आतंकवादियों को ‘अजहरजी’ और ‘ओसामाजी’ कहनेवाली कांग्रेस का संबंध सनातन संस्था से जोडना, राजनीतिक दुष्प्रचार !

राजनीतिक स्पर्द्धा में सनातन संस्था का उपयोग किया गया है । इस दुष्प्रचार पर हिन्दू समाज विश्‍वास न करे, यह आवाहन सनातन संस्था के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्री. चेतन राजहंस ने आज किया है ।

 पुण्य का परिणाम 

मनुष्यको पुण्य की मात्रा अनुसार इहलोक में सुखप्राप्ति होती है और अंत में उसी पुण्य के बलपर स्वर्गसुख भी मिलता है । समष्टि पुण्य बढनेपर राष्ट्र आचारविचार संपन्न एवं समृद्ध होता है ।

पुण्य के प्रकार 

जीवन कर्ममय है । कर्मफल अटल है । अच्छे कर्म का फल पुण्य है तथा उससे सुख प्राप्त होता है, जबकि बुरे कर्म का फल पाप है और उससे दुःख प्राप्त होता है । पुण्य के निम्न प्रकार हैं …

पुण्य की व्याख्या एवं मिलने के कारण

जीवन कर्ममय है । कर्मफल अटल है । अच्छे कर्म का फल पुण्य है तथा उससे सुख प्राप्त होता है, जबकि बुरे कर्म का फल पाप है और उससे दुःख प्राप्त होता है ।

नामकरण

जिसप्रकार बच्चे का लिंग गर्भाशय में ही निश्चित होता है, उस प्रकार बच्चे का नाम भी पूर्वनिश्चित ही होता है । शब्द, स्पर्श, रूप, रस एवं गंध, ये घटक एकत्रित रहते हैं; इसीलिए बच्चे का जो रूप है उसके अनुसार उसका नाम भी होता है ।

जन्मदिन

‘जन्मदिन अर्थात जीव की आध्यात्मिक दृष्टि से उन्नति । आध्यात्मिक उन्नति का ही दूसरा नाम ‘वृद्धि’ अथवा ‘बढ़त’ है । जीव की निर्मिति से ही उसकी आध्यात्मिक उन्नति आरंभ होती है ।

परात्पर गुरु पांडे महाराज का छायाचित्रमय जीवनदर्शन

ईश्वर की कृपा से ही प.पू. बाबाजी के छायाचित्रों द्वारा दर्शाया गया यह अल्प परिचय उनके चरणों में सविनय अर्पण करते हैं !

भाव, आनंद, चैतन्य एवं ज्ञान का मूर्तिमंत रूप तथा ‘जैसा बोले वैसा चले, वंदनीय उसके चरण ।’ इस वचन को यथार्थ बनानेवाले एकमेवोद्वितीय महान तपस्वी परात्पर गुरु पांडे महाराज !

स्वयं ज्ञानी होते हुए भी परात्पर गुरु पांडे महाराज में कृतज्ञता एवं शरणागत भाव का अपूर्व संगम था । ऐसा तपोवृद्ध एवं ज्ञानवृद्ध महान व्यक्तित्व का अभाव हम सभी को नित्य प्रतीत होगा ।

सात्त्विक शक्ति के बलपर धर्मबोध एवं शौर्यबोध को जागृत करने का सनातन संस्था द्वारा हाथ में लिया गया कार्य प्रशंसनीय है ! – के.एन्. गोविंदाचार्य, इटर्नल हिन्दू फाऊंडेशन

भारत ही सात्त्विक शक्ति का केंद्रीय भूतपूर्व स्थान है । इस सत्य को जानकर सात्त्विक शक्ति का जागरण एवं शौर्यबोध इन दोनों का जागृत करने का सनातन संस्था द्वारा हाथ में लिया गया कार्य बहुत ही प्रशंसनीय है ।

यज्ञ का प्रथमावतार ‘अग्निहोत्र’के विषय में वैज्ञानिक शोध !

विज्ञान के माध्यम से अग्निहोत्र का वातावरणपर क्या परिणाम होता है ?, इसके अध्ययन हेतु महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय की ओर से एक परीक्षण किया गया । इस परीक्षण हेतु यू.टी.एस्. (युनिवर्सल थर्मो स्कैन) उपकरण का उपयोग किया गया ।

Donating to Sanatan Sanstha’s extensive work for nation building & protection of Dharma will be considered as

“Satpatre daanam”