हनुमानजी को घर में नहीं, अपितु घर के बाहर रखना है, क्या यह सही है ?
हनुमानजी को घर में नहीं रखना, भगवान श्रीकृष्ण का महाभारत का चित्र घर में नहीं रखना, सुदर्शन चक्रवाला चित्र घर में नहीं रखना, यह सब अंधविश्वास की बातें हैं ।
हनुमानजी को घर में नहीं रखना, भगवान श्रीकृष्ण का महाभारत का चित्र घर में नहीं रखना, सुदर्शन चक्रवाला चित्र घर में नहीं रखना, यह सब अंधविश्वास की बातें हैं ।
सूर्य तेज से संबंधित है, जबकि हनुमानजी वायुतत्त्व से संबंधित हैं । पृथ्वी, आप, तेज, वायु और आकाश, इन पंचतत्त्वों में तेजतत्त्व से वायुतत्त्व अधिक प्रभावी माना गया है । इस कारण शनि के साढेसाती का परिणाम हनुमानजी पर नहीं होेता ।
मा. मुंबई उच्च न्यायालय के गोवा खंडपीठ ने विशेष न्यायालय का निर्णय कायम रखते हुए सभी आरोपियों को निर्दोष मुक्त किया है ।
धर्मशास्त्र कहता है कि सद़्भावना पूर्वक ‘सत्पात्रे अन्नदान’ करने से अन्नदाता को उसका उचित फल मिलता है तथा सभी पापों से उसका उद्धार होकर वह ईश्वर के निकट पहुंचता है । अन्नदान करने से अन्नदाता को आध्यात्मिक स्तर पर भी लाभ होता है ।
समर्थ जी ने साधना का मुख्य साधन श्रवण बताया है । अनेक विषयों का श्रवण करें, ऐसा उन्होंने बताया है कर्ममार्ग, ज्ञानमार्ग, सिद्धांतमार्ग, योगमार्ग, वैराग्यमार्ग, विविध व्रत, विविध तीर्थ, विविध दान, विविध महात्मा, योग, आसन, सृष्टीज्ञान, संगीत, चौदह विद्या, चौसंठ कला, यह सब श्रवण करने के लिए बताते हैं ।
‘श्रवणभक्ति’ कहते ही राजा परिक्षित का स्मरण होता है । राजा परीक्षित, अर्जुनपुत्र अभिमन्यु के पुत्र ! राजा परीक्षित धर्मात्मा और सत्यनिष्ठ थे ।
नवविधा भक्ति का श्रवण, कीर्तन यह क्रम सृष्टिक्रम के अनुरूप है । मनुष्य जब जन्म लेता है, तब वह जो सीखना आरंभ करता है, वह श्रवण से सीखता है
श्राद्ध अथवा पितृपक्ष में समाज को इस विषय की शास्त्रीय जानकारी मिले और पितृदोष से रक्षा हो, इसलिए उत्तर भारत के विविध राज्यों में ‘ऑनलाइन’ प्रवचन का आयोजन किया ।
सनातन संस्था की ओर से पितृपक्ष के उपलक्ष्य में ९ वर्ष से १३ वर्ष की किशोर अवस्था के बच्चों के लिए पितृपक्ष से संबंधित धर्मशास्त्र पर आधारित ‘ऑनलाइन’ बालसत्संग का आयोजन किया गया ।
सनातन संस्था की ओर से शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में ‘वर्तमान आपातकाल – सुरक्षित तथा आनंदमय जीवन हेतु अध्यात्म’ विषय पर ‘विशेष ऑनलाइन शिक्षक प्रवचन’ आयोजित हुआ ।