विदेशियों को संस्कृत भाषा का महत्त्व समझ में आता है, किंतु भारतीयों द्वारा इस भाषा की उपेक्षा !

भारतवासियों पर अंग्रेजी भाषा का बढता प्रभाव और उसका परिणाम चिंता का विषय है । प्रस्तुत लेख से यह ध्यान में आता है कि विदेशी नागरिकों को संस्कृत भाषा का महत्त्व समझ में आया; किंतु स्वभाषा के अमूल्य एवं अलौकिक ज्ञान से भारतीय कितने अनभिज्ञ हैं ।

मानव-निर्मित कीटनाशक मानव का मित्र अथवा शत्रु ?

‘विषैले रासायनिक कीटनाशकों ने कृषि को नष्ट करनेवाले कीटों के साथ-साथ मच्छरों की संख्या कम करने में सहायता की, परंतु इन विषैले रसायनों के कारण अनेक उपयुक्त और हानिरहित प्राणियों और कीटों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाला है ।

पत्ते तोडे जाने पर वृक्ष वेदना में जोर से चिल्लाते हैं ! – शोधकर्ताओं के निष्कर्ष

शोध से पता चला है कि जब पेड-पौधों से पत्तियां तोडी जाती हैं, तो उन्हें वेदना होती है और वे चिल्लाते हैं । तेल अवीव विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने यह शोध किया है ।

संस्कृत मंत्रों के उच्चारण से स्मरणशक्ति बढती है !

वैदिक संस्कृत मंत्रों के उच्चारण से स्मरणशक्ति बढती है, अमेरिका के एक समाचार-पत्र ने ऐसा दावा किया है । इस समाचार के अनुसार डॉ. जेम्स हार्टजेल नामक न्यूरो शोधकर्ता ने अमेरिका की एक मासिक पत्रिका में अपना यह शोध प्रकाशित किया है ।

संस्कृत भाषा धर्म जितनी ही समृद्ध है !

माध्यमिक पाठशालाओं के स्तर पर संस्कृत की शिक्षा विशेष विषय के रूप में स्वीकारना अनिवार्य है । इससे विद्यार्थियों में देश की प्राचीन संस्कृति तथा अपने पूर्वजों के साहित्य के प्रति जिज्ञासा उत्पन्न होगी । उनके मन और चरित्र पर सकारात्मक परिणाम होकर उनके शुद्ध ज्ञान में बढोतरी होगी ।

कर्नाटक के मात्तूर गांव में होता है संस्कृत भाषा में संवाद

जनपद के मात्तूर गांव की भाषा संस्कृत होने से इस गांव के रहनेवाले मूल निवासियों में ३० प्राध्यापक बेंगळूरु, मैसूरु और मंगळूरु के विश्वविद्यालयों में संस्कृत पढा रहे हैं । विशेष बात यह कि इस गांव में प्रत्येक घर में न्यूनतम एक व्यक्ति संस्कृत का जानकार और तंत्रज्ञान क्षेत्र का अभियंता है ।

वृद्धावस्था में वृद्धों का आचरण कैसा हो, इस संदर्भ में कुछ सरल सूत्र

जिन्होंने अत्यंत प्रतिकूल परिस्थिति में बडा किया, बडे होने अथवा विवाह होने पर हम उनका द्वेष, तिरस्कार करते हैं, कभी भूल भी जाते हैं; परंतु उस समय हम यह भूलते हैं कि, ‘हम भी कभी बूढे अथवा वृद्ध होनेवाले हैं ।

ज्येष्ठ नागरिकों की समस्याएं तथा उनके लिए आचरण में लाने हेतु आवश्यक सूत्र !

विभक्त परिवार पद्धति, व्यक्ति के दोष, आर्थिक समस्याएं आदि विचारधाराओं के कारण वृद्धाश्रम चिंता का विषय बन गया है । इस आयु में ज्येष्ठ नागरिकों को प्रेम, ममता और अपनेपन की आवश्यकता होती है ।

सर्व भाषाओं में सर्वोत्कृष्ट देवभाषा संस्कृत की महिमा

संस्कृत भाषा देवनागरी लिपि में लिखी जाती है । यह विश्व की सर्वाधिक वैज्ञानिक और पूर्ण लिपि है । यह लिपि लिखने और बोलने में किसी भी प्रकार की अडचन नहीं है ।