अर्पणदाताओ, गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष्य में धर्मकार्य हेतु धन अर्पित कर गुरुतत्त्व का लाभ लो !

२९ जुलाई २०२६ को गुरुपूर्णिमा है । गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का यह दिवस शिष्य के लिए अविस्मरणीय होता है । इस दिन गुरुदेवजी का कृपाशीर्वाद तथा उनसे प्रक्षेपित होनेवाला शब्दातीत ज्ञान सामान्य की अपेक्षा सहस्रों गुना अधिक कार्यरत होता है ।

साधको, आनेवाले आपातकाल का सामना करने के लिए श्रद्धा के बल पर साधना में आनेवाली बाधाओं पर विजय प्राप्त करो !

मन में संदेह रखनेवाले कुछ लोग साधना से दूर चले जाते हैं, साथ ही वे अन्य लोगों से नकारात्मक चर्चा कर उनके मन में भी संदेह उत्पन्न करते हैं । इसका गंभीर परिणाम साधकों पर और समष्टि कार्य पर होता है । इससे पापकर्म घटित होता है । साधकों को ऐसे लोगों से सावधान और सतर्क रहना चाहिए ।

महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में सनातन के ग्रंथों एवं सात्त्विक उत्पादों का अधिक से अधिक वितरण करें !

१५.२.२०२६ को महाशिवरात्रि है । इस उपलक्ष्य में हमें सनातन के ग्रंथ, लघुग्रंथ एवं सात्त्विक उत्पादों को अधिक से अधिक जिज्ञासुओं तक पहुंचाने का स्वर्णिम अवसर प्राप्त हुआ है । इस अवसर का लाभ उठाकर साधक निम्नांकित ग्रंथ एवं प्रसारसामग्री के अधिकाधिक वितरण हेतु प्रयास करें ।

अपने क्षेत्र में सनातन के ग्रंथों की प्रदर्शनी आयोजित कर अध्यात्मप्रसार के कार्य में सहभागी हों !

‘अध्यात्मशास्त्र आचरण में लाकर मानवजाति का कल्याण हो’, इस उद्देश्य से सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी ने अध्यात्म, साधना, देवताओं की उपासना, संस्कृति का पालन, राष्ट्ररक्षा, धर्मजागृति और हिन्दू राष्ट्र जैसे विविध विषयों पर ३६९ ग्रंथों का संकलन किया है ।

साधको, आध्यात्मिक कष्टों की तीव्रता बढने से आध्यात्मिक उपाय नियमित करने के साथ ही व्यष्टि साधना भी बढाएं !

वर्तमान में सर्वत्र आध्यात्मिक कष्टों की तीव्रता बहुत बढ गई है । साधकों के व्यक्तिगत और पारिवारिक अडचनों में भी वृद्धि हुई है । कुछ साधकों के मन में नकारात्मक विचार आ रहे हैं । व्यष्टि साधना के प्रति उदासीनता बढ रही है ।

पितृपक्ष में महालय श्राद्ध कर पितरों का आशीर्वाद प्राप्‍त करें !

पितृपक्ष में पितृलोक पृथ्‍वीलोक के सर्वाधिक निकट आने से इस काल में पूर्वजों को समर्पित अन्‍न, जल और पिंडदान उन तक शीघ्र पहुंचता है । उससे वे संतुष्‍ट होकर परिवार को आशीर्वाद देते हैं । श्राद्धविधि करने से पितृदोष के कारण साधना में आनेवाली बाधाएं दूर होकर साधना में सहायता मिलती है ।

वाहन की दुर्घटना न हो, साधक इसकी दक्षता इस प्रकार लें तथा प्रवास में उपयोग करने का ‘दुर्घटना निवारण यंत्र’!

‘वर्तमान में आपत्काल की तीव्रता तथा अनिष्ट शक्तियों के आक्रमण बढ रहे हैं । अतः साधकों के संदर्भ में निरंतर वाहन की दुर्घटना होने की घटनाएं हो रही हैं । अतएव साधक दुपहिया तथा चारपहिया वाहन चलाते समय आगे प्रस्तुत सावधानी अवश्य लें ।

पूर्वजों के कष्ट दूर होने हेतु पितृपक्ष में नामजप और श्राद्धविधि करें !

साधकों के लिए सूचना १. भगवान दत्तात्रेय का नामजप करें । ‘आजकल अनेक साधकों को अनिष्ट शक्तियों के कष्ट हो रहे हैं । पितृपक्ष के काल में (१० से २४ सितंबर २०२२ की अवधि में) इन कष्टों में वृद्धि होने से इस कालावधि में प्रतिदिन न्यूनतम १ घंटा ‘ॐ ॐ श्री गुरुदेव दत्त ॐ ॐ’ नामजप … Read more

सनातन के पूर्णकालीन साधकों के विषय में भ्रांति फैलानेवाले ज्योतिषियों से सावधान रहें !

मुखमंडल पर तेज दिखना, यह साधना के कारण आध्यात्मिक उन्नति होने पर दिखाई देनेवाले अनेक लक्षणों में से एक लक्षण है । वाणी चैतन्यमय होना, मुखमंडल आनंदी होना, सुगंध आना, अंतर्मन से नामजप होना इत्यादि अनेक लक्षण होते हैं । इसलिए उन्नति होने के उपरांत ‘मुखमंडल पर तेज दिखना ही चाहिए’, ऐसा नहीं ।

पूर्वजों के कष्ट दूर होने हेतु पितृपक्ष में नामजप, प्रार्थना और श्राद्धविधि करें !

‘आजकल अनेक साधकों को अनिष्ट शक्तियों के कष्ट हो रहे हैं । पितृपक्ष के काल में (२१ सितंबर से ६ अक्टूबर २०२० की अवधि में) इन कष्टों में वृद्धि होने से इस कालावधि में प्रतिदिन न्यूनतम १ घंटा ‘ॐ ॐ श्री गुरुदेव दत्त ॐ ॐ’ नामजप करें ।