जन्मदिन

‘जन्मदिन अर्थात जीव की आध्यात्मिक दृष्टि से उन्नति । आध्यात्मिक उन्नति का ही दूसरा नाम ‘वृद्धि’ अथवा ‘बढ़त’ है । जीव की निर्मिति से ही उसकी आध्यात्मिक उन्नति आरंभ होती है ।

जन्मदिन तिथिके अनुसार ही क्‍यों मनाए?

जिस तिथिपर हमारा जन्म होता है, उस तिथिके स्पंदन हमारे स्पंदनोंसे सर्वाधिक मेल खाते हैं । इसलिए उस तिथिपर परिजनों एवं हितचिंतकोंद्वारा हमें दी गई शुभकामनाएं एवं आशीर्वाद सर्वाधिक फलित होते हैं ।