Rest in peace (RIP) का वास्तविक अर्थ जान लें !

 

१. जन्म से ही अंग्रेजों के गुलाम बने भारतीय !

‘आजकल किसी की भी मृत्य होनेपर हमारे यहां ‘RIP’ लिखकर उसे श्रद्धांजली देने की प्रथा आरंभ हुई है । विद्वान-विदुषी भी इस फैशन की बलि चढ रहे हैं । ‘हम कितना विभिषिक लिख रहे हैं, कितना विनाशकारी लिख रहे हैं और कितना विनाशकारी बोल रहे हैं’, इसका किसी को भान नहीं है । जन्म से ही अंग्रेजों के गुलाम बने लोगों, क्या अब आपकी मृत्यु भी अंग्रेजों का गुलाम बन गई है ? आपको दफना जाता है या जलाया जाता है ?

 

२. प्रत्येक व्यक्ति को उसके धर्म-पंथ के अनुसार श्रद्धांजली दें !

कृपया हिन्दू मनुष्य की मृत्यु के पश्‍चात ‘RIP’ लिखकर उसे श्रद्धांजली न दें ! जिन्हें मृत्यु के पश्‍चात दफनाया जाता है, उन मुसलमान और ईसाईयों के पंथ में RIP लिखने की प्रथा है । RIP का अर्थ है ‘Rest In Peace’ ! कृपया हिन्दू व्यक्ति के जाने के पश्‍चात ऐसा न लिखें !

‘संसार का कोई भी व्यक्ति हो, उसकी मृत्यु होनेपर उसके धर्म के अनुसार उसके लिए अंतिम कर्म करना, यह उस जानेवाले का अधिकार है ! यह किसके उद्गार हैं, यह आपको ज्ञात है ? छत्रपति शिवाजी महाराज ने जब अफजलखान की आंतडियां बाहर निकालीं, तब उनके सैनिक मरे हुए अफजलखान के शरीर को जलाने हेतु ले चले । तब शिवाजी महाराज ने उसका विरोध किया । तब महाराज ने सभी से यह कहा, ‘‘जब अफजलखान मर गया, उसी क्षण उसके साथ हमारी शत्रुता भी समाप्त हुई । उसके मृत शरीर को जलाकर उसका अनादर न करो ।’’ मुसलमान धर्मशास्त्र के अनुसार शिवाजी महाराज ने अफजलखान को भूमि में दफनाकर मुसलमान परंपरा के अनुसार उसकी कब्र बनाई । छत्रपति महाराज कहते थे, ‘‘प्रत्येक मृत शरीर को उसके धर्म के अनुसार विदाई देनी चाहिए और यह प्रत्येक मृतक का अधिकार है ।’’; परंतु हम ये क्या कर रहे हैं ?

 

३. REST IN PEACE का अर्थ !

REST IN PEACE का अर्थ ‘शांति से लेटिए !’ ‘हे मृतात्मा, हमने तुम्हारे शरीर को भूमि में दफनाया है । अब कयामत के दिन उपरवाला तुम्हारे साथ न्याय करेगा; इसलिए अब तुम इस भूमि में शांति से लेटकर कयामत के दिन की प्रतिक्षा करो !’’ ये लोग ऐसा क्यों बोलते हैं ?; क्योंकि दफनानेवाले और जिसे दफनाया गया है, वह अपने जीवन में भी पुनर्जन्म नहीं मानते । उनका धर्म यह कहता है कि कयामत के दिनतक दफनाए जानेवाले की इस भूमि से मुक्ति नहीं है !’

 

४. हिन्दू धर्म और अन्य पंथों में निहित भेद !

इस भेद को ठीक से समझ लें ! हिन्दू धर्म में मृत व्यक्ति को दफनाते नहीं, अपितु उसका दहन करते हैं । इस जन्म से जलाकर आत्मा को पुनर्जन्म के लिए मुक्त कर देते हैं ! तो हिन्दू उसे RIP कैसे कह सकते हैं ? क्योंकि हमारे धर्म में ‘आत्मा सद्गति को प्राप्त हुई !’, ऐसा कहते हैं । आत्मा मुक्त हुई । तो उसके अगले जन्म की यात्रा अच्छी हो’, ऐसा कहना चाहिए । हिन्दू आत्मा को बंद कर, बांध कर और दफनाकर नहीं रखते, अपितु उसे मुक्त करते हैं, मृतक व्यक्ति अगला जन्म लें इसलिए; परंतु अन्य धर्मी जो दफनाते हैं, वह ‘तुम भूमि में शांति से लेटे रहो’ और ‘कयामततक तुम्हें मुक्ति नहीं है ‘ ऐसा बताकर !

हिन्दुओं को इसके लिए गरुड पुराण पढना चाहिए । वह मृत्यु के संदर्भ में है । आप उसे पढेंगे, तो कोई भी हिन्दू RIP बोलने का साहस नहीं दिखाएगा !

 

५. हिन्दुओं ‘मृतात्मा को सद्गति मिले’, यह प्रार्थना करें !

हिन्दुओं को ‘भावपूर्ण श्रद्धांजली’ बोलना चाहिए । ‘ईश्‍वर मृतात्मा को सद्गति प्रदान करें’, ऐसा बोलना चाहिए । इसका अर्थ जो व्यक्ति मृत हुई है, उसे पुण्यगति प्राप्त हो और उसका अगला जन्म लेने की यात्रा निर्विघ्नरूप से संपन्न हो ! केवल इतना ही क्यों ? जब कोई सज्जन और पुण्यवान हिन्दू मरता है, तब ‘ईश्‍वर उसे जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त करें’, यह भी प्रार्थना की जा सकती है ।

 

६. किसी की मृत्यु के पश्‍चात RIP लिखकर उसका धर्मांतरण न करें !

RIP लिखना अपने स्वधर्मी मृतक का अनादर है, इसे ध्यान में लें ! सतर्क रहें और दूसरों को सतर्क करें ! हिन्दू मनुष्य के मरने के पश्‍चात RIP लिखने का विरोध करें ! कृपया हिन्दू मनुष्य की मृत्यु के पश्‍चात RIP लिखकर उसका धर्मांतरण न करें, यह हाथ जोडकर आपसे विनम्र अनुरोध है !

संदर्भ : जालस्थल