मतदाताओ, मत देते समय इस बात का विचार करो !
‘मतदाताओ, आपके द्वारा चुने गए उम्मीदवार द्वारा की गई चूकों (गलतियों) के लिए आप ही उत्तरदायी होंगे । इसलिए उन चूकों का पाप आपको लगेगा, यह ध्यान में रखकर मतदान करो !’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
‘मतदाताओ, आपके द्वारा चुने गए उम्मीदवार द्वारा की गई चूकों (गलतियों) के लिए आप ही उत्तरदायी होंगे । इसलिए उन चूकों का पाप आपको लगेगा, यह ध्यान में रखकर मतदान करो !’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
‘किसी भी क्षेत्र में किसी को केवल उसके शैक्षिक प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी न देते हुए उसके व्यक्तिगत गुण देखकर भी चुनाव करना आवश्यक है !’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
‘जिसमें ईश्वरप्राप्ति की उत्कंठा है, वही सच्चा ब्राह्मण है !’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
‘कहां पती के साथ थोडा विवाद होने पर विवाह विच्छेद करनेवाली वर्तमान पत्नियां, तो कहां पती के निधन के उपरांत उसके साथ एकरूप होने के कारण जोहार करनेवाली, अर्थात देह अग्नि में समर्पण करनेवाली पद्मावती रानी एवं उसके साथ की १६ सहस्र राजपूत स्त्रियां !’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
‘साधना करने पर कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है । अभी तक के युगों में लाखों साधकों ने यह अनुभव किया है; परंतु साधना पर विश्वास न रखनेवाले बुद्धिप्रमाणवादी साधना किए बिना ही कहते हैं, ‘कुंडलिनी दिखाओ, नहीं तो वह है ही नहीं !’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
‘शरीर पहला वास्तु है। पहले उसकी शुद्धि का विचार करें, तदुपरांत बनाए हुए वास्तु (घर) का !’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
‘किसी भी क्षेत्र में किसी को केवल उसके शैक्षिक प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी न देते हुए उसके व्यक्तिगत गुण देखकर भी चुनाव करना आवश्यक है !’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
‘स्थूल का, अर्थात देह तथा वस्तुओं द्वारा किए तात्कालिक प्रदूषण की तुलना में सूक्ष्म स्तर का, अर्थात मन एवं बुद्धि से किया प्रदूषण अनेक गुना लम्बे समय के लिए हानिकारक होता है, इस ओर ध्यान रखें !’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
‘मैं भी ४१ वर्ष की आयु तक ईश्वर को नहीं मानता था । आगे सम्मोहन उपचारशास्त्र की सीमा ज्ञात होने पर मैंने साधना आरंभ की । तब जिज्ञासावश संतों से सहस्रो प्रश्न पूछकर तथा साधना कर अध्यात्मशास्त्र समझ लिया । अन्यथा मैं भी एक बुद्धिहीन बुद्धिप्रमाणवादी बन जाता !’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
‘बुद्धिप्रमाणवादी हिन्दू धर्म के कर्मकांड को ‘कर्मकांड’ कहकर नीचा दिखाते हैं; परंतु कर्मकांड का अध्ययन करें, तो यह समझ में आता है कि उसमें प्रत्येक बात का कितना गहन अध्ययन किया गया है !’ – सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले