परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के अमृत महोत्सव समारोह के समय तुला का यू.टी.एस. (यूनिवर्सल थर्मो स्कैनर) उपकरण से महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय द्वारा किया वैज्ञानिक परीक्षण !

अत्युच्च स्तर के संत ईश्‍वर के सगुण रूप होते हैं । उनकी देह सात्त्विकता का स्रोत होती है । इसलिए संतों के संपर्क में आने पर चराचर इस सात्त्विकता से भारित हो जाता है और उसमें विविध सकारात्मक परिवर्तन होते हैं ।

‘महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय’ की ओर से ‘अन्य भाषाआें की तुलना में संस्कृत भाषा तथा लिपि का सूक्ष्म परिणाम’ विषय पर शोध प्रबंध प्रस्तुत

देहली विश्‍वविद्यालय के सत्यवती महाविद्यालय में ‘संस्कृत का वैश्‍विक परिदृश्य’ इस विषय पर राष्ट्रीय परिषद का आयोजन किया गया था ।

विविध संगीत का वैज्ञानिक परीक्षण !

शास्त्रज्ञों के मतानुसार कष्टदायक संगीत, सर्वाधिक शिथिलता उत्पन्न करनेवाला पश्‍चिमी संगीत, सुप्रसिद्ध भारतीय शास्त्रीय गायक का गायन और संतों द्वारा गाये हुए भजनों का व्यक्ति पर होनेवाले अध्यात्मस्तरीय परिणाम का अध्ययन करने के लिए ‘यू.टी.एस.’ नामक उपकरण के माध्यम से ‘महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय’ द्वारा किया गया वैज्ञानिक परीक्षण !

देहली विश्‍वविद्यालय के राष्ट्रीय परिषद में महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय द्वारा शोधप्रबंध प्रस्तुत

देहली विश्‍वविद्यालय में २८ व २९ मार्च को संस्कृत विभाग द्वारा राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया । विश्‍वविद्यालय के संस्कृत विभाग ने एम.ए. तथा एम.फिल. इंटर डिसिप्लिनरी कोर्सके छात्रों के लिए इस परिषद का आयोजन किया था ।

वर्तमानयुग की नाडी-ज्योतिष के विषय में आध्यात्मिक शोध’ विषय पर महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय ने प्रस्तुत किया शोध-निबंध !

महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय की कुमारी प्रियांका लोटलीकर ने कुलाबा (मुंबई) में हुए नाडीज्योतिष सम्मेलन में विचार व्यक्त किया कि ‘नाडी-पट्टिका के माध्यम से महर्षि ने सबको उच्च कोटि का ज्ञान उपलब्ध कर दिया है ।

संस्कृत साहित्य का महत्त्व दर्शानेवाला शोधनिबंध ‘महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय’ द्वारा प्रस्तुत

देहली विश्‍वविद्यालय के कालिंदी कॉलेज में ५० वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में दिनांक २ और ३ मार्च को ‘संस्कृत साहित्य एवं जीवनमूल्य’ इस विषय पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया ।

नामजप, मुद्रा और न्यास के, गर्भवती स्त्री और गर्भ पर किया गया वैज्ञानिक परीक्षण

नामजप, मुद्रा और न्यास के, गर्भवती स्त्री और गर्भ पर आध्यात्मिक स्तर पर होनेवाले प्रभाव का अध्ययन करने हेतु ‘पिप’ प्रणाली की सहायता से ‘महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय’ द्वारा किया गया वैज्ञानिक परीक्षण

सनातन संस्था के संस्थापक परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के मार्गदर्शन में सनातन द्वारा विविध क्षेत्रों में किया आध्यात्मिक शोध

अनिष्ट शक्ति, घरों में हुए परिवर्तन और दैवीकणों से संबंधित सैकडों संदर्भ सनातन ने दृश्य-श्रव्य चक्रिकाआें में उपलब्ध करवा दिए हैं । इस शोधकार्य में महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय से भी सहायता मिल रही है । यह शोध अब महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय के जालस्थल (वेबसाइट) पर प्रकाशित किए गए हैं ।

७८ वर्षीय प.पू. रामभाऊस्वामीजी के चिकित्सकीय परीक्षण की जानकारी और कुछ अनुत्तरित प्रश्‍न !

तमिलनाडू के तंजावुर स्थित ७८ वर्षीय परम पूजनीय रामभाऊस्वामीजी ने वर्ष १९७५ से जलप्राशन नहीं किया है । वर्ष १९७७ से वे केवल दो केले और एक प्याली दूध, दिन में केवल एक ही बार ले रहे हैं । ऐसा होते हुए भी वे पूर्णतः कार्यक्षम हैं ।

वैज्ञानिक दृष्टि से ॐ का महत्त्व !

कुछ दिन पहले नासा (नैशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन, अमेरिकन संस्थान) द्वारा सूर्य के नाद का उपग्रह के माध्यम से किया ध्वनिमुद्रण यू-ट्यूब नामक जालस्थल पर उपलब्ध है ।