अध्यात्म में कृति का महत्त्व
सनातन संस्था में सप्ताह, पारायण नहीं होता, अपितु साधना में कृति कर आगे जाने के लिए स्वभावदोष-निर्मूलन एवं अहं-निर्मूलन सत्संग एवं साधना का ब्योरा लेना, यह नियमित होता है । पारायण से केवल तात्त्विक जानकारी मिलती है; परंतु स्वभावदोष एवं अहं निर्मूलन प्रक्रिया से अहं शीघ्र अल्प होने से ईश्वरविषयी अनुभूति शीघ्र होती है । केवल पारायण न करते हुए साधना की प्रत्यक्ष कृति करने पर ईश्वर के विषय में जानकारी शीघ्र मिलने से मनुष्य अध्यात्म की आनंदावस्था शीघ्र प्राप्त करता है !
– श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ
भावजागृति के प्रयत्न करना, यह अपनी भावनाओं का समाप्त करने का उत्तम साधन !
ज्ञानप्राप्ति के संदर्भ में भक्तिमार्ग का महत्त्व
सत्सेवा का महत्त्व