देवदर्शन एवं देवस्मरण में भेद !

देवदर्शन को स्थूल के बंधन हैं ; परंतु देवस्मरण को उसका बंधन नहीं । हम जहां हैं, वहां उसे अनुभव कर सकते हैं । उसके लिए हमारी उतनी श्रद्धा एवं लगन की आवश्यकता है ।

– श्रीचित्‌शक्‍ति श्रीमती अंजली गाडगीळ

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