बाह्य आडंबर की अनदेखी कर साधकों के उद्धार हेतु प्रयासरत रहनेवाले परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी !
‘हर चमकती चीज सोना नहीं होती ।’ उज्जैन के सिंहस्थ पर्व में प्रसिद्ध साधु-संतों की ओर लोग आकर्षित हो रहे हैं ।
‘हर चमकती चीज सोना नहीं होती ।’ उज्जैन के सिंहस्थ पर्व में प्रसिद्ध साधु-संतों की ओर लोग आकर्षित हो रहे हैं ।
हिन्दुओं का वर्षारंभ वर्ष-प्रतिपदा को होता है । धर्मशास्त्र में वर्षारंभ के दिन सूर्योदय के तुरंत पश्चात ब्रह्मध्वज की पूजा करें । पाठकों के लिए शास्त्र के अनुसार किस प्रकार ब्रह्मध्वज की पूजा करनी चाहिए, इसकी यहां मंत्रसहित जानकारी दे रहे हैं जिस स्थान पर ब्रह्मध्वज खडा करना है, वहां ब्रह्मध्वज खडा कर उसकी पूजा करें ।
पश्चात, मुगलों ने बाबा बंदा बहादुरजी को अनेक प्रकार के प्रलोभन दिखाए, जिससे वे सिख धर्म छोडकर इस्लाम धर्म अपनाएं । परंतु, बाबा बंदा बहादुरजी अपना धर्म छोडने के लिए तैयार नहीं हुए ।
मूर्तिपूजा के विषय पर हिन्दुओंका उपहास करनेवाले और हिन्दू धर्म को सडा-गला कहकर ताना मारनेवाले तथाकथित बुद्धिवादी, विज्ञानवादी और नास्तिकतावादियों के लिए यह लेख एक तमाचा ही हैं !
७ वीं शताब्दी से लेकर १५ वीं शताब्दी तक जिन्होंने कंबोडिया पर राज्य किया, उस साम्राज्य को खमेर साम्राज्य कहते हैं । इस खमेर साम्राज्य के राजा स्वयं को चक्रवर्ती अर्थात ‘पृथ्वी के राजा’ समझते थे ।
गोपियों को श्रीकृष्ण का वास्तविक रूप ज्ञात होते ही, वे उन्हें पूर्णत: समर्पित हुईं । अपना अहंकार त्यागकर, श्रीकृष्ण की शरण में गईं, यह बहुत महत्त्वपूर्ण बात है ।
तलैमन्नार के अंतिम छोर से २ कि.मी. चलते हुए जाने पर रामसेतु के दर्शन होते हैं । रामसेतु से देखने पर १६ छोटे द्वीप एकत्र होने समान ((द्वीपसमूह समान) दिखाई देते हैं ।) दिखाई देते हैं ।
राजा राम १ के बैंकॉक शहर में राजमहल बनवाने के पश्चात इसकी दीवारों पर रामायण के विविध प्रसंगाेंं के सुंदर चित्र रंगवाए हैं । चित्रों में राम, लक्ष्मण इत्यादि व्यक्तिरेखाओं के मुख और सभी के वस्त्र थायलैंड की पद्धतिनुसार हैं ।
‘अंकोर वाट’ मंदिर के पश्चिम द्वार के मुख्य प्रवेशद्वार के ३ गोपुरों में से दाईं ओर के गोपुर में आज भी श्रीविष्णु की विशाल अष्टभुजा मूर्ति है ।
आंधी-तूफान, भूस्खलन, भूकंप, महाप्रलय, तीसरा महायुद्ध ऐसी आपातकालीन परिस्थिति किसी भी क्षण आ सकती है । ऐसी स्थिति में ‘योग्य कृति क्या करनी चाहिए ?’ इसका ज्ञान न होने से सर्वसामान्य व्यक्ति घबरा सकता है और उसका मनोबल भी कम हो जाता है ।