अत्यंत उच्च तापमानवाले यज्ञकुंड में समर्पित होकर स्वयं के शरीर के तापमान को सर्वसामान्य रखनेवाले तंजावूर (तमिलनाडू) के महान योगी प.पू. रामभाऊस्वामीजी !

परीक्षण के समय यज्ञकुंड का तापमान १४६.५ अंश सेल्सियस था । उस समय यज्ञकुंड में समर्पित प.पू. रामभाऊस्वामीजी के शरीरपर ओढी हुई शॉल का तापमान ३९.५ अंश सेल्यियस था |

यूनिवर्सल ऑरा स्कॅनर (UAS)

यू.टी.एस उपकरण का परिचय :इस उपकरण को ऑरा स्कैनर भी कहते हैं । इससे घटकों (वस्तु,भवन,प्राणी और मनुष्य)की ऊर्जा और उनका प्रभामंडल मापा जा सकता है ।

शिष्यभाव का महत्त्व

साधना में साधक के लिए शिष्यभाव में रहना बहुत महत्त्वपूर्ण होता है । वह जब शिष्य बनता है, तब उसकी आगे की प्रगति गुरुकृपा से ही होती है । शिष्य बनने पर ही, गुरु साधक का पूरा दायित्व लेते हैं ।

स्वभावदोष-निर्मूलन प्रक्रिया करने से साधकों पर हुए परिणामों का वैज्ञानिक परीक्षण

सामान्य व्यक्ति अथवा वस्तु का प्रभामण्डल लगभग १ मीटर होता है । प्रक्रिया आरम्भ करने से पहले साधक और साधिका का प्रभामण्डल क्रमशः १.५२ मीटर एवं १.५० मीटर था । प्रक्रिया १ मास करने पर उनका प्रभामण्डल क्रमशः १.७४ मीटर तथा १.६० मीटर हो गया, अर्थात दोनों का प्रभामण्डल क्रमशः २२ सें.मी. एवं १० सें.मी. बढ गया ।

साधकों को प्रत्यक्ष कृति से सिखानेवाले परात्पर गुरु डॉ जयंत आठवलेजी !

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी की जीवन यात्रा देखें तो उनकी प्रत्येक कृति आदर्श है, यह पग-पग पर दिखाई देता है । साधक भी वैसे ही तैयार होें, वह सेवा की बारीकियों का अध्ययन कर प्रत्येक कृति ईश्‍वर को अपेक्षित ऐसी परिपूर्ण करें, ऐसी उनकी लगन है ।

परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के कक्ष और परिसर में हुए बुद्धिअगम्य परिवर्तन

जीव की साधना जैसे-जैसे वृद्धिंगत होती है, वैसे-वैसे उससे अधिकाधिक सात्त्विकता प्रक्षेपित होकर उसके संपर्क में आनेवाली वस्तु, वास्तु और आसपास का वातावरण चैतन्यमय बनने लगता है । परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के समष्टि गुरु और जगद्गुरु होने से उनका अवतारी कार्य संपूर्ण ब्रह्मांड में आरंभ रहता है ।

परात्पर गुरु डॉक्टरजी का जन्मदिन साधकों द्वारा सृष्टि के अंत तक मनाया जाता रहेगा !

सामान्य मनुष्य का जीवन कुछ काल तक होने से उसका जन्मदिन उसकी मृत्यु तक ही मनाया जाता है । ईश्‍वर के अनादि और अनंत होने से उनके अवतारों का जन्मदिन (उदा. रामनवमी, जन्माष्टमी) भक्तगणों द्वारा सृष्टि के अंत तक मनाया जाएगा ।

प.पू. डॉक्टरजी द्वारा निर्मित रामनाथी आश्रम का महर्षि द्वारा विविध उपमा देकर किया गया वर्णन

रामनाथी आश्रम साक्षात श्रीमत् नारायण का वैकुंठ लोक है; क्योंकि अवतार लीला करनेवाले भगवान श्रीकृष्ण यहां प्रत्यक्ष विराजमान हैं । 

वाहिनी पर प्रदर्शित होनेवाली धार्मिक मालिकाओं के संगीत में सात्त्विकता तथा पंडित जसराज द्वारा गाए आलापों के संदर्भ में साधक को प्राप्त ज्ञान !

लगभग ४-५ वर्ष पूर्व मैंने ‘देवों के देव महादेव’ नामक धारावाहिक की कुछ कडियां देखी थीं । उसमें बीच-बीच में पंडित जसराज के विशेषता से परिपूर्ण आलाप सुने । तत्पश्चात् मुझे उसका विस्मरण हुआ था;किंतु ४ माह पूर्व मुझे नींद में पंडित जसराज के आलाप लगातार सुनाई देने लगे ।

सनातन आश्रम में दत्तमाला के मंत्र जपते समय आश्रम परिसर में हुआ वैशिष्ट्यपूर्ण प्राकृतिक परिवर्तन

दत्तमाला मंत्र’ का पाठ प्रारंभ करने पर सनातन आश्रम के परिसर में गूलर के ५८ पौधे उगना और ये पौधे अर्थात प.पू. डॉक्टरजी के आसपास सुरक्षा-कवच निर्माण होने का द्योतक है, ऐसा योगतज्ञ दादाजी वैशंपायनजी ने बताया