महाराष्ट्र के नाथ स्थल (महाराष्ट्र : नवनाथों की भूमि)

भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नियोजित नवनारायण अर्थात नवनाथों की ख्याति आज भी विश्‍व में आस्था का विषय है । सामान्य भक्तों से लेकर विद्वानों तक सभी को नाथ के कार्य से आनंद मिलता है । हम सभी की उपस्थिति में संपन्न हो रहा यह सम्मेलन उसी का प्रतीक है ।

अयोध्या के श्री कालाराम मंदिर में विराजमान हैं सम्राट विक्रमादित्य द्वारा स्थापित मंदिर के प्राचीन रामपंचायतन !

‘बाबर के आक्रमण में श्रीराम जन्‍मभूमि ध्‍वस्‍त होने से पूर्व वहां का भव्‍य श्रीराममंदिर सम्राट विक्रमादित्‍य ने लगभग २००० वर्ष पूर्व निर्माण किया था । उस समय सम्राट विक्रमादित्‍य द्वारा स्‍थापित हुई श्रीरामपंचायतन मूर्ति वर्तमान में अयोध्‍या के श्री कालाराम मंदिर में विराजमान है ।

हरिद्वार के कुंभ मेले में सनातन संस्था की पुस्तक प्रदर्शनी में जिज्ञासुओं की उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया !

हरिद्वार यहां चल रहे कुंभ मेले में प्रथम पवित्र स्नान के अवसर पर सनातन संस्था द्वारा आयोजित पुस्तक प्रदर्शनी में श्रद्धालुओं द्वारा उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया व्यक्त की गई ।

मानसरोवर का महत्त्व

प्रतिदिन ब्राह्ममुहूर्त पर सप्तर्षि और देवता ज्योति के रूप में मानसरोवर में स्नान करने हेतु आते हैं और सूर्योदय से पूर्व ये ज्योतियां कैलास पर्वत की ओर शिवजी के दर्शन करने चली जाती हैं । परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी की कृपा से हम सबको इन दिव्य ज्योतियों के रात २.३० से तडके ५ बजे तक दर्शन हुए । यह सब गुरुदेवजी की कृपा है ।

शिवतत्त्व का लाभ करानेवाले प्रमुख व्रत एवं उत्सव

शिवतत्त्व का लाभ करानेवाले अलग अलग व्रत हैं, जैसे प्रदोष व्रत, हरितालिका, श्रावण सोमवार और कार्तिक सोमवार, श्रावणी सोमवार एवं शिवमुष्टिव्रत, शिवपरिक्रमा व्रत. इस व्रतोंकी जानकारी हम इस लेख में देखेंगे।

हिन्दू धर्म

वास्तव में हिन्दू शब्द की व्याख्या है ‘हीनानि गुणानि दूषयति इति हिंदु ।’ अर्थात ‘हीन गुणों का नाश करनेवाला हिन्दू है ।’

भक्ति के सुंदर उदाहरण वाला जनाबाई के जीवन का प्रसंग

जनाबाई जैसे भक्त बनने के लिए उनकी ही तरह हर काम में, हर प्रसंग में ईश्‍वर को अपने साथ अनुभव करना, उनसे हर प्रसंग का आत्मनिवेदन करते रहना, उनको ही अपना सब मानकर अपनी सब बातें बताना आवश्यक है ।

प्राचीन भारतीय नौकाशास्त्र में मत्स्ययंत्र के अलौकिक तंत्र

वेद से लेकर अनेक भारतीय पौराणिक ग्रंथों में महासागर, समुद्र और नदियों से जुडी ऐसी अनेकानेक घटनाओं का उल्लेख है, जिससे यह पता चलता है कि भारतीयों को नौकायान का ज्ञान आदिकाल से ही रहा है । भारतीय साहित्यकला, मूर्तिकला, चित्रकला और पुरातत्व-विज्ञान से प्राप्त अनेक साक्ष्यों से भारत की समुद्री परंपराओं का अस्तित्व प्रमाणित … Read more