इंडोनेशिया के जावा द्वीपपर प्रंबनन मंदिर में रामायण नृत्यनाटिका !

सद्गुरु (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी के नेतृत्व में महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय के समूह की दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की अध्ययनयात्रा

१५ वीं शताब्दी तक इंडोनेशिया में हिन्दू राजाओं का राज्य था । एक समय में संपूर्ण विश्‍व में फैली हिन्दू संस्कृति का अध्ययन करने के लिए महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय की ओर से सद्गुरु (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी तथा उनके साथ ४ छात्र-साधक इंडोनेशिया की यात्रा पर थे । तब उनके द्वारा अवलोकित स्थलों की विशेषताएं, मान्यवरों के साथ की गई भेंट तथा वहां की हिन्दू संस्कृति के पदचिन्हों को दर्शानेवाला यह स्तंभ

 

१. मुसलमान बहुल इंडोनेशिया में रामायण को प्रधानता दी जाना

आज ९५ प्रतिशत मुसलमान जनसंख्यावाले इंडोनेशिया में ४०० वर्ष पूर्व, सभी लोग हिन्दू ही थे । इंडोनेशिया के अनेक लोग इसका समर्थन करते हैं । यहां के लोग चाहे मुसलमान हों; परंतु यहां के लोगों के नाम विष्णु, सूर्य, राम, भीष्म, युधिष्ठिर, भीम ऐसे हैं । यहां के लोग मुसलमान होते हुए भी रामायण को प्रधानता देते हैं । जावा द्वीप पर श्रीराम को रामा, सीतामाता को शिंता, रावण को र्‍हावण, और लंका को अलेंकापुरी कहा जाता है ।

 

२. अनेक शतकों से जावा द्वीप पर रामायण के
प्रसंगोंपर आधारित नृत्यकला विख्यात होना तथा
आज भी प्रतिदिन मंदिर के भव्य परिसर में इस कला को प्रस्तुत किया जाना

जावा द्वीप इंडोनेशिया का सबसे बडा द्वीप है तथा इस द्वीप पर कई शतकों से रामायण की घटनाआें पर आधारित नृत्यनाटिका विख्यात है । योग्यकर्ता नगर से १७ कि.मी. की दूरी पर प्रंबनन नामक गांव है । यहां चंडी प्रंबनन नामक मंदिरों का समूह है । चंडी का अर्थ है मंदिर तथा प्रंबनन का अर्थ परब्रह्मन् । इसका अर्थ है परब्रह्मन् मंदिर समूह । किसी समय में विश्‍व के सबसे ऊंचे रहे इस मंदिर को देखने के लिए प्रतिदिन सहस्रों की संख्या में श्रद्धालु तथा पर्यटक आते हैं । इस मंदिर के भव्य परिसर में प्रतिदिन सायंकाल ७ से रात के ९ की अवधि में रामायण की घटनाआें पर आधारित नृत्यनाटिका प्रस्तुत की जाती है । गर्मियों में इस नृत्यनाटक को मंदिर के बाहर के परिसर में एक बडे व्यासपीठपर प्रस्तुत किया जाता है, जबकि वर्षाकाल में एक सभागार में प्रस्तुत किया जाता है ।

 

नृत्यनाटिका में सीतास्वयंवर के समय प्रभु श्रीरामचंद्रजी द्वारा धनुष्य उठाने का प्रसंग प्रस्तुत करते हुए कलाकार

जटायू ने सीताहरण करनेवाले रावण के साथ युद्ध किया । उस समय रावण द्वारा उसका वध करने का दृश्य प्रस्तुत करते हुए कलाकार

हनुमान द्वारा सीतामाता से मिलकर श्रीराम की मुद्रिका (अंगूठी) भेंट करने का दृश्य प्रस्तुत करनेवाले कलाकार

 

३. जावा द्वीप पर रामायणपर आधारित
नृत्यनाटिका के कुछ दृश्य तथा इस नृत्यनाटिका की विशेषताएं

इस नृत्यनाटिका में सीतास्वयंवर, मारिच द्वारा स्वर्णमृग का मायावी रूप धारण , सीता के कहने पर राम तथा लक्ष्मण का उस मृग का पीछा, रावण द्वारा सीताहरण , रावण द्वारा जटायु का वध , हनुमानजी द्वारा सीता से मिलकर उन्हें श्रीरामजी की मुद्रिका (अंगूठी) भेंट करना, हनुमानजी द्वारा लंकादहन , राम-रावण युद्ध तथा सीतामाता की अग्निपरीक्षा जैसे दृश्यों को बहुत ही सुंदर भावमुद्रा में प्रस्तुत किया जाता है ।

इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर यह एक पारंपरिक नृत्यनाटिका है तथा २० कलाकार इस नृत्यनाटिका को बहुत ही सुंदर भावमुद्रा में प्रस्तुत करते हैं । इस नृत्यनाटिका के अनुरूप पारंपरिक संगीत होता है । सूत्रसंचालक बीच-बीच में पृष्ठभूमि बताकर कथा को आगे ले जाते हैं । इस नृत्यनाटक को देखते समय हमारी आंखें पूरे समय नृत्यनाटिका पर ही केंद्रित होती हैं । सुंदर प्रस्तुतीकरण के कारण हम वास्तव में ही रामायण को देख रहे हैं, ऐसा लगता है ।

 

४. कृतज्ञता

हे परात्पर गुरुदेवजी, आप सदैव कहते हैं, पृथ्वी पर चाहे कितने भी महापुरुष तथा राजा हुए हों; परंतु लोग श्रीरामजी तथा श्रीकृष्णजी को कभी नहीं भूलेंगे; क्योंकि वे देवता के अवतार थे । भारत से दूर इंडोनेशिया में वहां के लोगों ने अभी तक रामायण नृत्यनाटिका के माध्यम से राम के आदर्शों को संजोया है । रामायण वास्तव में घटित हुए अनेक युग बीत गए; परंतु विश्‍व में अनेक स्थानों पर अलग-अलग रूप में रामायण की कथा बताई जाती है । श्रीमन्नारायण स्वरूप श्रीरामजी की लीला विशद करनेवाले इन सभी भक्तों को त्रिवार वंदन ! परात्पर गुरुदेवजी, इसका प्रत्यक्ष अनुभव करने तथा सीखने का अवसर मिला; इसलिए हम सभी साधक आपके चरणों में कोटि-कोटि कृतज्ञ हैं ।

– श्री. विनायक शानभाग, इंडोनेशिया (२६.४.२०१८)