श्राद्ध

homepg_banner_Shraddha_606_Hहिंदु धर्ममें उल्लेखित ईश्वरप्राप्तिके मूलभूत सिद्धांतोंमेंसे एक सिद्धांत ‘देवऋण, ऋषिऋण, पितृऋण एवं समाजऋण, इन चार ऋणोंको चुकाना है । इनमेंसे पितृऋण चुकानेके लिए ‘श्राद्ध’ करना आवश्यक है । माता-पिता तथा अन्य निकटवर्ती संबंधियोंकी मृत्योपरांत, उनकी आगेकी यात्रा सुखमय एवं क्लेशरहित हो तथा उन्हें सद्गति प्राप्त हो, इस उद्देश्यसे किया जानेवाला संस्कार है ‘श्राद्ध’ ।

Datta_jap_640_EHShraddha_Shop_hin_320

हिन्दुआें के लिए धार्मिक शिक्षा की आवश्यकता बतानेवाला शासन प्रायोजित ऑनलाइन श्राद्ध !


हाल ही में एक हिन्दी मासिक में समाचार छपा था कि शासन की ओर से ऑनलाइन श्राद्ध की सुविधा दी गई है । उसे पढकर मेरी स्थिति इस पर हंसे अथवा रोएं जैसी हो गई । श्राद्ध प्रत्यक्ष किया जाता है, यह शासन की समझ में क्यों नहीं आता, इस बात का मुझे आश्‍चर्य हुआ । जब, ऑनलाइन भोजन अथवा विवाह नहीं हो सकता, तब श्राद्ध कैसे हो सकता है ? इस पर भी आश्‍चर्य की बात यह है कि यह सुविधा देनेवाला शासन हिन्दुत्वनिष्ठों का है ! मुझे आशंका है कि श्राद्ध के नाम पर हिन्दुआें से करोडों रुपए कमाने के लिए ही शासन का हिन्दूप्रेम जागृत हुआ है ।

- (परम पूज्य) डॉ. आठवले (१३.२.२०११)

क्या श्राद्ध करना आवश्यक है ?

व्हिडीआे (Video) 


संबंधित ग्रंथ

 

श्राद्ध (भाग १) (महत्त्व एवं अध्यात्मशास्त्रिय विवेचन)
श्राद्ध (भाग १) (महत्त्व एवं अध्यात्मशास्त्रिय विवेचन)
श्राद्ध (भाग २) (श्राद्धविधीका अध्यात्मशास्त्रीय आधार)
श्राद्ध (भाग २) (श्राद्धविधीका अध्यात्मशास्त्रीय आधार)
भगवान दत्तात्रेय
भगवान दत्तात्रेय
श्री गंगाजीकी महिमा
श्री गंगाजीकी महिमा
संचित, प्रारब्ध एवं क्रियमाण कर्म : भाग १
संचित, प्रारब्ध एवं क्रियमाण कर्म : भाग १
मालेगांव बम-विस्फोट के पीछे का अदृश्य हाथ
मालेगांव बम-विस्फोट के पीछे का अदृश्य हाथ

Also available in : MarathiEnglish

Donating to Sanatan Sanstha’s extensive work for nation building & protection of Dharma will be considered as

“Satpatre daanam”