आज की स्थिति में ‘कोरोना विषाणु’ संक्रमण के कारण मृतक के शरीर पर अग्निसंस्कार करना संभव न हो, तो ऐसी स्थिति में धर्मशास्त्र के अनुसार की जानेवाली ‘पलाशविधि’ !

कोरोना विषाणु संक्रमण के कारण मृतक व्यक्ति का शरीर अथवा उसकी अस्थियां उसके परिवारजनों को नहीं सौंपी जातीं । ऐसी स्थिति में भी धर्मशास्त्र के अनुसार ‘पलाशविधि’ करना उचित होगा ।

मृत्युपरांत के शास्त्रोक्त क्रियाकर्म करना महत्वपूर्ण क्यों हैं ?

मृत्युपरांत के क्रियाकर्म को श्रद्धापूर्वक एवं विधिवत् करने पर मृत व्यक्ति की लिंगदेह भूलोक अथवा मृत्युलोकमें नहीं अटकती, वह सद्गति प्राप्त कर आगे के लोकों में बढ सकती है ।

अनिष्ट शक्तियोंके आक्रमणोंसे मृतदेहकी रक्षा करनेके उपाय ।

मृतदेहके चारों ओर बक्से (गत्ते) लगाना, प्रत्येक आधे घंटेके उपरांत उनके देहपर तीर्थ छिडकना, चमेलीकी उदबत्ती लगाना, श्री गुरुदेव दत्तका नामजप लगाना, मृतदेहके चारों ओर दत्तात्रेय देवताकी नामजप-पट्टियोंका मंडल बनाना इत्यादिसे मृतदेहपर होनेवाले अनिष्ट शक्तियोंके आक्रमण घट जाते हैं ।