चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को सृष्टी की निर्मिति हुर्इ, इसलिए इस दिन हिन्दू नववर्ष मनाया जाता है । इस दिन को संवत्सरारंभ, गुडी पडवा, युगादी, वसंत ऋतु प्रारंभ दिन आदी नामों से भी जाना जाता है ।

कृपया गुडी पडवा मनाते समय शासन द्वारा लगाए गए सभी नियमों का पालन करें !

वर्तमान आपातकाल में नववर्षारंभ इस प्रकार मनाएं ! –

वर्तमान में अनेक स्थानों पर संचारबंदी लागू की गई है, ऐसे समय में पारंपरिक पद्धति से धर्मध्वजा खडी करने हेतु सामग्री नहीं मिल पाई, इस कारण से नववर्ष का आध्यात्मिक लाभ लेने से वंचित न रहें ! नववर्ष आगे दिए अनुसार मनाएं –

१. नया बांस उपलब्ध न हो, तो पुराना बांस स्वच्छ कर उसका उपयोग करें । यदि यह भी संभव न हो, तो अन्य कोई भी लाठी गोमूत्र से अथवा विभूति के पानी से शुद्ध कर उपयोग कर सकते हैं ।
२. नीम अथवा आम के पत्ते उपलब्ध न हों, तो उनका उपयोग न करें ।
३. अक्षत सर्वसमावेशी होने से नारियल, बीडे के पत्ते, सुपारी, फल आदि उपलब्ध न हों, तो पूजन में उनके उपचारों के समय अक्षत समर्पित कर सकते हैं । फूल भी उपलब्ध न हों, तो अक्षत समर्पित की जा सकती है ।
४. नीम के पत्तों का भोग तैयार न कर पाएं तो मीठा पदार्थ, वह भी उपलब्ध न हो पाए, तो गुड अथवा चीनी का भोग लगा सकते हैं ।

गुडीपडवा

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