अग्निहोत्र
मानव की रक्षा करनेवाला एक पवित्र यज्ञ
सरल मंत्रोच्चारण सहित दी गई आहुतियों द्वारा वातावरण, मन एवं आत्मा की शुद्धि करनेवाले इस प्राचीन तथा शक्तिशाली यज्ञ को अनुभव करें ।
अग्निहोत्र करने के लाभ
विकिरण (किरणोत्सर्ग अथवा radiation) से सुरक्षा
यह विकिरण, साथ ही परमाणु युद्ध से होनेवाले प्रदूषण से भी रक्षा करता है ।
वातावरण का शुद्धीकरण
यह वायु को शुद्ध करके प्रदूषण को न्यून (कम) करता है तथा वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा को बढाता है ।
नकारात्मक स्पंदनों का नाश
वातावरण में नकारात्मक स्पंदनों से रक्षा होने के कारण मानसिक तनाव दूर होता है तथा सात्विक स्पंदनों में वृद्धि होती है ।
प्रकृति एवं वास्तु के लिए पूरक
यह प्रकृति को संतुलित करके उस स्थान के पर्यावरण में असंतुलन को दूर करता है ।
रोगकारक कीटाणुओं का निरोधन
अग्निहोत्र के औषधियुक्त वातावरण के कारण रोगकारक कीटाणुओं की वृद्धि में प्रतिबंध होता है ।

पर्यावरण और कृषि के लिए लाभदायक
यह औषधीय, साथ ही चैतन्यपूर्ण वातावरण का निर्माण करता है । अग्निहोत्र की राख मिट्टी की उर्वरता को बढाती है, फसलों की वृद्धि को अच्छा करती है तथा अनाज, फल, सब्जियों के पोषक मूल्य में सुधार करती है ।

मानसिक स्वास्थ्य सुधरना
अग्निहोत्र से मन शांत और तनावमुक्त होता है, इच्छाशक्ति बढती है, साथ ही व्यसन पर नियंत्रण पाने में सहायता मिलती है । बच्चों के व्यवहार में अच्छे परिवर्तन देखे जाते हैं, उनकी एकाग्रता बढती है तथा सभी आयु वर्ग के लोगों की भावनात्मक स्थिरता में वृद्धि होती है ।

आध्यात्मिक एवं सुरक्षात्मक ऊर्जा प्रदान करना
अग्निहोत्र से एक दैवीय सुरक्षा कवच निर्मित होता है, दैवीय सूक्ष्म शक्ति आकर्षित होती है तथा आध्यात्मिक प्रगति के लिए अनुकूलता मिलती है । प्राणशक्ति की शुद्धि होने से मन आनंद एवं ध्यान की अवस्था का अनुभव करता है ।
अग्निहोत्र के ४ सरल चरण

सामग्री एकत्र करना
गाय के गोबर के उपले, गाय का घी, अक्षत एवं हवन पात्र (पिरामिड आकार का तांबे का पात्र)

समय का पालन करना
अग्निहोत्र केवल स्थानीय सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय ही करना चाहिए ।

वैदिक मंत्र बोलना
सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय के लिए दिए गए विशिष्ट मंत्रों का उच्चारण करें ।

अक्षत की आहुति देना
घी में भिगोए हुए अक्षत की मंत्रोच्चार करते हुए अग्नि में आहुति दें ।

सामग्री एकत्र करना
गाय के गोबर के उपले, गाय का घी, चावल (अक्षत) एवं विशिष्ट आकार का (पिरामिड) तांबे का हवन पात्र ।

समय का पालन करना
अग्निहोत्र केवल स्थानीय सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय ही करना चाहिए ।

वैदिक मंत्र बोलना
सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय के लिए दिए गए विशिष्ट मंत्रों का उच्चारण करें ।

अक्षत की आहुति देना
घी में भिगोए हुए अक्षत की मंत्रोच्चार करते हुए अग्नि में आहुति दें ।
अग्निहोत्र के मंत्र
सूर्योदय के समय का मंत्र
सूर्याय स्वाहा, सूर्याय इदं न मम ।
(इस मंत्र का उच्चारण करते हुए पहली आहुति दें ।)
प्रजापतये स्वाहा, प्रजापतय इदं न मम ।
(यह मंत्रोच्चार करते हुए दूसरी आहुति दें ।)
सूर्यास्त के समय का मंत्र
अग्नये स्वाहा, अग्नय इदं न मम ।
(इस मंत्र का उच्चारण करते हुए पहली आहुति दें ।)
प्रजापतये स्वाहा, प्रजापतय इदं न मम ।
(यह मंत्रोच्चार करते हुए दूसरी आहुति दें ।)
सत्संग : अध्यात्म और विज्ञान का अनूठा संगम
प्राचीन ज्ञान और आधुनिक साधनों का मेल बिठाकर जीवन को समृद्ध करनेवाले इस समूह में आपका स्वागत है । सनातन हिन्दू धर्म के गूढ और गहन ज्ञान का अध्ययन-अभ्यास कर, उसके अनुसार दैनिक जीवन में आचरण करने से होनेवाले सकारात्मक परिवर्तन को अनुभव करने के लिए हमसे जुडें ।
अध्यात्म और हिन्दू संस्कृति से संबंधित अपना ज्ञान बढाने के लिए हमारे निःशुल्क ऑनलाइन सत्संगों से जुडें अथवा अधिक जानकारी के लिए हमसे संपर्क करें ।

















