गोमूत्र की सहायता से जलप्रदूषण पर परिणामकारी उपाय !

शिवाजी विश्वविद्यालय के युवा शोधकर्ता छात्र प्रशांत सावळकर एवं ऋतुजा मांडवक ने देसी गीर गाय के मूत्र की (गोमूत्र की) सहायता से चांदी धातु का विघटन कर उससे रुपहले सूक्ष्म कण (नैनो पार्टिकल्स) तैयार किए हैं । इस शोध से यह बात सामने आई है कि ‘चांदी के यह अरबांश कण (सिल्वर नैनो पार्टिकल्स) वस्रोद्योग से बाहर निकलनेवाले अत्यंत विषैले पानी के शुद्धिकरण के लिए उपयोग किए जा सकते हैं ।

यज्ञयाग का मनुष्य एवं पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पडता है ! – शोध के निष्कर्ष

हाल ही में हुए एक शोध में यह बात सामने आई है कि यज्ञयाग से मनुष्य का तनाव अल्प होने के साथ-साथ वातावरण के प्रदूषण का स्तर भी न्यून होता है ।

स्मृतिकार एवं गोत्रप्रवर्तक पराशर ॠषि का तपोस्थल एवं ‘पराशर ताल’

हिमाचल प्रदेश को ‘देवभूमि हिमाचल’ कहा जाता है । युग-युग से हिमाचल प्रदेश देवताओं एवं ऋषि-मुनियों का निवासस्थान रहा है । यहां वसिष्ठ, पराशर, व्यास, जमदग्नि, भृगु, मनु, विश्वामित्र, अत्री आदि अनेक ऋषियों की तपोस्थली, साथ ही शिव-पार्वती से संबंधित अनेक दिव्य स्थान हैं ।

महाराष्ट्र के नाथ स्थल (महाराष्ट्र : नवनाथों की भूमि)

भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नियोजित नवनारायण अर्थात नवनाथों की ख्याति आज भी विश्‍व में आस्था का विषय है । सामान्य भक्तों से लेकर विद्वानों तक सभी को नाथ के कार्य से आनंद मिलता है । हम सभी की उपस्थिति में संपन्न हो रहा यह सम्मेलन उसी का प्रतीक है ।

अयोध्या के श्री कालाराम मंदिर में विराजमान हैं सम्राट विक्रमादित्य द्वारा स्थापित मंदिर के प्राचीन रामपंचायतन !

‘बाबर के आक्रमण में श्रीराम जन्‍मभूमि ध्‍वस्‍त होने से पूर्व वहां का भव्‍य श्रीराममंदिर सम्राट विक्रमादित्‍य ने लगभग २००० वर्ष पूर्व निर्माण किया था । उस समय सम्राट विक्रमादित्‍य द्वारा स्‍थापित हुई श्रीरामपंचायतन मूर्ति वर्तमान में अयोध्‍या के श्री कालाराम मंदिर में विराजमान है ।

हरिद्वार के कुंभ मेले में सनातन संस्था की पुस्तक प्रदर्शनी में जिज्ञासुओं की उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया !

हरिद्वार यहां चल रहे कुंभ मेले में प्रथम पवित्र स्नान के अवसर पर सनातन संस्था द्वारा आयोजित पुस्तक प्रदर्शनी में श्रद्धालुओं द्वारा उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया व्यक्त की गई ।

मानसरोवर का महत्त्व

प्रतिदिन ब्राह्ममुहूर्त पर सप्तर्षि और देवता ज्योति के रूप में मानसरोवर में स्नान करने हेतु आते हैं और सूर्योदय से पूर्व ये ज्योतियां कैलास पर्वत की ओर शिवजी के दर्शन करने चली जाती हैं । परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी की कृपा से हम सबको इन दिव्य ज्योतियों के रात २.३० से तडके ५ बजे तक दर्शन हुए । यह सब गुरुदेवजी की कृपा है ।

शिवतत्त्व का लाभ करानेवाले प्रमुख व्रत एवं उत्सव

शिवतत्त्व का लाभ करानेवाले अलग अलग व्रत हैं, जैसे प्रदोष व्रत, हरितालिका, श्रावण सोमवार और कार्तिक सोमवार, श्रावणी सोमवार एवं शिवमुष्टिव्रत, शिवपरिक्रमा व्रत. इस व्रतोंकी जानकारी हम इस लेख में देखेंगे।

हिन्दू धर्म

वास्तव में हिन्दू शब्द की व्याख्या है ‘हीनानि गुणानि दूषयति इति हिंदु ।’ अर्थात ‘हीन गुणों का नाश करनेवाला हिन्दू है ।’