परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी द्वारा स्नान के लिए उपयोग में लाए ‘मग’में काफी मात्रा में चैतन्य निर्माण होना
उच्च कोटि के संतों द्वारा दैनंदिन उपयोग में लाई निर्जीव वस्तुएं भी उन संतों में विद्यमान सत्त्वगुण से प्रभारित होकर पावन हो जाती हैं । संतों द्वारा उपयोग में लाई वस्तुओं का अध्ययन करने पर अध्यात्म की अनेक नई बातें सामने आईं हैं और प्राप्त हुए इस ज्ञान का, मानव के कल्याण के लिए उपयोग होगा ।
