कुछ देवियोंकी उपासनाकी विशेषताएं

आठ गुप्ततर योगिनी मुख्य देवताके नियंत्रणमें विश्वका संचलन, वस्तुओंका उत्सर्जन, परिणाम इत्यादि कार्य करते हैं । ‘संधिपूजा’ नामक एक विशेष पूजा अष्टमी एवं नवमी तिथियोंके संधिकालमें करते हैं ।

श्री सरस्वतीदेवी

१. अर्थ, कुछ अन्य नाम एवं रूप अ. अर्थ ‘सरसः अवती’, अर्थात एक गति में ज्ञान देनेवालीं (गतिमति) । श्री सरस्वतीदेवी निष्क्रिय ब्रह्मा का सक्रिय रूप हैं; इसीलिए उन्हें ‘ब्रह्मा-विष्णु-महेश’, तीनों को गति देनेवाली शक्ति कहते हैं । आ. कुछ अन्य नाम १. शारदा : शारदा अर्थात षट्शास्त्रों के अध्ययन को अर्थात ज्ञान को आधार … Read more

रामभक्तशिरोमणी भरत की आध्यात्मिक गुणविशेषताएं !

इस लेख में हम रामभक्त भरत की आध्यात्मिक गुणविशेषताएं देखेंगे और भरत समान असीम रामभक्ति को अपने हृदय में निर्माण होने के लिए भगवान के श्रीचरणों में प्रार्थना करेंगे ।

प्रभु श्रीराम के अस्तित्व का स्मरण करवानेवाले रामसेतु के चैतन्यमय पत्थर एवं श्रीरामकालीन सिक्के

प्रभु श्रीराम के अस्तित्व का स्मरण करवानेवाले रामसेतु के चैतन्यमय पत्थर एवं श्रीरामकालीन सिक्के

शिवतत्त्व का लाभ करानेवाले प्रमुख व्रत एवं उत्सव

शिवतत्त्व का लाभ करानेवाले अलग अलग व्रत हैं, जैसे प्रदोष व्रत, हरितालिका, श्रावण सोमवार और कार्तिक सोमवार, श्रावणी सोमवार एवं शिवमुष्टिव्रत, शिवपरिक्रमा व्रत. इस व्रतोंकी जानकारी हम इस लेख में देखेंगे।

सनातन धर्म अनेक रूपों में ईश्‍वर को पूजता है, ऐसा क्‍यों ?

हिन्‍दू धर्म में परमेश्‍वर, ईश्‍वर, अवतार तथा देवता ऐसी संकल्‍पना है । ‘ईश्‍वर’ शब्‍द सामान्‍यतः जगन्‍नियंता, सृष्‍टि-स्‍थिति-प्रलय के कर्ता, सर्वव्‍यापक, सर्वांतर्यामी और देवाधिदेव आदि अर्थों से उपयोग किया जाता है । प्रत्‍यक्ष में ईश्‍वर एक ही हैं, तथा वह निर्गुण, निराकार हैं ।

श्री सरस्वतीदेवी की उपासना एवं सरस्वती यंत्रका कार्य

नववर्षारंभ तथा दशहरे के दिन सरस्वतीपूजन करें । ब्रह्मांड में नववर्षारंभ पर श्री सरस्वतीदेवी के तारक तत्त्व की तरंगें एवं दशहरे के दिन महासरस्वतीदेवी के मारक तत्त्व की तरंगें कार्यरत होती हैं ।

कुछ ईश्‍वर को मानते हैं और कुछ नहीं, ऐसा क्यों ?

जिसे आप विज्ञान समझते हैं, वह केवल भौतिक विज्ञान है । भारतीय ज्ञान का एक छोटा-सा भाग है विज्ञान ! भौतिक विज्ञान अर्थात सायंस जिस भारतीय विज्ञान का एक हिस्सा है । वह विज्ञान भी अध्यात्म (ज्ञान) का एक हिस्सा है ।

हनुमानजी को घर में नहीं, अपितु घर के बाहर रखना है, क्या यह सही है ?

हनुमानजी को घर में नहीं रखना, भगवान श्रीकृष्ण का महाभारत का चित्र घर में नहीं रखना, सुदर्शन चक्रवाला चित्र घर में नहीं रखना, यह सब अंधविश्वास की बातें हैं ।

शनि की साढेसाती दूर करने के लिए हनुमानकी पूजा कैसे करनी चाहिए ?

सूर्य तेज से संबंधित है, जबकि हनुमानजी वायुतत्त्व से संबंधित हैं । पृथ्वी, आप, तेज, वायु और आकाश, इन पंचतत्त्वों में तेजतत्त्व से वायुतत्त्व अधिक प्रभावी माना गया है । इस कारण शनि के साढेसाती का परिणाम हनुमानजी पर नहीं होेता ।