सोलापुर में ‘साधनावृद्धि शिविर’ में साधना की दिशा प्राप्त होने का, सम्मिलित वाचकों का प्रतिपादन !

हिन्दू जनजागृति समिति तथा सनातन संस्था की ओर से १ जुलाई को दैनिक सनातन प्रभात के वाचक, हितचिंतक,अर्पणदाता इन सभी के लिए ‘साधनावृद्धि शिविर’ का आयोजन किया गया था ।

निःशुल्क आयुर्वेदिक न्यूरो थेरपी वैद्यकीय शिविर में सम्मिलीत हुए वैद्यों की सनातन के आश्रम को सदिच्छा भेंट !

म्हापसा में २४ से ३० जून इस कालावधी में संपन्न हुए निःशुल्क आयुर्वेदीक न्यूरो थेरपी वैद्यकीय शिविर में सामाजिक कर्तव्य के रूप में सेवाभावी वृत्ती से साqम्मलित हुए वैद्यों ने २ जुलाई को यहां के सनातन के आश्रम को सदिच्छा भेंट की ।

यूनिवर्सल ऑरा स्कॅनर (UAS)

यू.टी.एस उपकरण का परिचय :इस उपकरण को ऑरा स्कैनर भी कहते हैं । इससे घटकों (वस्तु,भवन,प्राणी और मनुष्य)की ऊर्जा और उनका प्रभामंडल मापा जा सकता है ।

औषधीय वनस्पतियों का रोपण साधना के रूप में करें !

औषधीय वनस्पतियों के आसपास का वातावरण जितना सात्त्विक होगा, उतनी वे अधिक सात्त्विक बनती हैं । जितना सत्त्वगुण अधिक हो, उतना ही वनस्पतियोंके औषधीय गुण भी बढते हैं ।

अन्य फसल के साथ लगाई जानेवाली औषधीय वनस्पतियां तथा परती भूमि में, अत्यल्प श्रम तथा पानी अल्प होने पर रोपी जा सकनेवाली औषधीय वनस्पतियां

प्रकृति में खरपतवार के रूप में बडी मात्रा में उगनेवाली वनस्पतियों को अलग से लगाने की आवश्यकता नहीं रहती; परंतु हमें ऐसी वनस्पतियों की पहचान होनी चाहिए

लोकमान्य तिलक की प्रेरणा से आरंभ सार्वजनिक गणेशोत्सव का इतिहास और उससे मिली स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा !

पुणे के वैद्य खाजगीवाले ग्वालियर का सार्वजनिक गणेशपूजन को देखकर प्रभावित होना तथा अपने मित्रों से पुणे में सार्वजनिक गणेशोत्सव आरंभ करने के लिए कहना और सर्वसम्मति से पुणे में पहली बार सार्वजनिक गणेशमूर्ति बैठाना 

शिष्यभाव का महत्त्व

साधना में साधक के लिए शिष्यभाव में रहना बहुत महत्त्वपूर्ण होता है । वह जब शिष्य बनता है, तब उसकी आगे की प्रगति गुरुकृपा से ही होती है । शिष्य बनने पर ही, गुरु साधक का पूरा दायित्व लेते हैं ।

स्वभावदोष-निर्मूलन प्रक्रिया करने से साधकों पर हुए परिणामों का वैज्ञानिक परीक्षण

सामान्य व्यक्ति अथवा वस्तु का प्रभामण्डल लगभग १ मीटर होता है । प्रक्रिया आरम्भ करने से पहले साधक और साधिका का प्रभामण्डल क्रमशः १.५२ मीटर एवं १.५० मीटर था । प्रक्रिया १ मास करने पर उनका प्रभामण्डल क्रमशः १.७४ मीटर तथा १.६० मीटर हो गया, अर्थात दोनों का प्रभामण्डल क्रमशः २२ सें.मी. एवं १० सें.मी. बढ गया ।

खामगांव में महेश नवमी के उपलक्ष्य में ‘धार्मिक कृतियों के पीछे क्या शास्त्र है ?’ इस प्रवचन का आयोजन !

१९ जून को महेश नवमी के उपलक्ष्य में यहां के माहेश्वरी भवन में आयोजित किए गए कार्यक्रमों में सनातन के साधकों को ‘हिन्दु धर्म के विभिन्न धार्मिक कृतियों के पीछे क्या शास्त्र है तथा जीवन में साधना का क्या महत्त्व है ?’ इस विषय पर प्रवचन करने हेतु आमंत्रित किया गया था ।