हिन्दुओ, प्रभु श्रीरामचंद्रजी के चरणों में मनःपूर्वक कृतज्ञता व्यक्त करते हैं !

सनातन संस्था ने यह कहा है कि हमारी यह श्रद्धा है कि आज भगवान प्रभु श्रीरामचंद्रजी की कृपा से श्रीरामजन्मभूमि प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय की ओर से समस्त हिन्दू समाज के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय मिला है ।

श्रीरामजन्मभूमि के संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का रामनाम लेते हुए स्वीकार करें तथा सामाजिक सौहार्द बनाए रखें ! – सनातन संस्था

श्रीरामजी के नाम में बहुत शक्ति होने के कारण उनके प्रति श्रद्धा रखकर कृत्य करने से रामभक्त को निश्‍चित रूप से उनके नाम की अनुभूति होती है । हिन्दू समाज उस अनुभूति का अनुभव करने का प्रयास करे ।

रामनाथी आश्रम में स्वामी मच्छिंद्रनाथ प्रवीणराजबाबाजी ने किए मृत्युंजय याग, उग्रप्रत्यंगिरा याग और नवग्रह याग !

मंगलुरू (कर्नाटक) के स्वामी मच्छिंद्रनाथ प्रवीणराजबाबाजी ने यहां के सनातन आश्रम में मृत्युंजय याग, उग्रप्रत्यंगिरा याग और नवग्रह याग किए ।

भुवनेश्‍वर (ओडिशा) के आध्यात्मिक पुस्तक मेले में सनातन संस्था की ग्रंथ प्रदर्शनी का उत्स्फूर्त प्रत्युत्तर !

भुवनेश्वर (ओडिशा) यहां १९ से २७ अक्टूबर की कालावधि में आयोजित ‘गुंडीचा आध्यात्मिक पुस्तक मेले’ में सनातन संस्था द्वारा प्रकाशित ग्रंथ और सात्त्विक उत्पादों की प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था ।

रामनाथी (गोवा) के सनातन आश्रम में चैतन्यमय वातावरण में संपन्न हुआ पंचमहाभूत याग

‘परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी को दीर्घायु प्राप्त हो, पंचमहाभूतों के प्रकोप से साधकों की रक्षा हो और हिन्दू राष्ट्र स्थापना में उत्पन्न सूक्ष्म की सभी बाधाएं दूर हों; इसके लिए पुणे के संत प.पू. आबा उपाध्येजी की आज्ञा से १८ अक्टूबर २०१९ को यहां के सनातन आश्रम में ‘पंचमहाभूत याग’ किया गया ।

संवेदनाओं को नष्ट करनेवाले भ्रमणभाष का व्यसन छुडाने हेतु प्रयास होना आवश्यक !

स्मार्टफोन के कारण मस्तिष्क का पत्थर बनता जा रहा है । ब्लू वेल और पबजी जैसे प्राणघाती खेलों के व्यसन से अभी सतर्क रहिए ।

धनतेरस के उपलक्ष्य में धर्मप्रसार कार्य हेतु सत्पात्र दान देकर श्री लक्ष्मीजी की कृपा संपादन करें !

धर्मप्रसार करनेवाले संत, साथ ही राष्ट्र एवं धर्म की रक्षा हेतु कार्य करनेवाली संस्थाएं अथवा संगठनों के कार्य हेतु दान देना काल के अनुसार सर्वश्रेष्ठ दान है ।

दृष्टिहीन संत सूरदासजी की भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य भक्ति के दर्शन !

‘सूरदासजी ने प्रभु श्रीकृष्ण की नित्यनूतन पदों से शब्दपूजा करने का अपना नित्यक्रम जारी रखा । एक दिन पुजारी, अर्चनक (पूजा करनेवाला) और गोस्वामी के बच्चों में सूरदासजी की अद्भुत प्रतिभा के बारे में चर्चा प्रारंभ हुई ।

श्रीरामतत्त्व आकर्षित करनेवाली रंगोलियां

संवत्सरारंभ, श्रीरामनवमी, आदित्यपूजन, दशहरा (विजयादशमी) एवं मकरसंक्रांति तिथी पर श्रीरामतत्त्व की रंगोलियां बनाएं ।