आदर्श विवाहपत्रिका : विवाहपत्रिका सात्त्विक होने के लिए क्या करना चाहिए ?

विवाहपत्रिका आजकल प्रतिष्ठा का विषय बन गया है । अनेक पृष्ठों की, सुगंधित, मंहगी पत्रिकाओं को छापने की ओर समाज का झुकाव बढ गया है । ‘विवाह’ एक धार्मिक विधि होने से विवाहपत्रिका सात्त्विक हो और उससे धर्मप्रसार हो, इसके लिए प्रयास करना चाहिए । इस दृष्टि से विवाहपत्रिका के विविध घटक कैसे हाेने चाहिए, इसका विवेचन आगे किया है ।

ईश्वरप्राप्ति हेतु विवाहविधि अध्यात्मशास्त्र के अनुरूप ही करें !

विवाहविधि द्वारा वधु-वर सहित उपस्थितों का आनंदप्राप्ति की दिशा में मार्गक्रमण होने के लिए कैसे प्रयत्न करने चाहिए, वह इस लेख में प्रस्तुत है ।

विवाह निश्‍चित करते समय वधु-वर की जन्मकुंडली मिलाने का महत्त्व

वधु-वर की जन्मकुंडलियां मिलाने का महत्त्व, इसके साथ ही  वैवाहिक जीवन आनंदमय होने के लिए क्या करना चाहिए, इस विषय में प्रस्तुत लेख !

वैवाहिक जीवन आनंदमय होने के लिए क्या करना चाहिए ?

विवाह के कारण परिवारव्यवस्था से उत्पन्न बच्चों को सुसंस्कार, प्रेम एवं सुरक्षा मिलती है । किंतु, व्यभिचार से उत्पन्न संतति, इन सबसे वंचित रहती है ।

धार्मिक विधियोंमें पति एवं पत्नीद्वारा करने योग्य कृत्य

जानिये इन प्रश्नोंके उत्तर – किस विधिमें पत्नी पतिकी बाइं ओर बैठे ?, पतिके दाहिने हाथको हस्तस्पर्श करते समय पत्नी अपनी चार उंगलियोंसे स्पर्श करती है, अंगूठेसे क्यों नहीं ? और अन्य प्रश्नोंके उत्तर |

वैदिक पद्धतिसे विवाह क्यों करते है ?

पशुके स्तरपर न रहकर उच्चतम स्तरपर जाकर, विवाह जैसे रज-तमात्मक प्रसंगको भी सात्त्विक बनाकर, उन्हें अध्यात्मसे जोडकर देवताओंके कृपाशीर्वाद प्राप्त करनेका अवसर हिंदु धर्मने दिया है ।

विवाह संस्कार

‘विवाह’ जीवनका एक महत्त्वपूर्ण संस्कार है । धार्मिक संस्कारोंको केवल परंपरागत करनेकी अपेक्षा, उनके शास्त्रीय आधारको समझकर करना महत्त्वपूर्ण होता है । शास्त्रीय आधार समझनेसे वह संस्कार अधिक श्रद्धापूर्वक होता है ।