अपनी सहज बातचीत एवं सरल व्यवहार से भक्तों को सिखानेवाले प.पू. भक्तराज महाराजजी !
ऐसे अनेक प्रसंग हैं कि जब आरंभ में प.पू. भक्तऱाज महाराजजी की बातें तर्कहीन लगी थीं; परंतु गुरु की कोई भी बात तथा उनका व्यवहार वैसा नहीं होता । अर्थात वे जो बोलते हैं, वह हमें उस समय समझ में नहीं आता; परंतु कुछ समय उपरांत हमें उन बातों में छिपा अर्थ समझ में आता है ।
