आपातकालीन परिस्थिति उत्पन्न होने पर मानसिक समस्याओं पर कुछ उपाययोजना

मन अस्थिर होना, तनाव आना, चिंता लगना, भय लगना, परिस्थिति न स्वीकार पाना इत्यादि कष्ट होते हैं । अनेक लोगों को भविष्यकाल में संभाव्य आपत्तियों की कल्पना से भी ऊपर दिए गए कष्ट होते हैं । इसके साथ ही सगे-संबंधियों में भावनिकदृष्टि से अटकना होता है

दंगलसदृश भीषण परिस्थिति का सामना करना संभव हो, इस उद्देश्य से स्वयंसूचना देकर अपना मनोबल बढाएं !

ऐसे समय पर सर्वत्र विध्वंस होना, आग लगना, गली-गली मृतदेहें पडी होना, ऐसी स्थिति सर्वत्र दिखाई देती है । ऐसी घटना देखकर अथवा सुनकर अनेकों का मन अस्थिर होना, तनाव आना, चिंता लगना, भय लगना, परिस्थिति न स्वीकार पाना इत्यादि कष्ट होते हैं ।

मनुष्य के विविध कुकर्म और तदनुसार उसे होनेवाली नरकयातना (श्रीमद्भागवत्)

मनुष्य के त्रिगुणों के कारण होनेवाले कृत्यों का फल
शुकदेव गोस्वामी महाराज परिक्षित से कहते हैं, यह जग ३ प्रकार के कृत्यों से भरा है । सत्त्वगुण (भलाई के उद्देश्य से किए जानेवाले कृत्य), रजोगुण (वासना के अधीन होकर होनेवाले कृत्य) और तमोगुण (अज्ञान के कारण होनेवाले कृत्य) । इसलिए उन्हें ३ विविध प्रकार के परिणाम भोगने पडते हैं ।

प्रारब्ध 

‘अध्यात्म विषयक बोधप्रद ज्ञानामृत’ लेखमाला से भक्त, संत तथा ईश्‍वर, अध्यात्म एवं अध्यात्मशास्त्र तथा चार पुरुषार्थ ऐसे विविध विषयों पर प्रश्‍नोत्तर के माध्यम से पू. अनंत आठवलेजी ने सरल भाषा में उजागर किया हुआ ज्ञान यहां दे रहे हैं । इस से पाठकों को अध्यात्म के तात्त्विक विषयों का ज्ञान होकर उनकी शंकाओं का निर्मूलन होगा तथा वे साधना करने के लिए प्रवृत्त होंगे ।

नामजप न करते हुए और नामजप के साथ प्राणायाम

२१ जून विश्वभर में आंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाता है । योग इस शब्द का उगम ‘युज’ धातु से हुआ है । युग का अर्थ है संयोग होना । योग इस शब्द का मूल अर्थ जीवात्मा का परमात्मा से मिलन होना है । योगशास्त्र का उगम लगभग ५००० वर्षाें पूर्व भारत में हुआ है ।

भक्ति के सुंदर उदाहरण वाला जनाबाई के जीवन का प्रसंग

जनाबाई जैसे भक्त बनने के लिए उनकी ही तरह हर काम में, हर प्रसंग में ईश्‍वर को अपने साथ अनुभव करना, उनसे हर प्रसंग का आत्मनिवेदन करते रहना, उनको ही अपना सब मानकर अपनी सब बातें बताना आवश्यक है ।

दान और अर्पण का महत्त्व एवं उसमें भेद

‘पात्रे दानम् ।’ यह सुभाषित सर्वविदित है । दान का अर्थ है ‘किसी की आय और उसमें से होनेवाला व्यय घटाकर, शेष धनराशि से सामाजिक अथवा धार्मिक कार्य में योगदान ।’

हमेशा आनंद में रहने के लिए क्या आवश्यक है ?

ईश्वर की अनुभूति आने से हमें जो आनंद मिलता है उसे अपने कुछ दोषों के कारण हम अधिक समय तक टिकाकर नहीं रख पाते । हमेशा आनंद में रहने के लिए आवश्यक है कि हम अपने दोषों पर शीघ्रातिशीघ्र विजय प्राप्त करें ।

नामस्मरण है श्रेष्ठ स्मरण भक्ति !

अर्थात भगवान का स्मरण करते जाएं । उनके नाम का अखंड जप करें । नामस्मरण कर संतुष्ट हों । सुख हो अथवा दु:ख मन उद्विग्न हो अथवा चिंता में, सर्वकाल और सभी प्रसंगों में नामस्मरण करते जाएं ।