हिन्दुओ, हिन्दू धर्म की अद्वितीय विशेषताएं समझ लें !
प्राणिमात्र में ही नहीं, अपितु निर्जीव बातों में भी परमेश्वर का अस्तित्व होने के कारण हिन्दू धर्म में देवी-देवताओं की संख्या ३३ करोड है ।
प्राणिमात्र में ही नहीं, अपितु निर्जीव बातों में भी परमेश्वर का अस्तित्व होने के कारण हिन्दू धर्म में देवी-देवताओं की संख्या ३३ करोड है ।
सदैव कहा जाता है कि तैंतीस कोटि (करोड) देवता होते हैं । इसका अर्थ यह हुआ कि प्रमुख देवता तैंतीस हैं और प्रत्येक देवता के एक कोट गण, दूत आदि हैं ।
संस्कृत भाषा देवनागरी लिपि में लिखी जाती है । यह विश्व की सर्वाधिक वैज्ञानिक और पूर्ण लिपि है । यह लिपि लिखने और बोलने में किसी भी प्रकार की अडचन नहीं है ।
भाव उत्पन्न करने के लिए किए जानेवाले ऐसे प्रयोगों से साधक अंतर्मुख बनता है । साथ ही, थोडे समय के लिए ही क्यों न हो; वह भावस्थिति का अनुभव करता है । साधक के अंतर्मन में उभरनेवाली प्रतिक्रियाएं, स्वभावदोष एवं अहं के विचार, बाहर आने लगते हैं और उसका मन निर्मल होने लगता है ।
किसी प्रसंग में मन भावुक हो जाता है और रोना आता है । तब मन की बहुत ऊर्जा का अपव्यय होता है । इसका परिणाम सेवा पर भी होता है । सेवा की अवधि घट जाती है ।
वेदाध्ययन में चारों वर्णों के बालकों का अधिकार है, किंतु गुण-कर्म से हीन का नहीं । गुण और कर्म ही उच्च और कनिष्ठ वर्ण के कारण हैं ।
बीड जिले की गेवराई तालुका के राक्षसभुवन में श्री शनि मंदिर में पौष शुक्ल पक्ष अष्टमी को सायं शनिमहाराजजी का जन्मोत्सव मनाया जाता है । इसी निमित्त से प्रस्तुत है मंदिर की जानकारी !
महाबळेश्वर यहां श्री महाबळेश्वर, श्री पंचगंगा और श्री कृष्णादेवी के अति प्राचीन भव्य देवालय हैं । कुछ कामनिमित्त से महाबळेश्वर में जाने का योग आया था, तब श्री कृष्णामाई के दर्शन हेतु जानेपर ध्यान में आए सूत्र यहां प्रस्तुत कर रहा हूं ।
कोल्हापुर शहर में एकमुखी दत्त मंदिर की दत्त मूर्ति १८ वीं शताब्दी में बनी और नृसिंह सरस्वती महाराज, गाणगापुर; श्रीपाद वल्लभ महाराज और तदुपरांत स्वामी समर्थ ने इस मूर्ति की पूजा की है ।
पांडववाडा की वास्तु का क्षेत्रफल ४५१५.९ चौरस मीटर है । कुछ समय पूर्व ही पांडववाडा के प्रवेशद्वार के पत्थर पर प्राचीनकालीन नक्काशी उकेरी गई है ।इसमें कमलफूलों की नक्काशी स्पष्ट दिखाई देती है ।