कलियुग के दोष नष्ट करने के लिए तपस्या करनेेवाले ऋषिगणों के विघ्न हरण करनेवाला इडगुंजी (कर्नाटक) का श्री महागणपति !

इडगुंजी मंदिर की मुख्य मूर्ति भी चौथी अथवा पांचवीं शताब्दी की है । यह द्विभुजा श्री गणेशमूर्ति पाषाण पर खडी है ।

धायरी, पुणे के स्वयंभू देवस्थान श्री धारेश्‍वर !

धायरी गांव में स्थित धारेश्वरजी का मंदिर के दर्शन का अनुपम आनंद है । गर्भगृह में स्वयंभू प्रसन्न शिवलिंग को देखते ही हाथ अपनेआप जुड जाते हैं । चैत्र वद्य चतुर्थी को श्री धारेश्वर में बडा मेला लगता है ।

कोकण की काशी : श्री देव कुणकेश्‍वर

सिंधुदुर्ग जिले के देवगड तालुका में श्रीक्षेत्र कुणकेश्वर को कोकण की काशी संबोधित करते हैं । काशी में १०८ शिवलिंग हैं, तो कुणकेश्वर में १०७ शिवलिंग हैं । कोकण के अन्य प्रसिद्ध भगवान शंकर के स्थानों में इसकी गणना होती है ।

धनुषकोडी

भारत के दक्षिण-पूर्वी छोर पर हिन्दुओं का एक पवित्र तीर्थक्षेत्र है धनुषकोडी ! यह स्थान पवित्र रामसेतु का उगमस्थान है । गत ५० वषों से हिन्दुओं केे इस पवित्र तीर्थस्थान की स्थिति एक उद्ध्वस्त नगर के समान हो गई है । २२ दिसंबर १९६४ को यह नगर एक चक्रवात में उद्ध्वस्त हुआ था ।

सेतुबंध रामेश्‍वर माहात्म्य !

भारत के दक्षिण-पूर्व किनारे पर महत्त्वपूर्ण तीर्थक्षेत्र है रामेश्वरम् ! रामेश्वर के दर्शन के लिए हिन्दू धर्मपरंपरा में विशेष महत्त्व है ।

शत्रुनाश, भौतिक प्रगति और मोक्षप्राप्ति में पूरक कांचीपुरम (तमिलनाडू) के श्री अत्तिवरद पेरुमल स्वामी !

सप्त मोक्षपुरियों में से एक मोक्षपुरी कांचीपुरम ! तमिलनाडू का कांचीपुर मंदिरों का मायका है; क्योंकि यहां शिवशक्ति और विष्णु सहित अन्य देवताओं के १००८ मंदिर हैं । शिवकांची और विष्णुकांची, ये जुडवां मोक्षपुरियां हैं ।

गुजरात का ‘द्वारकाधीश’ मंदिर और द्वारकापीठ

श्रीकृष्ण ने अवतार-समाप्ति के पहले द्वारका समुद्र में डुबो दी । दुर्वास ॠषि के शाप के कारण यदुकुल का नाश हुआ । समुद्र में विलीन द्वारका के समीप के भूभाग को तदनंतर द्वारका का स्थान प्राप्त हुआ ।

योगतज्ञ दादाजी वैशंपायनजी द्वारा स्थापित शेवगाव का जागृत दत्त मंदिर !

योगतज्ञ दादाजी ने स्वयं जयपुर से गर्भगृह की प्रसन्न, सजीव, मासूम, वात्सल्यमयी एवं तेजस्वी दत्त मूर्ति बनवाकर लाई है । दादाजी ने स्वयं दत्तमूर्ति में प्राण प्रोक्षण किए हैं, इस कारण मूर्ति प्रत्यक्ष हमसे बात कर रही है, ऐसा प्रतीत होता है ।

भगवान श्रीकृष्ण के अस्तित्व का अनुभव किए हुए कुछ स्थानों का छायाचित्रात्मक दिव्यदर्शन !

श्रीकृष्ण के प्रति उत्कट भाव बढाने के लिए उनके दिव्य जीवन से संबंधित गोकुल, वृंदावन एवं द्वारका, इन दैवी क्षेत्रों के छायाचित्र यहां दिए हैं । इन छायाचित्रात्मक कृतज्ञता के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के अस्तित्व का अनुभव करने का प्रयत्न करते हैं !