वास्तुशास्त्र (भवननिर्माणशास्त्र)

विदेशी वास्तुशास्त्र में भवन के केवल टिकाऊपन पर बल दिया गया है; परंतु भारतीय वास्तुशास्त्र में टिकाऊपन के साथ-साथ उसमें रहनेवाले व्यक्ति, उसकी सोच और देवता के प्रति श्रद्धा का भी विचार किया गया है ।

भवन जिस विचार अथवा भाव से बनाया जाता है, उसमें वैसी विचार-तरंगें उत्पन्न होती हैं !

धनी लोगों को अपने धन का बहुत गर्व होता है । वे धन के बल पर ऊंचे-ऊंचे भवन बनवाते हैं । ये भवन देखनेयोग्य होते हैं । परंतु, वहां से जानेवाले कुछ लोगों को यह भवन अद्भुत लगता है, तो कुछ को इससे इर्ष्या होती है ।

‘गुरु सर्व प्रकार से साधक का भार उठाते हैं’, इसकी साधक को हुई प्रतीति !

‘गुरुदेव किस प्रकार शिष्य की सभी बातों की ओर ध्यान देते हैं !’, इस विचार से मुझे गुरुदेव के प्रति पुनः-पुन: कृतज्ञता व्यक्त हो रही थी । वे अपने शिष्य का सर्व प्रकार से भार उठाते हैं…

कुटुंब के व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव’ होते हुए श्री. अतुल देव को नामजप एवं गुरुकृपा के संदर्भ में हुई अनुभूति

साधकों में साधना की गंभीरता टिकी रहे, इस हेतु संत निरंतर भान करवाते रहते हैं । ‘काल अपना मुंह खोले निगलने के लिए खडा है और प्रारब्ध का पहाड सिर पर है’, इस संतवचन की प्रचीति कोरोना महामारी के रूप में आए आपातकाल में मुझे कुछ मात्रा में अनुभव हुई । इस विषय में गत २ माह की अवधि में आए अनुभव यहां दिए हैं ।

पति को ’कोरोना विषाणु’का संसर्ग होने के उपरांत श्रीमती भक्ती भिसे को हुए अनुभव एवं अनुभूतियां !

पति श्री. नित्यानंद की ‘कोरोना विषाणु’ की जांच की गई । जांच की रिपोर्ट आने पर पता चला कि उन्हें कोरोना हुआ है । तब से मेरे नकारात्मक और डर के विचार बढ गए । जब उन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भरती किया गया, तब मेरे मन में भय के विचार और अधिक बढ गए और मुझे असुरक्षित लगने लगा ।

आपातकालीन परिस्थिति उत्पन्न होने पर मानसिक समस्याओं पर कुछ उपाययोजना

मन अस्थिर होना, तनाव आना, चिंता लगना, भय लगना, परिस्थिति न स्वीकार पाना इत्यादि कष्ट होते हैं । अनेक लोगों को भविष्यकाल में संभाव्य आपत्तियों की कल्पना से भी ऊपर दिए गए कष्ट होते हैं । इसके साथ ही सगे-संबंधियों में भावनिकदृष्टि से अटकना होता है

दंगलसदृश भीषण परिस्थिति का सामना करना संभव हो, इस उद्देश्य से स्वयंसूचना देकर अपना मनोबल बढाएं !

ऐसे समय पर सर्वत्र विध्वंस होना, आग लगना, गली-गली मृतदेहें पडी होना, ऐसी स्थिति सर्वत्र दिखाई देती है । ऐसी घटना देखकर अथवा सुनकर अनेकों का मन अस्थिर होना, तनाव आना, चिंता लगना, भय लगना, परिस्थिति न स्वीकार पाना इत्यादि कष्ट होते हैं ।

मनुष्य के विविध कुकर्म और तदनुसार उसे होनेवाली नरकयातना (श्रीमद्भागवत्)

मनुष्य के त्रिगुणों के कारण होनेवाले कृत्यों का फल
शुकदेव गोस्वामी महाराज परिक्षित से कहते हैं, यह जग ३ प्रकार के कृत्यों से भरा है । सत्त्वगुण (भलाई के उद्देश्य से किए जानेवाले कृत्य), रजोगुण (वासना के अधीन होकर होनेवाले कृत्य) और तमोगुण (अज्ञान के कारण होनेवाले कृत्य) । इसलिए उन्हें ३ विविध प्रकार के परिणाम भोगने पडते हैं ।

प्रारब्ध 

‘अध्यात्म विषयक बोधप्रद ज्ञानामृत’ लेखमाला से भक्त, संत तथा ईश्‍वर, अध्यात्म एवं अध्यात्मशास्त्र तथा चार पुरुषार्थ ऐसे विविध विषयों पर प्रश्‍नोत्तर के माध्यम से पू. अनंत आठवलेजी ने सरल भाषा में उजागर किया हुआ ज्ञान यहां दे रहे हैं । इस से पाठकों को अध्यात्म के तात्त्विक विषयों का ज्ञान होकर उनकी शंकाओं का निर्मूलन होगा तथा वे साधना करने के लिए प्रवृत्त होंगे ।

भीषण रेल दुर्घटना में भी केवल गुरुकृपा से रक्षा होने के विषय में श्री श्याम राजंदेकर की अनुभूति

भीषण रेल दुर्घटना में भी केवल गुरुकृपा से तीव्र प्रारब्ध में कैसे रक्षा होती है यह श्री श्याम राजंदेकर की अनुभूति विस्तृत में जान लेंगे |