सनातन संस्था के आश्रम में भगवद्गीता का वास्तविक रूप से आचरण किया जाता है ! – जगद्गुरु योगऋषी डॉ. स्वामी सत्य प्रकाश

वैनकुवर (कॅनाडा) में स्थित जगद्गुरु योगऋषी डॉ. स्वामी सत्य प्रकाशजी का सनातन आश्रम में १६ अगस्त को आगमन हुआ ।

सनातन संस्था की ओर से बाढ-पीडितों के लिए निःशुल्क चिकित्सकीय जांच

बेलगांव (कर्नाटक) के पुराने पी.बी. मार्गपर स्थित श्री रेणुका मंदिर में सनातन संस्था की ओर से बाढ-पीडितों के लिए निःशुल्क चिकित्सकीय जांच की गई ।

सनातन संस्था का अयोध्या में जिलाधिकारी को ज्ञापन

कश्मीर में कश्मीरी हिन्दुओं का सम्मान के साथ पुनर्वास हो तथा रोहिंग्या मुसलमानों को तत्काल देश से बाहर निकाला जाए आदि मांगों को लेकर सनातन संस्था की ओर से यहां के जिलाधिकारी को ज्ञापन प्रस्तुत किया गया ।

महाराष्ट्र एवं कर्नाटक राज्यों में सनातन संस्था और हिन्दू जनजागृति समिति द्वारा की गई बाढपीडितों की सहायता

११ अगस्त को हातकणंगले तहसील के चावरे गांव में सनातन संस्था की आधुनिक वैद्या (श्रीमती) शरदिनी कोरे एवं आधुनिक वैद्या (श्रीमती) शिल्पा कोठावळे ने अन्नदान की सेवा की ।

पाप एवं समष्टि पाप

उचित कर्म कर प्रारब्ध पर मात करने की एवं अपने साथ ही संपूर्ण सृष्टि को सुखी करने की क्षमता ईश्‍वर ने केवल मनुष्य को दी है । ऐसा होते हुए भी इस क्षमता का उपयोग अपना स्वार्थ साधने, निष्पाप जीवों पर अन्याय करने, अन्यों पर अधिकार जमाने इत्यादि अधर्माचरण करने से समाज का प्रारब्ध दूषित होता है ।

कुछ अटल चूकें और उनके लिए विविध प्रायश्‍चित

अधिकांशत: सदैव होनेवाली भूल के लिए प्रायश्‍चित कर्म है नित्यनैमित्तिक कर्म अर्थात दैनिक पूजा-अर्चना, स्नान-संध्या, व्रत इत्यादि । (इन कर्मों के सन्दर्भ में विस्तृत विवरण सनातन के ग्रंथ कर्म का महत्त्व, विशेषताएं व प्रकार में दिया है ।

पाप-पुण्य लगने के नियम

कौनसा कर्म पाप अथवा पुण्य निर्माण करता है, यह बताने का अधिकार मात्र धर्मशास्त्र का है; क्योंकि कौनसा कर्म अच्छा है अथवा बुरा, यह निर्धारित करने के लिए अपनी बुद्धि अल्प सिद्ध होती है ।

रक्तदान शिविर में सनातन संस्था की ओर से नागरिकों को रोगप्रतिबंधक औषधियों का वितरण

बेळगांव (कर्नाटक) में सनातन संस्था की ओर से डेंग्यु, चिकुनगुनिया और मलेरिया इन रोगोंपर प्रतिबंधक होमियोपैथिक औषधियों का वितरण किया गया ।

सनातन संस्था की ओर से महाराष्ट्र एवं कर्नाटक के बाढपीडितों की सहायता; छात्रों में विद्यालयीन सामग्री का वितरण !

सनातन संस्था, हिन्दू जनजागृति समिति के कार्यकर्ताओं द्वारा बाढपीडितों को जीवनोपयोगी वस्तुओं के साथ ही नामजप और साधना का महत्त्व भी बताया जा रहा है ।

युगों के अनुसार साधना न करनेवाले, युद्ध, त्रिगुण एवं प्राकृतिक आपदाओं की मात्रा !

युगों के अनुसार व्यष्टि एवं समष्टि स्तरों के त्रिगुणों की मात्रा में परिवर्तन होता गया । इनमें प्रदत्त व्यष्टि एवं समष्टि, इन दोनों स्तरों का परिणाम मनुष्य पर होकर उसके विचार एवं कृत्य में परिवर्तन हुआ ।