सनातन संस्था के ध्वनीचित्रीकरण विभाग का विस्तारित स्वरूप और उसके अंतर्गत होनेवाले विविध विषय

दृश्य-श्रव्यचक्रिकाओं के माध्यम से घर-घर धर्मज्ञान का दीप जलाने का समष्टि ध्येय के साथ-साथ अंतःकरण भक्तिभाव से प्रकाशमय करना, यह ध्वनिचित्रीकरण सेवा के साधकों का व्यष्टि ध्येय है !

सनातन के सभी आश्रमों एवं प्रसारसेवा में सक्रिय साधकों को भावविश्‍व में ले जानेवाले रामनाथी, गोवा के सनातन आश्रम में होनेवाले भावसत्संग !

भाव उत्पन्न करने के लिए किए जानेवाले ऐसे प्रयोगों से साधक अंतर्मुख बनता है । साथ ही, थोडे समय के लिए ही क्यों न हो; वह भावस्थिति का अनुभव करता है । साधक के अंतर्मन में उभरनेवाली प्रतिक्रियाएं, स्वभावदोष एवं अहं के विचार, बाहर आने लगते हैं और उसका मन निर्मल होने लगता है ।

नासिक की ज्योतिष एवं वास्तु तज्ञ श्रीमती शुभांगिनी पांगारकर, श्रीमती वसुंधरा संतान एवं श्रीमती स्मिता मुले द्वारा रामनाथी के सनातन आश्रम का अवलोकन।

नासिक की ‘आयादी ज्योतिष वास्तु’ संस्था की निदेशक श्रीमती शुभांगिनी पांगारकर, ‘समर्थ ज्योतिष वास्तु’ संस्था की निदेशक श्रीमती वसुंधरा संतान एवं ‘स्वस्तिक ज्योतिष वास्तु’ संस्था की निदेशक श्रीमती स्मिता मुले ने ७ फरवरी को सनातन आश्रम का अवलोकन किया ।

आश्रम की बढती सात्त्विकता की प्रतीति देनेवाले दैवी परिवर्तन !

सनातन आश्रम की सात्त्विकता की प्रतीति देनेवाले दैवी परिवर्तनों के आगे दिए कुछ उदाहरण देखें, तो यही अनुभव होता है कि ईश्‍वर सनातन पर कितनी कृपा बरसा रहे हैं ।

हिन्दू-संगठन एवं हिन्दू राष्ट्र की स्थापना का दिशादर्शक केंद्र !

केवल हिन्दुआेंको एकजुट करनेवाली विचारधारा ही दशे – धर्म की रक्षा तथा हिन्दू राष्ट्र की स्थापना कर सकती है, यह ध्यान में रख विविध हिन्दू संगठन, संप्रदाय, अधिवक्ता (वकील), विचारक आदि का दिशादशर्न करने हेतु आश्रम में कार्यशाला, अधिवेशन आदि का आयोजन किया जाता है ।

बुद्धिअगम्य जगत का अभूतपूर्व आध्यात्मिक शोधकार्य !

हिन्दू आहार, वेशभूषा, धार्मिक कृत्य, जप, मुद्रा व न्यास इ. के व्यक्ति व वातावरण पर हाेनेवाले अच्छे प्रभावों संबंधी १,००० से अधिक विषयों पर यूनिवर्सल थर्मो स्कैनिंग , पॉलीकाॅण्ट्रास्ट इटंरफेरन्स फोटोग्राफी इ. द्वारा वैज्ञानिक पद्धति से शाेध किया है ।

साधकों में सद्गुणों का संवर्धन करनेवाला आश्रमजीवन !

साधकों को पूरा समय साधना के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध हो, इसके लिए परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी ने रामनाथी, गोवा में सनातन आश्रम की निर्मिति की है । यहां लगभग ६०० साधक आनंदमय आश्रमजीवन का लाभ ले रहे हैं । 

सामाजिक एकता का प्रतीक एवं राष्ट्ररक्षा, धर्मजागृति के कार्य का ऊर्जास्रोत हैं सनातन आश्रम !

ईश्‍वरप्राप्ति का सर्वोच्च ध्येय पाने के लिए अहं मिटाने हेतु प्रत्येक साधक प्रयत्नरत रहता है । किसी के मन में जाति-पाति, ऊंच-नीच आदि का विचार भी नहीं आता ।

आध्यात्मिक प्रगति हेतु पोषक वातावरण !

उत्तरोत्तर आध्यात्मिक प्रगति हेतु साधना को जीवन में उतारना आवश्यक होता है । आश्रम में होनेवाले स्वभावदोष एवं अहं निर्मूलन सत्संग, भाववृद्धि सत्संग, व्यष्टि साधना का ब्यौरा आदि द्वारा साधकों को साधना के विषय में क्रियात्मक स्तर का मार्गदर्शन मिलने से उनकी साधना में उत्तरोत्तर प्रगति होती है ।

जीवन की प्रत्येक कृति का एकमात्र उद्देश्य – साधना

पूजा के लिए डलिया में रखे फूलों की रचना सात्त्विक पद्धति से करने पर उससे भक्तिभाव के स्पंदन निर्मित होते हैं और पूजा भावपूर्ण होती है । माथे पर तिलक लगाने से आचारधर्म का पालन होता है ।