धर्मसंस्थापक भगवान श्रीकृष्ण पर आक्षेप एवं उसका खंडन

‘अयोग्य टीका-टिप्पणियों का प्रतिवाद करना’, कालानुसार आवश्यक धर्मपालन ही है । इसी उद्देश्य से आगे ‘श्रीकृष्ण पर आक्षेप और उसका खंडन’ दिया है । प्रत्येक व्यक्ति का इसका अध्ययनपूर्वक मनन करना चाहिए ।

सात्त्विक उदबत्ती में बांस की लकडी का उपयोग करने पर भी उससे कोई हानि नहीं; अपितु लाभ ही होना एवं वह उदबत्ती धर्मशास्त्र के विरुद्ध भी न होना

सात्त्विक उदबत्ती में बांस की काडी होते हुए भी उसे जलाने के पश्चात उसमें जलाई गई धूपबत्ती समान ही सकारात्मक ऊर्जा पाई गई, लगभग उतनी ही सकारात्मक ऊर्जा सात्त्विक उदबत्ती में मिली ।

नामजप, देवी-देवता आदि के संबंध में कुछ टिप्पणी एवं उनका खंडन

अभ्यास एवं स्वानुभव न होते हुए भी पु.ल. देशपांडे ने किए नामजप के विषय के (नामस्मरण संबंधी) बेताल वक्तव्य ! मनोभाव से नामजप करने पर आचार में दोष नहीं रहता, यह सूर्यप्रकाश समान स्पष्ट है !

टिप्पणी : सभी हिंदू शाकाहारी होते हैं ।

हिन्दू धर्म की धार्मिक परंपराओं और हिन्दुओं के धर्माचरण के पीछे अध्यात्मशास्त्रीय आधार होता है । यह शास्त्र यदि हम समझ लें, तो हिन्दू धर्म की अद्वितीयता हमारे ध्यान में आएगी ।

ग्रहण के विषय में फैलाई जानेवाली भ्रांतियां

ग्रहण के विषय में अनेक बातें सामाजिक प्रचारमाध्यमों में घूमती रहती हैं । उनमें – ‘ग्रहणकाल में हवा अशुद्ध होती है’, ‘ग्रहणकाल में सोना नहीं चाहिए’ आदि बातें केवल गप हैं’, ऐसी आलोचना कुछ लोग करते हैं ।

हिन्दुओ, ‘मंदिर में पैसे चढाने के बजाय, वही पैसा मंदिर के बाहर बैठे भिखारियों को दें’, ऐसा कहकर भ्रमित करनेवाले और हिन्दू धर्मियों की श्रद्धा पर आघात करनेवाले आधुनिकतावादियों का कपट पहचानें !

प्रगतिशील लोगों को यदि निर्धनों पर इतनी दया आ रही है, तो उन्हें अब तक इन युवाओं को रोजगार देना चाहिए था ।

कोरोना, श्राद्धकर्म और अवसरवादी नास्तिक !

वर्तमान में नास्तिकों का बोलबाला है । वे कोरोना के कंधों पर हिन्दू धर्म को निशाना बनाने का कोई मौका नहीं चूकना चाहते ।

गणेशोत्सव की पार्श्‍वभूमि पर सामाजिक जालस्थलों के माध्यम से धर्मद्रोही आवाहन !

श्रीगणेश को फल-फूल और नैवेद्य अर्पण करने के पीछे शास्त्र और उसके आध्यात्मिक लाभ जाने बिना शास्त्र विरोधी आवाहन करने से धर्म की हानि होती है और पाप भी लगता है ।

अंनिस, समान संगठनों और प्रगतिवादियों द्वारा वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य की आलोचना

२० अगस्त को अंनिस जैसे संगठन, इसके साथ ही आधुनिकतावादियों द्वारा वैज्ञानिक दृष्टिकोण दिन मनाया जाता है । उसी पार्श्वभूमि पर १९ अगस्त को एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था । उस कार्यक्रम में उपस्थित सभी वक्ताओं ने टीका और बुद्धिभेद करनेवाले मत प्रस्तुत किए ।

जातपंचायत आवश्यक या अनावश्यक ?

नंदुरबार जिले के कांजारभाट समाज की एक विधवा पर अनैतिक संबंध का आरोप कर उसे नग्न करने का दंड देने की जातपंचायत के निर्णय के कारण प्रसारमाध्यमों में जातपंचायत आवश्यक अथवा अनावश्यक ?, इस विषय पर चर्चा हो रही थी । इस संदर्भ में सनातन का दृष्टिकोण आगे दिए अनुसार है ।