यमदीपदान करते समय १३ दीपक क्यों अर्पण करते हैं ?

दीपकों की संख्या १३ मानकर, पूजा की जाती है । इस दिन यमदेवता द्वारा प्रक्षेपित लहरें ठीक १३ पल नरक में निवास करती हैं । इसका प्रतीक मानकर यमदेवता को आवाहन करते हुए १३ दीपकों की पूजा कर, उन्हें यमदेवता को अर्पण किया जाता है ।

यदि देवी की मूर्ति नीचे गिर जाए अथवा गिरकर टूट जाए, तब क्या करना चाहिए ?

‘यदि मूर्ति नीचे गिर जाए और खंडित न हो, तब प्रायश्चित करने की आवश्यकता नहीं है । देवी से केवल क्षमा मांगें तथा तिलहोम, पंचामृत पूजा, दुग्धाभिषेक आदि कर्म अध्यात्म के जानकार से पूछकर करें ।

अन्य पंथीय व्यक्ति को हिन्दू धर्म में प्रवेश का अध्यात्मशास्त्र !

मैंने अन्य पंथ की लडकी से विवाह किया है । इसलिए हमारे परिजन हमारा विरोध कर रहे हैं । हमने अपने घरवालों को बहुत समझाने का प्रयत्न किया; परंतु घर के सदस्य पत्नी और उसके स्पर्शित अन्न को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं ।

नामजप संबंधी शंकानिरसन

‘नाम’ साधना की नींव है । ३३ करोड देवी-देवताओं में से कौन-सा जप करना चाहिए, नामजप में आनेवाली बाधाएं, गलत धारणाएं इत्यादि के विषय में प्रायोगिक प्रश्नोत्तर इसमें दिए हैं ।

आध्यात्मिक कष्ट क्यो होते है ?

साधना करते हुए सूक्ष्म की विविध शक्तियां साधक को कष्ट देती हैं । उसे साधना के परमार्थ पथ से परावृत्त करने हेतु वे प्रयत्नरत होते हैं । इस पर कौन-सा उपाय करें इत्यादि के विषय के प्रश्नोत्तर प्रस्तुत स्तंभ में अंतर्भूत हैं ।

कर्मकांड संबंधी शंकानिरसन

कर्मकांड साधना का प्राथमिक परंतु अविभाज्य भाग है । कर्मकांड में पालन करने योग्य विविध नियम, आचरण कैसे होना चाहिए, इस विषय में अनेक लोगों को जानकारी होती है; परंतु उसके पीछे का कारण और शास्त्र के विषय में हम अनभिज्ञ होते हैं ।

अध्यात्म संबंधी शंकानिरसन

गांव-गांव के जिज्ञासु और साधकों के मन में सामान्य तौर पर निर्माण होनेवाली अध्यात्मशास्त्र के सैद्धांतिक और प्रायोगिक भाग की शंकाओं का निरसन सनातन संस्था के प्रेरणास्रोत प.पू. डॉ. जयंत आठवलेजी ने किया है ।