भावी भीषण आपातकाल का सामना करने हेतु विविध स्तरों पर अभी से प्रयास आरंभ करें !
आपातकालीन परिस्थिति का सामना करने के लिए की जानेवाली तैयारी
आपातकाल में जीवनरक्षा हेतु आवश्यक पूर्वतैयारी : भाग – १
आपातकाल में जीवनरक्षा हेतु आवश्यक पूर्वतैयारी’ : भाग – २
आपातकाल में जीवनरक्षा हेतु आवश्यक पूर्वतैयारी : भाग – ३
आपातकाल में जीवनरक्षा हेतु आवश्यक तैयारी : भाग – ४
आपातकाल में जीवनरक्षा हेतु आवश्यक तैयारी : भाग – ५
आपातकाल में जीवनरक्षा हेतु आवश्यक तैयारी : भाग – ६
आपातकालमें जीवनरक्षा हेतु आवश्यक तैयारी : भाग – ७
आपातकालमें जीवनरक्षा हेतु आवश्यक तैयारी : भाग – ८
आपातकालमें जीवनरक्षा हेतु आवश्यक तैयारी : भाग – ९
आपातकालमें जीवनरक्षा हेतु आवश्यक तैयारी : भाग – १०
धर्मकार्य में योगदान दीजिए !
‘धर्म के अधिष्ठान पर ही ‘हिन्दू राष्ट्र’ की स्थापना होनेवाली है, इसलिए हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए सर्वत्र धर्मप्रसार का कार्य होना अत्यंत आवश्यक है। धर्मप्रसार के कार्य में ज्ञानशक्ति, इच्छाशक्ति और क्रियाशक्ति इन तीनों में से ज्ञानशक्ति का योगदान सर्वाधिक होता है।’
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बच्चे असंस्कारी होने का परिणाम !
‘मातृदेवो भव । पितृदेवो भव ।’ (तैत्तिरीयोपनिषद्, शीक्षा, अनुवाक ११, वाक्य २ ) अर्थात ‘माता और पिता को देवता मानें’, ऐसा बचपन में बच्चों पर संस्कार न करनेवाले माता-पिता के संदर्भ में बडे होने पर बच्चों की वृत्ति ऐसी होती है कि ‘मतलब निकल गया, तो पहचानते नहीं ।’ इस कारण वे माता पिता को … Read more













