हिन्दू राष्ट्र में अपराधी नहीं होंगे

‘हिन्दू राष्ट्र में (ईश्‍वरीय राज्य में) समाचार पत्रिकाएं, दूरचित्रवाहिनियां, संकेतस्थल इत्यादि का उपयोग केवल धर्मशिक्षा और साधना हेतु किया जाएगा । इस कारण अपराधी नहीं होंगे और सभी ईश्वर के अनुसंधान में रहने के कारण आनंदी होंगे ।’ -(परात्पर गुरु) डॉ. जयंत आठवले

खरी शांति का अनुभव कब होता है ?

‘निर्गुण ईश्‍वरीय तत्त्व से एकरूप होने पर ही खरी शांति का अनुभव होता है । तब भी शासनकर्ता जनता को साधना न सिखाकर ऊपरी मानसिक स्तर के उपाय करते हैं, उदा. जनता की अडचनें दूर करने के लिए ऊपरी प्रयत्न करना, मानसिक चिकित्सालय स्थापित करना इत्यादि ।’ -(परात्पर गुरु) डॉ. जयंत आठवले

अज्ञानी

‘जो हिन्दू धर्म की आलोचना करते हैं, इस संसार में उनके समान अज्ञानी कोई नहीं है !’ -(परात्पर गुरु) डॉ. जयंत आठवले

हिन्दुओं को केवल धर्म ही एकत्र ला सकता है ।

‘भारत के हिन्दुओं में हिन्दू धर्म के अतिरिक्त सभी बातें जैसे भाषा, त्यौहार, उत्सव, कपडे इत्यादि विविध राज्यों में अलग अलग हैं । इसलिए हिन्दुओं को केवल धर्म ही एकत्र ला सकता है । कम से कम अब तो हिन्दुओं को धर्म का महत्त्व समझकर, सभी को एकजुट करने का प्रयास करना अत्यावश्यक है ।’ … Read more

हिन्दू राष्ट्र में सब कानून…

हिन्दू राष्ट्र में सब कानून धर्म पर आधारित होंगे । अतः उनमें संशोधन की आवश्यकता नहीं होगी । इनके पालन से समाज अपराध-मुक्त होकर साधनारत होगा ! -(परात्पर गुरु) डॉ.आठवले

सनातन प्रभात और अन्य नियतकालिकों में भेद

अन्य नियतकालिकों में बच्चों के जन्मदिन के उपलक्ष्य में छायाचित्र छापने हेतु विज्ञापन के पैसे देते हैं, जबकि ‘सनातन प्रभात’ में गुणवान बच्चों के छायाचित्रों के साथ उनकी आध्यात्मिक गुणविशेषताएं भी छापते हैं ।’ – (परात्पर गुरु) डॉ. जयंत आठवले

प्रत्येक पीढी के कर्तव्य !

‘प्रत्येक पीढी अगली पीढ़ी को समाज, राष्ट्र और धर्म के संदर्भ में अपेक्षा से देखती है । इसके स्थान पर प्रत्येक पीढी को ‘हम क्या कर सकते हैं ?’, ऐसे विचार कर ऐसा कार्य करना चाहिए कि अगली पीढ़ी को उसके संदर्भ में कुछ भी करने की आवश्यकता ही न हो और इस कारण वे … Read more

हिन्दू संस्कृति और पश्चिमी संस्कृति में फर्क

‘पश्‍चिमी संस्‍कृति शरीर, मन व बुद्धि को सुख देने हेतु प्रयत्नशील रहती है; जबकि हिन्‍दू संस्‍कृति ईश्‍वरप्राप्‍ति का मार्ग दिखाती है ।’ – (परात्पर गुरु) डॉ. जयंत आठवले

ईश्वर सर्वत्र हैं

‘हिन्‍दू धर्म की सीख है कि ‘ईश्‍वर सर्वत्र हैं, सभी में हैैं’ । इसीलिए हिन्‍दुओं को अन्‍य पंथियों का द्वेष करना नहीं सिखाया जाता ।’ – (परात्पर गुरु) डॉ. जयंत आठवले

दशहरे के निमित्त संदेश

विजयादशमी से हिन्‍दू समाज और देशहित की रक्षा के लिए सीमोल्लंघन करें ! ‘वर्ष २०२१ ते २०२३ का काल जागतिक विश्‍वयुद्ध का होगा । इस काल में भारतीय सेना को भी सीमोल्लंघन करना पडेगा । भारतीय सीमा पर युद्ध प्रारंभ होने के पश्‍चात शत्रु राष्‍ट्रों के समर्थक बने देशांतर्गत शत्रु अराजकता उत्‍पन्‍न करने के लिए … Read more