मंत्रोपचार के कारण मूर्ति में शीघ्र सजीवता आती है, अर्थात वह जागृत होती है । एकदम इसी पद्धति से यदि हम भी भगवान का नामजप सतत करेंगे तो हमारी देह का भी देवत्व शीघ्र जागृत होता है, अर्थात हमारी अध्यात्म में शीघ्र उन्नति होती है !
– श्रीचित्शक्ति सौ. अंजली गाडगीळ
भावजागृति के प्रयत्न करना, यह अपनी भावनाओं का समाप्त करने का उत्तम साधन !
ज्ञानप्राप्ति के संदर्भ में भक्तिमार्ग का महत्त्व
सत्सेवा का महत्त्व