श्रीरामनवमी के उपलक्ष्य में श्रीसत्‌शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाळ का शुभसंदेश !

३०.३.२०२३ को श्रीरामनवमी है । उस उपलक्ष्य में आदर्श रामराज्य के संस्थापक प्रभु श्रीरामचंद्र के दैवीय गुणभंडार का भक्तिमय अवलोकन करते हुए मुझे रामायण काल का आगे दिए प्रसंग का स्मरण हुआ…

रामनवमी पूजाविधि

प्रभु श्रीराम का जन्म माध्यान्हकाल अर्थात दो. १२ बजे मनाया जाता है । प्रभु श्रीराम की मूर्ति की अथवा प्रतिमा, हमें जो भी संभव हो, उसका पंचोपचार अथवा षोडशोपचार पूजन करें ।

श्रीरामनवमी

श्रीराम के जन्म के उपलक्ष्य में श्रीरामनवमी मनाई जाती है । इस दिन जब पुष्य नक्षत्रपर, माध्यान्हके समय, कर्क लग्न में सूर्यादि पांच ग्रह थे, तब अयोध्या में प्रभु श्रीराम का जन्म हुआ ।

श्रीरामनवमी उत्सव मनानेकी पद्धति

त्रेतायुगमें श्रीविष्णुके सातवें अवतार श्रीरामजीने पुष्य नक्षत्रपर, मध्याह्न कालमें अयोध्यामें जन्म लिया । वह दिन था, चैत्र शुक्ल नवमी । तबसे श्रीरामजीके जन्मप्रीत्यर्थ श्रीरामनवमी मनाई जाती है ।