हनुमानजी को घर में नहीं, अपितु घर के बाहर रखना है, क्या यह सही है ?

हनुमानजी को घर में नहीं रखना, भगवान श्रीकृष्ण का महाभारत का चित्र घर में नहीं रखना, सुदर्शन चक्रवाला चित्र घर में नहीं रखना, यह सब अंधविश्वास की बातें हैं ।

शनि की साढेसाती दूर करने के लिए हनुमानकी पूजा कैसे करनी चाहिए ?

सूर्य तेज से संबंधित है, जबकि हनुमानजी वायुतत्त्व से संबंधित हैं । पृथ्वी, आप, तेज, वायु और आकाश, इन पंचतत्त्वों में तेजतत्त्व से वायुतत्त्व अधिक प्रभावी माना गया है । इस कारण शनि के साढेसाती का परिणाम हनुमानजी पर नहीं होेता ।

मडगाव विस्फोट प्रकरण में सनातन संस्था का निर्दोषत्व पुनः एक बार सिद्ध !

मा. मुंबई उच्च न्यायालय के गोवा खंडपीठ ने विशेष न्यायालय का निर्णय कायम रखते हुए सभी आरोपियों को निर्दोष मुक्त किया है ।

अधिक मास के उपलक्ष्य में अखंडित धर्मप्रसार का कार्य करनेवाले सनातन आश्रमों में अन्नदान कर पुण्यसंग्रह के साथ आध्यात्मिक लाभ भी प्राप्त करें !

धर्मशास्‍त्र कहता है कि सद़्‍भावना पूर्वक ‘सत्‍पात्रे अन्‍नदान’ करने से अन्‍नदाता को उसका उचित फल मिलता है तथा सभी पापों से उसका उद्धार होकर वह ईश्‍वर के निकट पहुंचता है । अन्‍नदान करने से अन्‍नदाता को आध्‍यात्‍मिक स्‍तर पर भी लाभ होता है ।

समर्थ रामदास स्वामीजी द्वारा दासबोध में किया गया नवविधा भक्ति का वर्णन !

समर्थ जी ने साधना का मुख्य साधन श्रवण बताया है । अनेक विषयों का श्रवण करें, ऐसा उन्होंने बताया है कर्ममार्ग, ज्ञानमार्ग, सिद्धांतमार्ग, योगमार्ग, वैराग्यमार्ग, विविध व्रत, विविध तीर्थ, विविध दान, विविध महात्मा, योग, आसन, सृष्टीज्ञान, संगीत, चौदह विद्या, चौसंठ कला, यह सब श्रवण करने के लिए बताते हैं ।

श्रवण भक्ति का आदर्श उदाहरण

‘श्रवणभक्ति’ कहते ही राजा परिक्षित का स्मरण होता है । राजा परीक्षित, अर्जुनपुत्र अभिमन्यु के पुत्र ! राजा परीक्षित धर्मात्मा और सत्यनिष्ठ थे ।

अधिक अथवा ‘पुरुषोत्तम मास’ का महत्त्व, इस अवधि में किए जानेवाले व्रत, पुण्य कारक कृत्य और इन्हें करने का अध्यात्मशास्त्र !

अधिक मास किसी बडे पर्व की भांति होता है । इसलिए इस मास में धार्मिक कृत्‍य किए जाते हैं और ‘अधिक मास महिमा’ ग्रंथ का वाचन किया जाता है ।

नवविधा भक्ति – कीर्तन भक्ति !

नवविधा भक्ति का श्रवण, कीर्तन यह क्रम सृष्टिक्रम के अनुरूप है । मनुष्य जब जन्म लेता है, तब वह जो सीखना आरंभ करता है, वह श्रवण से सीखता है

देहली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश एवं बिहार में ‘पितृपक्ष’ संबंधी ‘ऑनलाइन’ प्रवचनोंका सनातन संस्था की ओर से आयोजन

श्राद्ध अथवा पितृपक्ष में समाज को इस विषय की शास्‍त्रीय जानकारी मिले और पितृदोष से रक्षा हो, इसलिए उत्तर भारत के विविध राज्‍यों में ‘ऑनलाइन’ प्रवचन का आयोजन किया ।

सनातन संस्था की ओर से पितृपक्ष के उपलक्ष्य में किशोरों के लिए से ऑनलाइन सत्‍संगों का आयोजन

सनातन संस्‍था की ओर से पितृपक्ष के उपलक्ष्य में ९ वर्ष से १३ वर्ष की किशोर अवस्‍था के बच्‍चों के लिए पितृपक्ष से संबंधित धर्मशास्‍त्र पर आधारित ‘ऑनलाइन’ बालसत्‍संग का आयोजन किया गया ।