विवाह निश्‍चित करते समय वधु-वर की जन्मकुंडली मिलाने का महत्त्व

वधु-वर की जन्मकुंडलियां मिलाने का महत्त्व, इसके साथ ही  वैवाहिक जीवन आनंदमय होने के लिए क्या करना चाहिए, इस विषय में प्रस्तुत लेख !

अशुभ काल में जन्मे शिशु की ‘जननशांति’ करना क्यों आवश्यक है ?

‘जनन अर्थात जन्म होना । नवजात (हाल ही में जन्मे) शिशु के संदर्भ में दोष-निवारण के लिए की जानेवाली विधि को ‘जननशांति’ कहते हैं । नवजात शिशु का अशुभ काल में जन्म होने से अथवा विशिष्ट परिस्थिति में जन्म होने से दोष लगता है । इस विषय में अधिक जानकारी इस लेख द्वारा समझ लेंगे ।क्या जनन शांति अनिवार्य है ?

८.११.२०२२ को भारत में दिखाई देनेवाला संपूर्ण चंद्रग्रहण (ग्रस्तोदित), ग्रहण की अवधि, उसके नियम तथा राशि के अनुसार ग्रहण का फल !

कार्तिक पूर्णिमा (८.११.२०२२, मंगलवार) को भारतसहित संपूर्ण एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका का पूर्वी प्रदेश एवं संपूर्ण दक्षिण अमेरिका में यह ग्रहण दिखाई देगा । यह चंद्रग्रहण भारत में सर्वत्र ग्रस्तोदित स्वरूप में दिखेगा । उसके कारण भारत में कहीं भी ग्रहणस्पर्श दिखाई नहीं देगा । भारत के पूर्व के कुछ प्रदेशों में संपूर्ण अवस्था दिखाई दे सकती है; परंतु महाराष्ट्र एवं अन्य प्रदेश में यह ग्रहण आंशिक स्वरूप में दिखाई देगा ।

ज्योतिषशास्त्र को झूठा बोलनेवाले बुद्धिवादियों को तमाचा !

‘ज्योतिषशास्त्र मन और स्वभाव का भी वेध ले सकता है । इसलिए जाने-अनजाने में जिनके अपराध की ओर मुडने की संभावना हो, उन्हें समय रहते ही सावधान कर, इसके साथ ही जो पहले ही अपराधी जगत में प्रवेश कर चुके हैं, उन्हें अच्छे मार्ग पर लाने के लिए उनका मार्गदर्शन कर समाज में अपराध नियंत्रित करने में यह शास्त्र सहायता कर सकता है ।’

कैरियर’ और ‘धनयोग’ का ज्योतिषशास्त्र की दृष्टि से विश्लेषण !

‘जन्मकुंडली के अनुसार जिस क्षेत्र में अर्थप्राप्ति अच्छी होगी, उसका विचार कर शिक्षा लेना अधिक उचित होता है । ‘कौन-सा व्यवसाय करने पर अधिक पैसा मिलेगा ?’, इसके लिए कुंडली में स्थित धनत्रिकोण, अर्थात २, ६ और १० स्थान तथा इस राशि में ग्रहों की स्थिति व्यवसाय की दृष्टि से महत्वपूर्ण होती है ।

भगवान कार्तिकेय के स्वरूपवाला तेजस्वी नक्षत्र : कृत्तिका !

भारतीय कालगणना में चैत्रादी मास के नाम खगोल शास्त्र पर आधारित है । कार्तिक मास में सूर्यास्त होने पर कृत्तिका नक्षत्र पूर्वक्षितिज पर उदय होता है; साथ ही कार्तिक मास में पूर्णिमा तिथि के समय चंद्र कृत्तिका नक्षत्र में होता है ।

मनुष्य जीवन पर ग्रहदोषों के प्रभाव को सहनीय बनाने के लिए ‘साधना करना’ ही सर्वाेत्तम उपाय

ग्रहदोष का अर्थ कुंडली में ग्रहों की अशुभ स्थिति ! कुंडली में कोई ग्रह दूषित हो, तो उस व्यक्ति को उस ग्रह के अशुभ फल प्राप्त होते हैं,