बाबा बंदा बहादुरजी को सदैव अपनी स्मृतियों में रखे !

पश्चात, मुगलों ने बाबा बंदा बहादुरजी को अनेक प्रकार के प्रलोभन दिखाए, जिससे वे सिख धर्म छोडकर इस्लाम धर्म अपनाएं । परंतु, बाबा बंदा बहादुरजी अपना धर्म छोडने के लिए तैयार नहीं हुए ।

भौतिक शास्त्र के आधुनिक वैज्ञानिकों के लिए शिवजी के नृत्य का अर्थ है ‘सबएटॉमिक’ कणों का नृत्य !

मूर्तिपूजा के विषय पर हिन्दुओंका उपहास करनेवाले और हिन्दू धर्म को सडा-गला कहकर ताना मारनेवाले तथाकथित बुद्धिवादी, विज्ञानवादी और नास्तिकतावादियों के लिए यह लेख एक तमाचा ही हैं !

कंबोडिया में एक समय पर अस्तित्व में होनेवाली हिन्दुओं की वैभवशाली संस्कृति के पतन का कारण और वर्तमान स्थिति !

७ वीं शताब्दी से लेकर १५ वीं शताब्दी तक जिन्होंने कंबोडिया पर राज्य किया, उस साम्राज्य को खमेर साम्राज्य कहते हैं । इस खमेर साम्राज्य के राजा स्वयं को चक्रवर्ती अर्थात ‘पृथ्वी के राजा’ समझते थे ।

गोपियों के गुण

गोपियों को श्रीकृष्ण का वास्तविक रूप ज्ञात होते ही, वे उन्हें पूर्णत: समर्पित हुईं । अपना अहंकार त्यागकर, श्रीकृष्ण की शरण में गईं, यह बहुत महत्त्वपूर्ण बात है ।

लाखों वर्षों का इतिहास प्राप्त और भारत से श्रीलंका में तलैमन्नार के छोर तक फैला रामसेतु : श्रीराम से अनुसंधान साधने का भावबंध !

तलैमन्नार के अंतिम छोर से २ कि.मी. चलते हुए जाने पर रामसेतु के दर्शन होते हैं । रामसेतु से देखने पर १६ छोटे द्वीप एकत्र होने समान ((द्वीपसमूह समान) दिखाई देते हैं ।) दिखाई देते हैं ।

थायलैंड की राजधानी बँकॉक में राजमहल की विशेषताएं !

राजा राम १ के बैंकॉक शहर में राजमहल बनवाने के पश्चात इसकी दीवारों पर रामायण के विविध प्रसंगाेंं के सुंदर चित्र रंगवाए हैं । चित्रों में राम, लक्ष्मण इत्यादि व्यक्तिरेखाओं के मुख और सभी के वस्त्र थायलैंड की पद्धतिनुसार हैं ।

मंदिर के निकट श्रीविष्णु की विशाल मूर्ति का लुटेरों द्वारा तोडा गया सिर दैवी संचार होनेवाले व्यक्ति के बताने पर पूर्ववत बनानेवाली कंबोडिया सरकार !

‘अंकोर वाट’ मंदिर के पश्चिम द्वार के मुख्य प्रवेशद्वार के ३ गोपुरों में से दाईं ओर के गोपुर में आज भी श्रीविष्णु की विशाल अष्टभुजा मूर्ति है ।

महाप्रलय समान भीषण आपातकालीन परिस्थिति का सामना करने के लिए साधना कर आत्मबल बढाएं !

आंधी-तूफान, भूस्खलन, भूकंप, महाप्रलय, तीसरा महायुद्ध ऐसी आपातकालीन परिस्थिति किसी भी क्षण आ सकती है । ऐसी स्थिति में ‘योग्य कृति क्या करनी चाहिए ?’ इसका ज्ञान न होने से सर्वसामान्य व्यक्ति घबरा सकता है और उसका मनोबल भी कम हो जाता है ।

कांचीपुरम (तमिलनाडू) के श्री अत्तिवरद पेरुमल स्वामी !

सप्त मोक्षपुरियों में से एक मोक्षपुरी कांचीपुरम ! तमिलनाडू का कांचीपुर मंदिरों का मायका है; क्योंकि यहां शिवशक्ति और विष्णु सहित अन्य देवताओं के १००८ मंदिर हैं । शिवकांची और विष्णुकांची, ये जुडवां मोक्षपुरियां हैं ।

गुजरात का ‘द्वारकाधीश’ मंदिर और द्वारकापीठ

श्रीकृष्ण ने अवतार-समाप्ति के पहले द्वारका समुद्र में डुबो दी । दुर्वास ॠषि के शाप के कारण यदुकुल का नाश हुआ । समुद्र में विलीन द्वारका के समीप के भूभाग को तदनंतर द्वारका का स्थान प्राप्त हुआ ।