प्रभु श्रीरामजी से संबंधित श्रीलंका एवं भारत के विविध स्थानों का भावपूर्ण दर्शन करते हैं !

रामायण भारत की अमूल्य धरोहर एवं इतिहास है । आधुनिकतावादी चाहे कितनी ही आलोचना क्यों न करें तथा रामायण के अस्तित्व को अस्वीकार करने का प्रयास करें; परंतु रामायण काल के विविध घटनाओं के ये छायाचित्र इस इतिहास के साक्षी हैं । रामायण का काल अर्थात लाखों वर्ष प्राचीन है । उससे हिन्दू संस्कृति की महानता और प्राचीनता की प्रचीती होती है । यहां प्रमुखरूप से श्रीलंका में स्थित रामायण काल के स्थानों के दर्शन कराने का प्रयास किया गया है । यह सीतामाता के अपहरण के पश्‍चात उनके वहां के निवास का प्रमाण ही है।

सीतामाता ने जहां अग्निप्रवेश किया, उस स्थानपर स्थित अश्‍वत्थवृक्ष एवं मंदिर
श्रीलंका के मध्य प्रांत में स्थित अतिऊंचाईवाले पर्वतीय क्षेत्र में यह स्थान है । गुरुलपोथा में रावण की पत्नी मंदोदरी के महल के अवशेष के छायाचित्र ! रावण ने सीतामाता का अपहरण कर उन्हें इसी महल में रखा था।
महारानी मंदोदरी के महल की दक्षिण की ओर स्थित इन सीढीयां उतरकर सीतामाता वहां स्थित नदी में स्नान हेतु जाती थीं !
रामभक्त हनुमानजी ने सीतामाता की खोज में इस शीला से सीतामाता जिस अशोकवृक्ष के नीचे बैठी थीं, उस वृक्षपर छलांग लगाई । ऐसा कहा जाता है कि उस शीलापर उनके चरण अंकित हुए हैं ।

 

शरयू तटपर स्थित अयोध्या मनुनिर्मित नगरी …

त्रेतायुग में श्रीरामजी ने अपनी प्रजा के साथ अयोध्या की इसी नदी में जलसमाधी ली थी, तो कलियुग में रामजन्मभूमि आंदोलन के अंतर्गत वर्ष १९९० में अयोध्या आए कारसेवकोंपर तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायमसिंह यादव ने गोलाबारी के आदेश दिए । उसके पश्‍चात इसी नदी में कारसेवकों के शव फेंके गए थे ।

 

अयोध्या की रामजन्मभूमिपर एक चौपालपर विराजमान श्रीरामलला !

भारत के राजा, रावण का नाश कर श्रीलंका जीतनेवाले अवतारी प्रभु श्रीरामजी के अयोध्या के आज के स्थान की दुःस्थिती ! विगत अनेक वर्षों से श्रीरामलला इसी चौपाल में हैं । श्रीरामजी का इससे बडा अनादर और क्या हो सकता है ? हिन्दू धर्म का आस्था का केंद्र इस प्रकार से धूप, हवा और वर्षा का सामना कर रहा है, क्या यह हिन्दू समाज के लिए लज्जाप्रद नहीं है ?

स्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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