‘गुरु तत्त्वस्वरूप होते हैं । वे काल के परे चले जाने से उनके लिए जीवन और मृत्यु समान ही होते हैं । जीवन अर्थात प्रसंगों की उत्पत्ति और मृत्यु अर्थात प्रसंगों का लय । सुख की उत्पत्ति और दुःख का लय, इसे साधनेवाला स्थितिवाचक आनंद देनेवाले अर्थात गुरु !’
– श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली गाडगीळ
भावजागृति के प्रयत्न करना, यह अपनी भावनाओं का समाप्त करने का उत्तम साधन !
ज्ञानप्राप्ति के संदर्भ में भक्तिमार्ग का महत्त्व
सत्सेवा का महत्त्व