गणेशोत्सव की पार्श्‍वभूमि पर सामाजिक जालस्थलों के माध्यम से धर्मद्रोही आवाहन !

श्रीगणेश को फल-फूल और नैवेद्य अर्पण करने के पीछे शास्त्र और उसके आध्यात्मिक लाभ जाने बिना शास्त्र विरोधी आवाहन करने से धर्म की हानि होती है और पाप भी लगता है ।

अंनिस, समान संगठनों और प्रगतिवादियों द्वारा वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य की आलोचना

२० अगस्त को अंनिस जैसे संगठन, इसके साथ ही आधुनिकतावादियों द्वारा वैज्ञानिक दृष्टिकोण दिन मनाया जाता है । उसी पार्श्वभूमि पर १९ अगस्त को एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था । उस कार्यक्रम में उपस्थित सभी वक्ताओं ने टीका और बुद्धिभेद करनेवाले मत प्रस्तुत किए ।

जातपंचायत आवश्यक या अनावश्यक ?

नंदुरबार जिले के कांजारभाट समाज की एक विधवा पर अनैतिक संबंध का आरोप कर उसे नग्न करने का दंड देने की जातपंचायत के निर्णय के कारण प्रसारमाध्यमों में जातपंचायत आवश्यक अथवा अनावश्यक ?, इस विषय पर चर्चा हो रही थी । इस संदर्भ में सनातन का दृष्टिकोण आगे दिए अनुसार है ।

हिन्दुओं के आस्थास्थान प्रभु श्रीराम पर हुए आरोपों का खंडन

जब तक प्रभु श्रीराम पर हुए मिथ्या आरोप हम सुनेंगे, तब तक हमें भी सत्य का पता नहीं होगा, तो हमारे मन में श्रीराम के प्रति भाव निर्माण होना कठिन है । इसलिए आज हम इन मिथ्या आरोपों की वास्तविकता आपके सामने रखेंगे । इससे निश्‍चित ही आपके मन की शंका दूर होगी और आप भी ऐसे आरोप करनेवालों का सामना आत्मविश्‍वास के साथ कर सकते हैं ।

पितृपक्ष एवं श्राद्ध के संदर्भ में किया जानेवाला दुष्प्रचार तथा उसका खण्डन

तथाकथित आधुनिकतावादी गिरोह हिन्दुओं के अन्य त्योहारों के भांति श्राद्धपक्ष के संदर्भ में भी हिन्दुओं का बुद्धिभ्रम करने का प्रयास कर हिन्दुओं को धर्माचरण से परावृत्त करने का प्रयास करते हैं ।

मनुस्मृति का विरोध करनेवाले पहले ठीक से मनुस्मृति का अध्ययन करें !

कुछ मास पूर्व वेदशास्त्रसंपन्न विष्णुशास्त्री बापट ने ‘सार्थ श्रीमनुस्मृति’ इस नए नाम से मनुस्मृति का मराठी में भाषांतर कर उसका लोकार्पण किया था ।

नालासोपारा में हुई घटना से तनिक भी संबंध न होते हुए परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी की अपकीर्ति करने का अत्यंत अनुचित प्रयास !

नालासोपारा के प्रकरण से दूर-दूर तक संबंध न होते हुए भी सनातन संस्था के संस्थापक परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवले के छायाचित्र समाचार में निरंतर दिखाकर उनकी एवं सनातन संस्था की अपकीर्ति करने का अश्लील प्रकार इस समाचार द्वारा किया गया है ।

ज्ञानप्रबोधिनी या अज्ञानप्रबोधिनी ?

ज्ञानप्रबोधिनी की वटसावित्री पोथी के प्रारंभ में ऐसा उल्लेख है कि ‘पर्यावरण शुद्धि और रक्षा के लिए वटसावित्री की पूजा की जाती है !’ वटवृक्ष (बरगद का वृक्ष) की शुद्ध वायु सेे सत्यवान को होश आया जिससेे सावित्री को आनंद हुआ ।