रामनाथी (गोवा) के सनातन आश्रम में श्रीकृष्ण जयंती समारोह भावपूर्ण वातावरण में मनाया गया
श्रावण कृष्ण पक्ष सप्तमी अर्थात २३ अगस्त को यहां के सनातन आश्रम में श्रीकृष्ण जयंती का समारोह भावपूर्ण वातावरण में मनाया गया ।
श्रावण कृष्ण पक्ष सप्तमी अर्थात २३ अगस्त को यहां के सनातन आश्रम में श्रीकृष्ण जयंती का समारोह भावपूर्ण वातावरण में मनाया गया ।
नया पारगांव-वारणानगर (जनपद कोल्हापुर, महाराष्ट्र) के तात्यासाहेब कोरे दंत महाविद्यालय के छात्रों को सनातन संस्था की ओर से ‘गणेशोत्सव आदर्श एवं वास्तविकता’ विषयपर मार्गदर्शन किया गया ।
सनातन संस्था की ओर से देहली विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा स्थापित स्वतंत्रतावीर सावरकर, नेताजी सुभाषचंद्र बोस एवं भगत सिंह की मूर्तियों को २३ अगस्त को माल्यार्पण कर अभिवादन किया गया, साथ ही उच्च शिक्षा संचलनालय के कार्यालय में ज्ञापन प्रस्तुत किया गया ।
जगद्गुरु योगऋषी डॉ. स्वामी सत्यप्रकाशजी ने अपने मार्गदर्शन में आगे कहा, ‘‘परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के कारण ही यह सब कार्य हो रहा है । वहीं सभी के प्रेरणास्रोत हैं । हम उनके विद्यार्थी हैं ।
रामनाथी आश्रम में स्वामीजी ने योग, संगीत आदि विषयोंपर मार्गदर्शन किया । उन्हों ने किस विषयपर मार्गदर्शन करना है, यह स्वयं सुनिश्चित न कर उसे संबंधित साधकों के पूछ लिया ।
वैनकुवर (कॅनाडा) में स्थित जगद्गुरु योगऋषी डॉ. स्वामी सत्य प्रकाशजी का सनातन आश्रम में १६ अगस्त को आगमन हुआ ।
बेलगांव (कर्नाटक) के पुराने पी.बी. मार्गपर स्थित श्री रेणुका मंदिर में सनातन संस्था की ओर से बाढ-पीडितों के लिए निःशुल्क चिकित्सकीय जांच की गई ।
कश्मीर में कश्मीरी हिन्दुओं का सम्मान के साथ पुनर्वास हो तथा रोहिंग्या मुसलमानों को तत्काल देश से बाहर निकाला जाए आदि मांगों को लेकर सनातन संस्था की ओर से यहां के जिलाधिकारी को ज्ञापन प्रस्तुत किया गया ।
११ अगस्त को हातकणंगले तहसील के चावरे गांव में सनातन संस्था की आधुनिक वैद्या (श्रीमती) शरदिनी कोरे एवं आधुनिक वैद्या (श्रीमती) शिल्पा कोठावळे ने अन्नदान की सेवा की ।
उचित कर्म कर प्रारब्ध पर मात करने की एवं अपने साथ ही संपूर्ण सृष्टि को सुखी करने की क्षमता ईश्वर ने केवल मनुष्य को दी है । ऐसा होते हुए भी इस क्षमता का उपयोग अपना स्वार्थ साधने, निष्पाप जीवों पर अन्याय करने, अन्यों पर अधिकार जमाने इत्यादि अधर्माचरण करने से समाज का प्रारब्ध दूषित होता है ।