हिन्दू धर्म

वास्तव में हिन्दू शब्द की व्याख्या है ‘हीनानि गुणानि दूषयति इति हिंदु ।’ अर्थात ‘हीन गुणों का नाश करनेवाला हिन्दू है ।’

भक्ति के सुंदर उदाहरण वाला जनाबाई के जीवन का प्रसंग

जनाबाई जैसे भक्त बनने के लिए उनकी ही तरह हर काम में, हर प्रसंग में ईश्‍वर को अपने साथ अनुभव करना, उनसे हर प्रसंग का आत्मनिवेदन करते रहना, उनको ही अपना सब मानकर अपनी सब बातें बताना आवश्यक है ।

प्राचीन भारतीय नौकाशास्त्र में मत्स्ययंत्र के अलौकिक तंत्र

वेद से लेकर अनेक भारतीय पौराणिक ग्रंथों में महासागर, समुद्र और नदियों से जुडी ऐसी अनेकानेक घटनाओं का उल्लेख है, जिससे यह पता चलता है कि भारतीयों को नौकायान का ज्ञान आदिकाल से ही रहा है । भारतीय साहित्यकला, मूर्तिकला, चित्रकला और पुरातत्व-विज्ञान से प्राप्त अनेक साक्ष्यों से भारत की समुद्री परंपराओं का अस्तित्व प्रमाणित … Read more

सनातन धर्म अनेक रूपों में ईश्‍वर को पूजता है, ऐसा क्‍यों ?

हिन्‍दू धर्म में परमेश्‍वर, ईश्‍वर, अवतार तथा देवता ऐसी संकल्‍पना है । ‘ईश्‍वर’ शब्‍द सामान्‍यतः जगन्‍नियंता, सृष्‍टि-स्‍थिति-प्रलय के कर्ता, सर्वव्‍यापक, सर्वांतर्यामी और देवाधिदेव आदि अर्थों से उपयोग किया जाता है । प्रत्‍यक्ष में ईश्‍वर एक ही हैं, तथा वह निर्गुण, निराकार हैं ।

क्या गंगा नदी में डुबकी लगाने से हमारे पाप धुल जाऐंगे ?

लाखों की संख्या में श्रद्धालु गंगा जी में स्नान कर डुबकी लगाते हैं । डुबकी लगाने से हमारे पाप धुल जाऐंगे ऐसे विचार से डुबकी लगाते हैं । हमारी गंगा मैया में आस्था रहती है, और हमारी श्रद्धा के अनुसार हमें उसका पुण्य भी मिलता है ।

स्वामी विवेकानंद

वर्तमान लेख में, हमने स्वामी विवेकानंद द्वारा प्रदान की गई सेवा, गुरु के प्रति उनके दृष्टिकोण, गुरुकृपा के महत्व और गुरुकृपा और गुरुकृपा के कारण व्यक्तिगत लक्ष्य को कैसे पूरा किया, इस पर चर्चा की है।

स्वामी विवेकानंद के समाज को प्रबुद्ध करनेवाले वचन !

भयंकर दोष उत्पन्न करनेवाली आज की शिक्षा पद्धति की तुलना में मनुष्य का चारित्र बनानेवाली शिक्षा देना क्यों आवश्यक है, इसपर स्वामी विवेकानंद के अमूल्य विचार हम प्रस्तुत लेख में जानेंगे ।