कुछ अटल चूकें और उनके लिए विविध प्रायश्‍चित

अधिकांशत: सदैव होनेवाली भूल के लिए प्रायश्‍चित कर्म है नित्यनैमित्तिक कर्म अर्थात दैनिक पूजा-अर्चना, स्नान-संध्या, व्रत इत्यादि । (इन कर्मों के सन्दर्भ में विस्तृत विवरण सनातन के ग्रंथ कर्म का महत्त्व, विशेषताएं व प्रकार में दिया है ।

पाप-पुण्य लगने के नियम

कौनसा कर्म पाप अथवा पुण्य निर्माण करता है, यह बताने का अधिकार मात्र धर्मशास्त्र का है; क्योंकि कौनसा कर्म अच्छा है अथवा बुरा, यह निर्धारित करने के लिए अपनी बुद्धि अल्प सिद्ध होती है ।

रक्तदान शिविर में सनातन संस्था की ओर से नागरिकों को रोगप्रतिबंधक औषधियों का वितरण

बेळगांव (कर्नाटक) में सनातन संस्था की ओर से डेंग्यु, चिकुनगुनिया और मलेरिया इन रोगोंपर प्रतिबंधक होमियोपैथिक औषधियों का वितरण किया गया ।

सनातन संस्था की ओर से महाराष्ट्र एवं कर्नाटक के बाढपीडितों की सहायता; छात्रों में विद्यालयीन सामग्री का वितरण !

सनातन संस्था, हिन्दू जनजागृति समिति के कार्यकर्ताओं द्वारा बाढपीडितों को जीवनोपयोगी वस्तुओं के साथ ही नामजप और साधना का महत्त्व भी बताया जा रहा है ।

युगों के अनुसार साधना न करनेवाले, युद्ध, त्रिगुण एवं प्राकृतिक आपदाओं की मात्रा !

युगों के अनुसार व्यष्टि एवं समष्टि स्तरों के त्रिगुणों की मात्रा में परिवर्तन होता गया । इनमें प्रदत्त व्यष्टि एवं समष्टि, इन दोनों स्तरों का परिणाम मनुष्य पर होकर उसके विचार एवं कृत्य में परिवर्तन हुआ ।

अपने क्षेत्र की बाढस्थिति नियंत्रण में आने के उपरांत घर जाने से पूर्व तथा जाने के पश्‍चात यह सावधानी बरतें !

कुछ जिलों में अतिवृष्टि के कारण बाढस्थिति निर्माण हुई थी । जिससे सहस्रों नागरिकों के घर जलमय होकर जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया । इसलिए वहां के नागरिकों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया ।

पंचांग एवं ज्योतिषशास्त्र के पूर्वकल्पना दिए अनुसार बाढ आना, यह बुद्धिवादियों को करारा तमाचा !

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में आज इतना विकास हुआ है कि आज हम भारतीय अंतरिक्ष में चंद्रयान भी भेज सकें । ऐसा होते हुए भी कौन से क्षेत्र में अतिवृष्टि होगी, यह विज्ञान अथवा प्रौद्योगिकी निश्चितरूप से बता नहीं सके । मौसम विभाग के अनुमान तो इतने चूक जाते हैं कि सार्वजनिक रूप से मौसम विभाग का उपहास किया जाता है ।

सनातन संस्था की ओर से कोल्हापुर एवं सांगली जनपदों के बाढपीडितों के लिए भोजन एवं चिकित्सीय सहायता !

पलूस तहसील के बुरुंगवाडी में धनगांव से आए बाढपीडित, निमणी में मालवाडी के आए बाढपीडित, बुरली गांव और चौगुले बस्ती के ७०० से भी अधिक बाढपीडितों की सहायता की गई ।

धर्मप्रसार की व्यापक सेवा हेतु स्मार्टफोन्स और फीचर फोन्स की आवश्यकता !

सनातन संस्था के पूर्णकालीन धर्मप्रसारकों को उनकी धर्मप्रसार की सेवा हेतु भ्रमणभाष संचों की (स्मार्टफोन्स और फीचर फोन्स) की आवश्यकता है ।

सनातन संस्था की ओर से कोल्हापुर, सांगली (महाराष्ट्र) सहित कर्नाटक के बेळगांव एवं दक्षिण कन्नड जनपदों के बाढपीडितों को सहायता !

सनातन संस्था की ओर से नई इंगळी नामक बस्ती में ८० बाढपीडितों की सहायता की गई । इन बाढपीडितों के घर-घर जाकर भोजन के पैकटों का वितरण किया गया । इन बाढपीडितों को नामजप एवं साधना का महत्त्व भी विशद किया गया ।