योगतज्ञ दादाजी वैशंपायनजी द्वारा स्थापित शेवगाव का जागृत दत्त मंदिर !

योगतज्ञ दादाजी ने स्वयं जयपुर से गर्भगृह की प्रसन्न, सजीव, मासूम, वात्सल्यमयी एवं तेजस्वी दत्त मूर्ति बनवाकर लाई है । दादाजी ने स्वयं दत्तमूर्ति में प्राण प्रोक्षण किए हैं, इस कारण मूर्ति प्रत्यक्ष हमसे बात कर रही है, ऐसा प्रतीत होता है ।

भगवान श्रीकृष्ण के अस्तित्व का अनुभव किए हुए कुछ स्थानों का छायाचित्रात्मक दिव्यदर्शन !

श्रीकृष्ण के प्रति उत्कट भाव बढाने के लिए उनके दिव्य जीवन से संबंधित गोकुल, वृंदावन एवं द्वारका, इन दैवी क्षेत्रों के छायाचित्र यहां दिए हैं । इन छायाचित्रात्मक कृतज्ञता के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के अस्तित्व का अनुभव करने का प्रयत्न करते हैं !

जन्मकुंडली, हस्तसामुद्रिक और पादसामुद्रिक में भेद

हाथ और पैर की रेखाओं का संबंध पूर्वजन्म के कर्मों से होता है; इसलिए उन्हें ‘कर्मरेखा’ कहा गया है । कर्म करने से इन रेखाओं में सूक्ष्म परिवर्तन होते हैं । पश्चात, ये परिवर्तन स्थूलरूप में दिखाई देते हैं ।

हिन्दू किसे कहना चाहिए ?

जो व्यक्ति (उत्तर-पश्चिम में) सिन्धु महानदी से (दक्षिण में) सिन्धु (हिन्द) महासागर तक फैले विशाल भूभाग को अपनी पितृभूमि (पूर्वजों की भूमि) और पुण्यभूमि मानता है, वह हिन्दू है ।

गुरुकुल शिक्षापद्धति

आजतक आपने अनेक बार भारत की प्राचीन गुरुकुल शिक्षापद्धति के विषय में सुना होगा । इस पद्धति की शिक्षा के विषय में हमें इतना ही पता होता है कि इसमें गुरु के घर जाकर अध्ययन करना पडता है ।

गोपीभाव एवं कृष्णभाव

गोपीभाव का अर्थ है श्रीकृष्णमिलन की तडप अथवा श्रीकृष्णमिलन की आर्तता और कृष्णभाव का अर्थ है केवल शुद्ध आनंद । कलियुग में यह दोनों बातें अत्यंत ही दुर्लभ हो गई हैं ।

धर्म और नीति

नीति का मुख्य सिद्धांत है, एकता, मोक्ष अथवा समरसता का अनुभव करना । जिससे देवता के विषय में उचित ज्ञान बढाने में और उसके माध्यम से उनका दर्शन होने में सहायता हो, वह सब नीति है, अन्य सब अनीति है ।’

हिन्दुओ, हिन्दू धर्म की अद्वितीय विशेषताएं समझ लें !

प्राणिमात्र में ही नहीं, अपितु निर्जीव बातों में भी परमेश्वर का अस्तित्व होने के कारण हिन्दू धर्म में देवी-देवताओं की संख्या ३३ करोड है ।

हिंदूओं के देवता और उनकी कुल संख्या

सदैव कहा जाता है कि तैंतीस कोटि (करोड) देवता होते हैं । इसका अर्थ यह हुआ कि प्रमुख देवता तैंतीस हैं और प्रत्येक देवता के एक कोट गण, दूत आदि हैं ।