनपद में स्थित यह मंदिर हिन्दुओं के लिए महत्त्वपूर्ण स्थान है ।

महाराष्ट्र की इष्टदेवता एवं भक्ततारिणी तुळजापुर (जनपद धाराशिव) की श्री तुळजाभवानी देवी

कृतयुग में अनुभूति हेतु, त्रेतायुग में श्रीरामचंद्र हेतु, द्वापरयुग में धर्मराज हेतु तथा कलियुग में छत्रपति शिवाजी महाराज के लिए आशीर्वादरूप प्रमाणित श्री भवानीदेवी भक्ततारिणी एवं वरप्रसादिनी है ।

५१ शक्तिपीठों में से एक श्री त्रिपुरसुंदरी देवी का त्रिपुरा स्थित जागृत मंदिर, वहां का इतिहास एवं विशेषताएं

महाराज ज्ञान माणिक्य ने वर्ष १५०१ में उस समय में जानेवाले रंगमती नामक स्थानपर अर्थात आज की इस टिलीपर त्रिपुरसुंदरी देवी की स्थापना की ।

वाराणसी के संत कबीर प्राकट्य स्थल के छायाचित्रात्मक दर्शन

संत कबीर गुरू की प्रतीक्षा में थे । उन्होंने वैष्णव संत स्वामी रामानंदजी को अपना गुरु माना था; परंतु स्वामी रामानंदजी ने कबीरजी को शिष्य मानने से मना कर दिया था ।