धर्मसंस्थापक भगवान श्रीकृष्ण पर आक्षेप एवं उसका खंडन
‘अयोग्य टीका-टिप्पणियों का प्रतिवाद करना’, कालानुसार आवश्यक धर्मपालन ही है । इसी उद्देश्य से आगे ‘श्रीकृष्ण पर आक्षेप और उसका खंडन’ दिया है । प्रत्येक व्यक्ति का इसका अध्ययनपूर्वक मनन करना चाहिए ।
‘अयोग्य टीका-टिप्पणियों का प्रतिवाद करना’, कालानुसार आवश्यक धर्मपालन ही है । इसी उद्देश्य से आगे ‘श्रीकृष्ण पर आक्षेप और उसका खंडन’ दिया है । प्रत्येक व्यक्ति का इसका अध्ययनपूर्वक मनन करना चाहिए ।
प्रगतिशील लोगों को यदि निर्धनों पर इतनी दया आ रही है, तो उन्हें अब तक इन युवाओं को रोजगार देना चाहिए था ।
जब तक प्रभु श्रीराम पर हुए मिथ्या आरोप हम सुनेंगे, तब तक हमें भी सत्य का पता नहीं होगा, तो हमारे मन में श्रीराम के प्रति भाव निर्माण होना कठिन है । इसलिए आज हम इन मिथ्या आरोपों की वास्तविकता आपके सामने रखेंगे । इससे निश्चित ही आपके मन की शंका दूर होगी और आप भी ऐसे आरोप करनेवालों का सामना आत्मविश्वास के साथ कर सकते हैं ।
ईश्वरके कर्म भावातीत होनेसे वे शुद्धस्वरूप होते हैं; इसलिए उन्हें ‘लीला’ कहते हैं ।
सहस्रों वर्ष से होनेवाले गणेशमूर्तियों के विसर्जन से कभी पर्यावरण की हानि नहीं हुई । परंतु, अपने उदय के पश्चात केवल १०० वर्ष में विज्ञान ने पर्यावरण की अपार हानि कर डाली ।
भगवान शिवजी को संभवतः दूध से अभिषेक करना चाहिए; क्योंकि दूध में शिवजी के तत्त्व को आकर्षित करने की क्षमता अधिक होने से दूध के अभिषेक के माध्यम से शिवजी का तत्त्व शीघ्र जागृत हो जाता है । उसके पश्चात उस दूध को तीर्थ के रूप में पीने से उस व्यक्ति को शिवतत्त्व का अधिक लाभ मिलता है ।