विजयवाडा (आंध्र) प्रदेश का कनकदुर्गा मंदिर

आंध्र प्रदेश के कृष्णा नदी के तटपर बंसा हुआ बडा नगर है ‘विजयवाडा’ ! यहां कृष्णातटपर इंद्रकीलादी नामक पर्वत है, जहां ऋषिमुनियों ने तपश्चर्या की थी ।

प्रभु श्रीरामचंद्रजी के सान्निध्य के कारण पवित्र अयोध्यानगरी की पवित्रमय वास्तु !

जिस पवित्र स्थानपर प्रभु रामचंद्रजी का राज्याभिषेक हुआ, उस पवित्र स्थान को अब ‘राजगद्दी’ कहा जाता है ।

बचपन से ही कठोर साधना कर दिव्य तेज प्राप्त किए हुए और श्रीराम मंदिर का निदिध्यास रखनेवाले प.पू. भगवानदास महाराज !

कार्तिक शुक्ल पक्ष चतुर्दशी (११.११.२०१९) को पानवळ, बांदा (जनपद सिंधुदुर्ग, महाराष्ट्र) के प.पू. भगवानदास महाराज (प.पू. दास महाराज के पिता) का स्मृतिदिवस था । उसके उपलक्ष्य में यह लेख प्रकाशित कर रहे हैं ।

दृष्टिहीन संत सूरदासजी की भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य भक्ति के दर्शन !

‘सूरदासजी ने प्रभु श्रीकृष्ण की नित्यनूतन पदों से शब्दपूजा करने का अपना नित्यक्रम जारी रखा । एक दिन पुजारी, अर्चनक (पूजा करनेवाला) और गोस्वामी के बच्चों में सूरदासजी की अद्भुत प्रतिभा के बारे में चर्चा प्रारंभ हुई ।

श्रीरामतत्त्व आकर्षित करनेवाली रंगोलियां

संवत्सरारंभ, श्रीरामनवमी, आदित्यपूजन, दशहरा (विजयादशमी) एवं मकरसंक्रांति तिथी पर श्रीरामतत्त्व की रंगोलियां बनाएं ।

श्रीकृष्णतत्त्व आकर्षित करनेवाली रंगोलियां

सनातन हिंदू धर्म में अनेक त्यौहार हैं । उस दिन वातावरण में त्यौहार से संबंधित विशिष्ट देवता का तत्त्व प्रचुर मात्रा में कार्यरत रहता है । इस तत्त्व का लाभ अधिक से अधिक होने हेतु प्रयास किए जाते हैं ।

दत्तात्रेय-तत्त्व आकर्षित और प्रक्षेपित करनेवाली कुछ रंगोलियां

भगवान दत्तात्रेय की पूजा से पूर्व तथा दत्त जयंती के दिन घर पर अथवा देवालय में दत्तात्रेय-तत्त्व आकर्षित और प्रक्षेपित करने वाली सात्त्विक रंगोलियां बनानी चाहिए ।

भावना के स्तरपर किसी भी प्रकार का असंवैधानिक कृत्य करने की सनातन संस्था की सीख नहीं है !

अध्यात्म में कर्मफलसिद्धांत को महत्त्वपूर्ण माना गया है । कर्म का फल अटल होता है । किए गए कर्मों का फल पाप-पुण्य के रूप में भोगना पडता है ।

कश्मीर घाटी के कई वर्षों से बंद कुछ मंदिरों की जानकारी

‘रूट्स इन कश्मीर’के प्रवक्ता अमित रैना ने बताया, ‘‘वर्ष १९८६ के पश्चात धर्मांधों ने कश्मीर के कई मंदिरों को अपना लक्ष्य बनाया था ।