कोरोना विषाणु के विरुद्ध स्वयं में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने हेतु चिकित्सकीय उपचारों के साथ आध्यात्मिक बल प्राप्त होने हेतु ‘श्री दुर्गादेवी, दत्त देवता एवं भगवान शिव’, इन देवताओं का एकत्रित नामजप ध्वनिविस्तारक द्वारा सर्वत्र लगाने का नियोजन करें !

यह सिद्ध हो चुका है कि ‘नामजप न केवल आध्यात्मिक उन्नति के लिए पूरक है, साथ ही विविध विकारों के निर्मूलन के लिए भी लाभदायक है । वर्तमान कोरोना महामारी के काल में रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होने के लिए योगासन, प्राणायाम, आयुर्वेदीय उपचार इत्यादि प्रयास समाज के लोग कर रहे हैं । इनके साथ ही रोग प्रतिरोधक शक्ति तथा आत्मबल बढाने के लिए उचित साधना ही करनी पडती है ।

कोरोना महामारी की तीव्रता ध्यान में रखकर अपने साथ कुटुंबियों की रक्षा होने हेतु ‘कोरोना’ संबंधी सूचनाओं का साधना के रूप में पालन करें !

‘मार्च २०२० से १ अप्रैल २०२१ तक भारत में १ करोड ३३ लाख से भी अधिक नागरिकों को कोरोना का संसर्ग हुआ । उसमें १ लाख ६९ सहस्र से भी अधिक रोगियों की मृत्यु हो गई । आजकल कोरोना का संसर्ग पिछले वर्ष की तुलना में अधिक वेग से फैल रहा है ।

पूर्वजों के कष्ट दूर होने हेतु पितृपक्ष के काल में नामजप, प्रार्थना और श्राद्धविधि करें !

‘आजकल अनेक लोगोंको अनिष्ट शक्तियों के कष्ट हो रहे हैं । पितृपक्ष के काल में (२ से १७ सितंबर २०२० की अवधि में) इन कष्टों के बढने से इस अवधि में प्रतिदिन न्यूनतम १ घंटा ‘ॐ ॐ श्री गुरुदेव दत्त ॐ ॐ ।’ नामजप करें ।

आदित्यहृदय स्तोत्र

आदित्यहृदय स्तोत्र लगाकर, सूर्यदेवता से प्रार्थना करना कि इस स्तोत्र के चैतन्य से अपने हृदय के सर्व ओर सुरक्षाकवच निर्माण हो । यह स्तोत्र लगातार ३ बार सुनें ।…

साधक समष्टि हेतु (हिन्दू राष्ट्र-स्थापना हेतु) अब से इस प्रकार नामजप करें !

जिन साधकों का व्यष्टि साधना के अंतर्गत कुलदेवी/कुलदेवता तथा दत्त का नामजप, साथ ही अनिष्ट शक्तियों का कष्ट दूर करनेवाला जाप न्यूनतम ५ वर्ष से अच्छी तरह होता हो, तो अब वे हिन्दू राष्ट्र-स्थापना हेतु पूरक समष्टि जाप करें ।

धर्मकार्य करते समय ईश्‍वर का अधिष्ठान तथा साधना आवश्यक ! – सद्गुरु (कु.) स्वाती खाडये

अर्जुन के साथ भगवान श्रीकृष्ण थे, इसलिए धर्म-अधर्म के युद्ध में (महाभारत में ) पांडवों की संख्या अल्प होने पर भी वे विजयी हुए । इससे स्पष्ट है कि धर्मकार्य करते समय ईश्‍वर का अधिष्ठान और हमारी साधना होना आवश्यक है ।

सनातन संस्था, सनातन की सीख तथा उत्तरदायी साधकों के संदर्भ में विकल्प फैलानेवालों से सावध रहें !

‘एक शहर में पहले सनातन के मार्गदर्शनानुसार साधना करनेवाले; किन्तु वर्तमान में विकल्प के कारण सनातन से दूर गए कुछ लोग सनातन संस्था, सनातन की सीख तथा उत्तरदायी साधकों के संदर्भ में विकल्प फैला रहे हैं ।

साधको, नामजप करते समय मन में यदि अर्थहीन विचार आते हों, तो वैखरी वाणी में नामजप करें ! – (सद्गुरु) श्रीमती बिंदा सिंगबाळ

आध्यात्मिक कष्ट से साधकों की रक्षा करनेवाला और चित्त पर नए संस्कार न हों; इसके लिए सहायता करनेवाले नामजप को भावपूर्ण एवं एकाग्रता के साथ करें ! – (सद्गुरु) श्रीमती बिंदा सिंगबाळ

कृषिभूमि पर अथवा घर में स्थित गमलों में बहुगुणी आयुर्वेदीय औषधियों का रोपण कर आगामी संकटकाल हेतु सिद्ध हो जाएं !

युद्धकाल में डॉक्टर तथा औषधियां उपलब्ध न होने से स्वास्थ्य संकट में पड सकता है । ऐसे समय अपने पास घरेलू औषधियां हों, तो उनका उपयोग किया जा सकता है । ऐसी औषधियां तत्काल उपलब्ध होने हेतु प्रत्येक को अपनी क्षमता के अनुसार वनौषधियों का रोपण करना चाहिए ।

भारत पर आए चीन व पाकिस्तान रूपी संकट से रक्षा के लिए पहले बताए गए मंत्र के स्थान पर यह मंत्र दिन में दो समय २१-२१ बार पढें !

नया मंत्र दिन में दो समय २१ बार पढना अथवा सुनना है । यह मंत्र २१ बार पढने या सुनने में लगभग ६ मिनट लगते हैं । अर्थात इस मंत्र को दो बार पढने एवं सुनने के लिए आपको प्रतिदिन १२ मिनट देना पडेगा ।