आध्यात्मिक उपचारों के संदर्भ में यह ध्यान रखें !

आध्यात्मिक कष्ट से पीडित साधकों के लिए नामजप करते समय आरंभ में ‘प्राणशक्ति प्रणाली’ के अनुसार नामजप ढूंढकर उसे करना तथा उसके उपरांत श्रीराम का नामजप करना अधिक उचित है ।

साधको, वर्तमान आपातकाल में रात्रि के समय व्यक्तिगत वाहन से लंबी दूरी की यात्रा करने से बचें तथा अपरिहार्य परिस्थिति में ही आध्यात्मिक स्तर के उपाय करके रात्रि-यात्रा करें !

वर्तमान में आपातकाल की तीव्रता को ध्यान में रखते हुए साधकों को रात्रि में व्यक्तिगत वाहन से लंबी दूरी की यात्रा करने से बचना चाहिए; उदाहरणार्थ गोवा से पुणे । अपवादस्वरूप परिस्थितियों में अथवा किसी अपरिहार्य कारणवश यदि रात्रि में यात्रा करना अत्यंत आवश्यक हो, तो साधकों को आध्यात्मिक स्तर पर निम्नलिखित उपाय करने चाहिए ।

सनातन संस्था के नाम से आनेवाले फर्जी ई-मेल से सावधान रहें !

सनातन संस्था तथा संस्था के संस्थापक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के नाम से फर्जी ई-मेल कुछ लोगों को प्राप्त हुए हैं ।

अर्पणदाताओ, गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष्य में धर्मकार्य हेतु धन अर्पित कर गुरुतत्त्व का लाभ लो !

२९ जुलाई २०२६ को गुरुपूर्णिमा है । गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का यह दिवस शिष्य के लिए अविस्मरणीय होता है । इस दिन गुरुदेवजी का कृपाशीर्वाद तथा उनसे प्रक्षेपित होनेवाला शब्दातीत ज्ञान सामान्य की अपेक्षा सहस्रों गुना अधिक कार्यरत होता है ।

साधको, आनेवाले आपातकाल का सामना करने के लिए श्रद्धा के बल पर साधना में आनेवाली बाधाओं पर विजय प्राप्त करो !

मन में संदेह रखनेवाले कुछ लोग साधना से दूर चले जाते हैं, साथ ही वे अन्य लोगों से नकारात्मक चर्चा कर उनके मन में भी संदेह उत्पन्न करते हैं । इसका गंभीर परिणाम साधकों पर और समष्टि कार्य पर होता है । इससे पापकर्म घटित होता है । साधकों को ऐसे लोगों से सावधान और सतर्क रहना चाहिए ।

महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में सनातन के ग्रंथों एवं सात्त्विक उत्पादों का अधिक से अधिक वितरण करें !

१५.२.२०२६ को महाशिवरात्रि है । इस उपलक्ष्य में हमें सनातन के ग्रंथ, लघुग्रंथ एवं सात्त्विक उत्पादों को अधिक से अधिक जिज्ञासुओं तक पहुंचाने का स्वर्णिम अवसर प्राप्त हुआ है । इस अवसर का लाभ उठाकर साधक निम्नांकित ग्रंथ एवं प्रसारसामग्री के अधिकाधिक वितरण हेतु प्रयास करें ।

अपने क्षेत्र में सनातन के ग्रंथों की प्रदर्शनी आयोजित कर अध्यात्मप्रसार के कार्य में सहभागी हों !

‘अध्यात्मशास्त्र आचरण में लाकर मानवजाति का कल्याण हो’, इस उद्देश्य से सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी ने अध्यात्म, साधना, देवताओं की उपासना, संस्कृति का पालन, राष्ट्ररक्षा, धर्मजागृति और हिन्दू राष्ट्र जैसे विविध विषयों पर ३६९ ग्रंथों का संकलन किया है ।

साधको, आध्यात्मिक कष्टों की तीव्रता बढने से आध्यात्मिक उपाय नियमित करने के साथ ही व्यष्टि साधना भी बढाएं !

वर्तमान में सर्वत्र आध्यात्मिक कष्टों की तीव्रता बहुत बढ गई है । साधकों के व्यक्तिगत और पारिवारिक अडचनों में भी वृद्धि हुई है । कुछ साधकों के मन में नकारात्मक विचार आ रहे हैं । व्यष्टि साधना के प्रति उदासीनता बढ रही है ।

पितृपक्ष में महालय श्राद्ध कर पितरों का आशीर्वाद प्राप्‍त करें !

पितृपक्ष में पितृलोक पृथ्‍वीलोक के सर्वाधिक निकट आने से इस काल में पूर्वजों को समर्पित अन्‍न, जल और पिंडदान उन तक शीघ्र पहुंचता है । उससे वे संतुष्‍ट होकर परिवार को आशीर्वाद देते हैं । श्राद्धविधि करने से पितृदोष के कारण साधना में आनेवाली बाधाएं दूर होकर साधना में सहायता मिलती है ।

वाहन की दुर्घटना टालने हेतु ‘दुर्घटना निवारण यंत्र’ तथा वाहन के संदर्भ में नियमित रूप से करने योग्य आध्यात्मिक उपचार

‘वर्तमान में आपत्काल की तीव्रता तथा अनिष्ट शक्तियों के आक्रमण बढ रहे हैं । अतः साधकों के संदर्भ में निरंतर वाहन की दुर्घटना होने की घटनाएं हो रही हैं । अतएव साधक दुपहिया तथा चारपहिया वाहन चलाते समय आगे प्रस्तुत सावधानी अवश्य लें ।