प्रयागराज : माघ मेले में सनातन संस्था की आध्यात्मिक ग्रंथसंपदा एवं धर्मशिक्षा फलक प्रदर्शनी

माघ मेला के पावन अवसर पर सनातन संस्था द्वारा अखिल भारतीय धर्मसंघ, त्रिवेणी मार्ग, उत्तरी पटरी, सेक्टर-3, माघ मेला क्षेत्र प्रयागराज में ‘‘आध्यात्मिक ग्रंथसंपदा एवं धर्मशिक्षा फलक प्रदर्शनी’’ का आयोजन किया गया है । यह प्रदर्शनी दिनांक 14 जनवरी 2023 से दिनांक 28 जनवरी 2023 तक प्रतिदिन प्रात: 9.30 से रात्रि 8.30 तक चलेगी ।

आरएसएस की अखिल भारतीय कार्यकारिणी बैठक के लिए गोवा पहुंचे मोहन भागवत

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत अखिल भारतीय समन्वय बैठक करने के लिए सोमवार को गोवा पहुंचे । सूत्रों के अनुसार, बैठक दक्षिण-गोवा के नगेशी-पोंडा में होगी ।

८.११.२०२२ को भारत में दिखाई देनेवाला संपूर्ण चंद्रग्रहण (ग्रस्तोदित), ग्रहण की अवधि, उसके नियम तथा राशि के अनुसार ग्रहण का फल !

कार्तिक पूर्णिमा (८.११.२०२२, मंगलवार) को भारतसहित संपूर्ण एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका का पूर्वी प्रदेश एवं संपूर्ण दक्षिण अमेरिका में यह ग्रहण दिखाई देगा । यह चंद्रग्रहण भारत में सर्वत्र ग्रस्तोदित स्वरूप में दिखेगा । उसके कारण भारत में कहीं भी ग्रहणस्पर्श दिखाई नहीं देगा । भारत के पूर्व के कुछ प्रदेशों में संपूर्ण अवस्था दिखाई दे सकती है; परंतु महाराष्ट्र एवं अन्य प्रदेश में यह ग्रहण आंशिक स्वरूप में दिखाई देगा ।

इस ग्रहणकाल में २४ घंटे कैसे उपवास रखें ?

८.११.२०२२ को चंद्रग्रहण है । सूतककाल में अन्नग्रहण करना निषिद्ध है । ऋषि-मुनियों ने ग्रहण के संबंध में इतने कठोर नियम क्यों बनाए हैं ?, ऐसे प्रश्न मन में उठ सकते हैं; परंतु आगे दिए गए उपवास के लाभ समझकर १ बार स्वयं उपवास कर उसका अनुभव करने से हमें ऋषि-मुनियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की इच्छा होगी । २४ घंटे उपवास करने से निम्नलिखित लाभ होते हैं ।

२५.१०.२०२२ को दिखाई देनेवाला खंडग्रास सूर्यग्रहण, ग्रहण की अवधि में पालन किए जानेवाले नियम तथा ग्रहण का राशि के आधार पर मिलनेवाला फल !

ग्रहणकाल में की जानेवाली साधना का फल सहस्रों गुना मिलता है । इसके लिए ग्रहणकाल में साधना को प्रधानता देना महत्त्वपूर्ण है । सूतकारंभ से लेकर ग्रहण समाप्त होने तक नामजप, स्तोत्रपाठ, ध्यानधारणा इत्यादि धार्मिक कार्याें में व्यस्त रहने से उसका लाभ मिलता है ।

प.पू. भक्तराज महाराजजी की धर्मपत्नी वात्सल्यमूर्ति प.पू. जीजी (प.पू. (श्रीमती) सुशीला कसरेकरजी) का देहत्याग !

सनातन संस्था के प्रेरणास्रोत प.पू. भक्तराज महाराजजी की (प.पू. बाबा की) धर्मपत्नी तथा पू. नंदू कसरेकरजी की माताजी प.पू. जीजी (प.पू. [श्रीमती] सुशीला कसरेकरजी) (आयु ८६ वर्ष) ने १८ सितंबर को दोपहर २ बजे नाशिक में उनके कनिष्ठ पुत्र श्री. रवींद्र कसरेकर के आवास पर देहत्याग किया ।

शारदापीठ तथा ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वतीजी महाराज का देहावसान !

द्वारका स्थित शारदापीठ तथा बद्रिकाश्रम के ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वतीजी महाराज के देहावसान से हिन्दू धर्म के लिए धधकती ब्राह्मतेजकी ज्वाला शांत हो गई ।

पितृपक्ष में महालय श्राद्ध कर पितरों का आशीर्वाद प्राप्‍त करें !

पितृपक्ष में पितृलोक पृथ्‍वीलोक के सर्वाधिक निकट आने से इस काल में पूर्वजों को समर्पित अन्‍न, जल और पिंडदान उन तक शीघ्र पहुंचता है । उससे वे संतुष्‍ट होकर परिवार को आशीर्वाद देते हैं । श्राद्धविधि करने से पितृदोष के कारण साधना में आनेवाली बाधाएं दूर होकर साधना में सहायता मिलती है ।

वाहन की दुर्घटना न हो, साधक इसकी दक्षता इस प्रकार लें तथा प्रवास में उपयोग करने का ‘दुर्घटना निवारण यंत्र’!

‘वर्तमान में आपत्काल की तीव्रता तथा अनिष्ट शक्तियों के आक्रमण बढ रहे हैं । अतः साधकों के संदर्भ में निरंतर वाहन की दुर्घटना होने की घटनाएं हो रही हैं । अतएव साधक दुपहिया तथा चारपहिया वाहन चलाते समय आगे प्रस्तुत सावधानी अवश्य लें ।

पूर्वजों के कष्ट दूर होने हेतु पितृपक्ष में नामजप और श्राद्धविधि करें !

साधकों के लिए सूचना १. भगवान दत्तात्रेय का नामजप करें । ‘आजकल अनेक साधकों को अनिष्ट शक्तियों के कष्ट हो रहे हैं । पितृपक्ष के काल में (१० से २४ सितंबर २०२२ की अवधि में) इन कष्टों में वृद्धि होने से इस कालावधि में प्रतिदिन न्यूनतम १ घंटा ‘ॐ ॐ श्री गुरुदेव दत्त ॐ ॐ’ नामजप … Read more