वृद्धावस्था में वृद्धों का आचरण कैसा हो, इस संदर्भ में कुछ सरल सूत्र

जिन्होंने अत्यंत प्रतिकूल परिस्थिति में बडा किया, बडे होने अथवा विवाह होने पर हम उनका द्वेष, तिरस्कार करते हैं, कभी भूल भी जाते हैं; परंतु उस समय हम यह भूलते हैं कि, ‘हम भी कभी बूढे अथवा वृद्ध होनेवाले हैं ।

ज्येष्ठ नागरिकों की समस्याएं तथा उनके लिए आचरण में लाने हेतु आवश्यक सूत्र !

विभक्त परिवार पद्धति, व्यक्ति के दोष, आर्थिक समस्याएं आदि विचारधाराओं के कारण वृद्धाश्रम चिंता का विषय बन गया है । इस आयु में ज्येष्ठ नागरिकों को प्रेम, ममता और अपनेपन की आवश्यकता होती है ।

सर्व भाषाओं में सर्वोत्कृष्ट देवभाषा संस्कृत की महिमा

संस्कृत भाषा देवनागरी लिपि में लिखी जाती है । यह विश्व की सर्वाधिक वैज्ञानिक और पूर्ण लिपि है । यह लिपि लिखने और बोलने में किसी भी प्रकार की अडचन नहीं है ।

तंत्रिकाशास्त्र (न्यूरोसाइंस) के अनुसार संस्कृत भाषा का मस्तिष्क पर सकारात्मक परिणाम होता है !

कठोर परिश्रम कर कंठस्थ किया गया विषय मस्तिष्क की किसप्रकार सहायता करता है, यह तंत्रिकाशास्त्र (न्यूरोसाईन्स) प्रमाणित करता है ।

संवेदनाओं को नष्ट करनेवाले भ्रमणभाष का व्यसन छुडाने हेतु प्रयास होना आवश्यक !

स्मार्टफोन के कारण मस्तिष्क का पत्थर बनता जा रहा है । ब्लू वेल और पबजी जैसे प्राणघाती खेलों के व्यसन से अभी सतर्क रहिए ।

युनाइटेड किंगडम के सश्रद्ध हिन्दू हैं, सर्वाधिक सुखी लोग !

विविध धर्मों के लोगों के विषय में विचार करने पर हिन्दू सर्वाधिक सुखी हैं । हिन्दुओं के पश्‍चात ईसाई, सिक्ख, बौद्ध,ज्यू एवं अंत में मुसलमान लोगों का क्रम आता है, नास्तिकों का क्रम सब से नीचे है !

रामायणकालीन संस्कृति की ऐतिहासिक धरोहर की उपेक्षा करना, एक हिन्दूद्वेषी कर्म !

रामायणकालीन संस्कृति की ऐतिहासिक धरोहर का महत्त्व जागतिक स्तर पर सिद्ध होने पर भी भारतीय राज्यकर्ताआें द्वारा उसकी उपेक्षा करना, एक हिन्दूद्वेषी कर्म !

क्या श्रीविष्णु के नौवें अवतार भगवान बुद्ध एवं बौद्ध धर्म संस्थापक गौतम बुद्ध में है भेद ?

श्रीविष्णु के नौवें अवतार, बौद्ध धर्म संस्थापक गौतम बुद्ध से भिन्न हैं । इसकी कारणमीमांसा आगे दी है ।

मुसलमान आक्रामकों से प्रतिशोध लेनेवाली वीर राजकन्याएं !

सहस्रों वर्ष जिस भूमि की ओर किसी ने टेढी आंख कर नहीं देखा, उस भूमि पर वर्ष ७११ में सिंध प्रांत में जो आक्रमण हुआ, वह महाभयंकर था । उस समय राजा दाहीर सिंध देश के अधिपति थे । लडाई में राजा मारे गए, शील की रक्षा हेतु उनकी महारानी जलती चिता में कूद गईं ।

नारी शक्ति विशेष ! हे हिन्दू नारी, धर्माचरण से है तुम्हारी पहचान ! अबला नहीं, तुम हो रणरागिणी !

हमारी बेटियां, माताएं और बहनें जब तक दुर्गा अथवा झांसी की रानी का रूप नहीं धारण करतीं, तब तक हमें ऐसा नहीं मानना चाहिए कि क्रांति सफल हुई ।