
सनातन संस्थाके श्रद्धाकेन्द्र प.पू. भक्तराज महाराजजीको उनके सर्व भक्त बाबा कहते थे । श्री अनंतानंद साईश, प.पू. बाबाके गुरु थे । भजन, भ्रमण एवं भण्डारा; यही बाबाका जीवन था । लाखों कि.मी. भ्रमण कर उन्होंने अनेक लोगोंमें अध्यात्मके प्रति रूचि उत्पन्न की । प.पू. बाबाने १७.११.१९९५ को इन्दौरमें देहत्याग किया ।
शिष्यावस्थामें भजन ही बाबाकी साधना थी । गुरुपदपर विराजमान होनेके उपरान्त शिष्योंका मार्गदर्शन करने हेतु भजन ही बाबाका एक माध्यम बन गया था । इन भजनोंकी रचना स्वयं बाबाने की, उन्हें संगीतबद्ध कर स्वयं ही गाया । संक्षेपमें, प.पू. बाबा स्वयं ही भजनोंके रचनाकार, संगीतकार और गायक हैं, इसिलिए ये भजन चैतन्यमय हैं ।
बाबा भजनकी किसी पंक्तिके साथ राधा राधाकृष्ण राधा, विठ्ठल विठ्ठल, हरि ॐ तत्सत्, पावना दत्ता पतितपावना दत्ता जैसी धुन बीच-बीचमें गाया करते थे । इससे भजनकी पंक्तियोंके शब्दोंसे मिलनेवाले गायनके आनन्दमें, नामधुनकी लयका आनन्द मिलाया जाकर श्रोताआेंका आनन्द द्विगुणित होता था । ये नामधुन स्वयं बाबाने गायी हैं, इसलिए इन्हें भजनके बिना सुननेपर भी वे उतनी ही चैतन्यदायी हैं ।
कभी-कभी बाबा एक भजनमें दो अथवा दो से अधिक नामधुन गाते थे । बाबाने गायी नामधुनकी विशेषता यह है कि वेे एक ही धुन भिन्न-भिन्न प्रकारसे गाते थे । उसकी लय भिन्न होती है, शब्दोंमें उपर-नीचे होता है; परन्तु लगता है कि उन्हें सुनते ही रहे । नामधुन गाते समय बाबा थम भी गए, तो उनके द्वारा बजाई जा रही डफलीसे वह नामधुन स्पष्ट सुनाई देती है । राधा कृष्ण राधा जैसी नामधुन लगातार एक मिनटके लिए सुननेपर भी ध्यान जैसी अवस्था प्राप्त होती है । साथ ही उनमें निहित चैतन्यका लाभ होना, आनन्दकी अनुभूति होना, अष्टसात्त्विकभाव जागृत होना आदि अनुभूतियां होती हैं ।
प.पू. बाबाका अत्यन्त कृतज्ञतापूर्वक स्मरण कर तथा उन्हें वन्दन कर ये नामधुन उनके चरणोंमें अर्पित कर रहे हैं ।
ये नामधुन डाऊनलोड करनेकी सुविधा यहां उपलब्ध करवाई गई है ।
| प्रस्तावना | १. राम कृष्ण हरि |
| २. राधा राधाकृष्ण राधा | ३. राधा राधाकृष्ण राधा, हरि ॐ तत्सत् । |
| ४. विठ्ठल विठ्ठल | ५. ज्ञानेश्वर माऊली एकनाथ नामदेव तुकाराम |
| ६. पावना दत्ता पतितपावना दत्ता | ७. हरि ॐ तत्सत् । |
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