अपनी सहज बातचीत एवं सरल व्यवहार से भक्तों को सिखानेवाले प.पू. भक्तराज महाराजजी !

ऐसे अनेक प्रसंग हैं कि जब आरंभ में प.पू. भक्तऱाज महाराजजी की बातें तर्कहीन लगी थीं; परंतु गुरु की कोई भी बात तथा उनका व्यवहार वैसा नहीं होता । अर्थात वे जो बोलते हैं, वह हमें उस समय समझ में नहीं आता; परंतु कुछ समय उपरांत हमें उन बातों में छिपा अर्थ समझ में आता है ।

मनुष्य जीवन की संकीर्णता से व्यापकता की ओर होनेवाली प्राकृतिक यात्रा दर्शानेवाले जन्मकुंडली के १२ स्थान !

जन्मकुंडली के १२ स्थान मनुष्य की प्राकृतिक जीवनयात्रा दर्शाते हैं । यह यात्रा संकीर्णता से व्यापकता की ओर, स्थूल से सूक्ष्म की ओर, तामसिकता से सात्त्विकता की ओर एवं अज्ञान से ज्ञान की ओर है । प्रस्तुत लेख से हम जन्मकुंडली के १२ स्थानों का रहस्य समझ लेते हैं ।

श्रीरामनवमी के उपलक्ष्य में ‘रामनाम संकीर्तन’ अभियान का आयोजन करें !

रामनाम संकीर्तन का स्वरूप : रामराज्य के लिए प्रार्थना (५ मिनट), श्रीरामनाम का जप (५० मिनट), हिन्दू राष्ट्र की  प्रतिज्ञा (५ मिनट)

भाद्रपद पूर्णिमा (७.९.२०२५) को लगनेवाला संपूर्ण चंद्रग्रहण !

रविवार, ७.९.२०२५ (भाद्रपद पूर्णिमा) को लगनेवाला संपूर्ण चंद्रग्रहण भारत में सर्वत्र दिखाई देगा । संपूर्ण चंद्रगहण को अंग्रेजी में Total lunar eclipse कहते हैं । चंद्रग्रहण पूर्णिमा के दिन ही लगता है ।

भारतभर के लाखों श्रद्धालुओं के श्रद्धास्थान कटरा (जम्मू) की श्रीवैष्णोदेवी !

श्रीवैष्णोदेवी का मंदिर समुद्रतल से ५ सहस्र २०० फुट की ऊंचाई पर है । यह मंदिर जम्मू जिले के कटरा से १४ किलोमीटर चढाई करने के पश्चात एक पहाडी पर है । यह अत्यंत जागृत देवस्थान के रूप में प्रसिद्ध है । इस स्थान पर देशभर से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं ।

द्वापरयुग में पांडवों ने एक ही रात में निर्माण किया बनखंडी, जिला कांगडा में श्री बगलामुखी मंदिर !

द्वापरयुग में पांडवों ने अज्ञातवास के समय एक रात में यह मंदिर बनाया और पूजाअर्चा की । इस मंदिर में प्रथम अर्जुन और भीम ने युद्धकला में सफलता मिलने के लिए देवी की उपासना की थी और शत्रुसंहारिणी देवी बगलामुखी मंदिर में विविध प्रकार के कष्टों के निवारण के लिए शत्रुुनाश हवन करवाया था ।

राजा धन्यमाणिक को स्वप्नदृष्टांत देकर माताबरी (त्रिपुरा) में स्थानापन्न हुई श्रीत्रिपुरासुंदरीदेवी !

त्रिपुरा राज्य के उदयपुर शहर के निकट माताबरी गांव में श्रीत्रिपुरासुंदरीदेवी का मंदिर है । यह ५१ शक्तिपीठों में से एक पीठ है । यहां सती के बाएं पैर की उंगलियां गिरी थीं । कलियुग में इस स्थान पर धन्यमाणिक नामक राजा ने मंदिर निर्माण किया और इस मंदिर में त्रिपुरासुंदरीदेवी की स्थापना की ।

बीरभूम (बंगाल) के महास्मशान में विराजमान श्री तारादेवी !

तारापीठ मंदिर के सामने ही महास्मशान है । जिस स्मशान में १ करोड मृतदेहों का अग्निसंस्कार हो चुका होता है, उसे ‘महास्मशान’ कहते हैं ।

कर्नाटक राज्य के शृंगेरी (जिला चिक्कमगळुरू) और कोल्लुरू (जिला उडुपी) के मंदिर

कर्नाटक राज्य के चिक्कमगळुरू जिले में तुंगा नदी के तट पर शृंगेरी नाम का गांव है । यहां के पर्वत पर पहले शृंगऋषि रहते थे; इसलिए इस स्थान का नाम ‘शृंग गिरि’ पडा । आगे शृंगगिरी का रूपांतर ‘शृंगेरी’ हो गया । २ सहस्र ६०० वर्षों पूर्व आद्य शंकराचार्य इस स्थान पर आए थे ।

स्वयंभू गणेशमूर्ति

श्री विघ्नेश्‍वर, श्री गिरिजात्मज एवं श्री वरदविनायक की मूर्तियां स्वयंभू हैं । बनाई गईं श्री गणेशमूर्ति की तुलना में स्वयंभू गणेशमूर्ति में चैतन्य अधिक होता है । स्वयंभू गणेशमूर्ति द्वारा वातावरणशुद्धी का कार्य अनंत गुना अधिक होता है ।