मन को अंर्तमुख कैसे करें?
एकाग्र मन से नामजप करने पर हमें अधिक आनंद होता है । एकाग्रता से नामजप करने से अंतर्मन पर नामजप का संस्कार दृढ होता है और ईश्वर से अधिक सुरक्षा प्राप्त होती है ।
एकाग्र मन से नामजप करने पर हमें अधिक आनंद होता है । एकाग्रता से नामजप करने से अंतर्मन पर नामजप का संस्कार दृढ होता है और ईश्वर से अधिक सुरक्षा प्राप्त होती है ।
पूजाघर में कुलदेवता, श्री गणपति, कुलाचार के अनुसार बालगोपाल, हनुमान एवं श्री अन्नपूर्णा रखें । इनके अतिरिक्त अन्य देवता जैसे शिव, दुर्गा समान किसी उच्चदेवता की उपासना करते हों, तो वह रखें ।
आध्यात्मिक शोधकार्य से यह देखा गया है कि जब हम अवयव दान करते हैं, तब हम लेन-देन निर्माण करते हैं और अवयव (अंग) प्राप्त होनेवाले व्यक्ति के कर्मों द्वारा संचित पाप तथा पुण्य में सहभागी होते हैं ।
जिसे आप विज्ञान समझते हैं, वह केवल भौतिक विज्ञान है । भारतीय ज्ञान का एक छोटा-सा भाग है विज्ञान ! भौतिक विज्ञान अर्थात सायंस जिस भारतीय विज्ञान का एक हिस्सा है । वह विज्ञान भी अध्यात्म (ज्ञान) का एक हिस्सा है ।
सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा आयोजित किए जानेवाले ऑनलाइन सत्संगों के चित्रीकरण के लिए विविध उपकरणों की आवश्यकता है ।
‘समाज नामजप आदि साधना का महत्त्व समझे और इसके साथ ही राष्ट्र और धर्म कार्य का प्रसार हो’, इस दृष्टि से सनातन संस्था एवं हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से ‘ऑनलाइन सत्संग शृंखला’ प्रसारित की जा रही है ।
ग्रहण के विषय में अनेक बातें सामाजिक प्रचारमाध्यमों में घूमती रहती हैं । उनमें – ‘ग्रहणकाल में हवा अशुद्ध होती है’, ‘ग्रहणकाल में सोना नहीं चाहिए’ आदि बातें केवल गप हैं’, ऐसी आलोचना कुछ लोग करते हैं ।
मृत व्यक्ति के साथ घर के लोगों का लगाव अथवा प्रेम होता है । उन्हें लगता है कि उनके कारण वे अच्छी स्थिति में हैं ।
भारत के ऋषि, चिंतक तथा तपस्वियों ने ऐसे शाश्वत सिद्धांत दिए, जिसमें उपर्युक्त चारों सत्ताओं में सामंजस्य बना रहता है । एक-दूसरे को सहयोग करते हुए समस्त विविधताओं की रक्षा करते हुए ये सत्ताएं पूर्ण विकास की दिशा में अग्रसर होती थीं ।
सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि घर के सदस्य साधना करें । इसका कारण यह है कि वास्तु पर सबसे अधिक प्रभाव घर में रहनेवाले व्यक्तियों के स्वभाव अथवा आचरण का होता है । साधना से आपकी और वास्तु की भी सुरक्षा होगी ।