शनिस्तोत्र

  कोणस्थ: पिङ्गलो बभ्रु: कृष्णो रौद्रोऽन्तको यमः । सौरिः शनैश्‍चरो मन्दः पिप्पलादेन संस्तुतः ॥ एतानि दश नामानि प्रातरुत्थाय य: पठेत् । शनैश्‍वरकृता पीडा न कदाचित् भविष्यति ॥ पिप्पलाद उवाच । नमस्ते कोणसंस्थाय पिङ्गलाय नमोऽस्तुते । नमस्ते बभ्रुरूपाय कृष्णाय च नमोऽस्तुते ॥ १ ॥ नमस्ते रौद्रदेहाय नमस्ते चान्तकाय च । नमस्ते यमसंज्ञाय नमस्ते सौरये विभो ॥ … Read more

श्रीरामरक्षास्तोत्र

जिस स्तोत्रका पाठ करनेवालोंका श्रीरामद्वारा रक्षण होता है, वह स्तोत्र है श्रीरामरक्षास्तोत्र । जो इस स्तोत्रका पाठ करेगा वह दीर्घायु, सुखी, संततिवान, विजयी तथा विनयसंपन्न होगा’, ऐसी फलश्रुति इस स्तोत्रमें बताई गई है ।

मयूरेशस्तोत्रम्

यह स्तोत्र साक्षात् ब्रह्माजी ने ही कहा है । इसकी फलश्रुति का वर्णन गणेश भगवान ने इसप्रकार किया है – ‘इससे कारागृह के निरपराध कैदी ७ दिनों में मुक्त हो जाते हैं । स्तोत्र भावपूर्ण कहने से फलनिष्पति मिलती है ।

श्री गणेशजी के स्तोत्र !

‘गणपति अथर्वशीर्ष’ यह श्री गणेश का दूसरा सर्वपरिचित स्तोत्र है । ‘अथर्वशीर्ष’ का ‘थर्व’ अर्थात ‘उष्ण.’ अथर्व अर्थात शांति’ एवं ‘शीर्ष’ अर्थात ‘मस्तक’ । जिसके पुरश्‍चरण से शांति मिलती है, वह है ‘अथर्वशीर्ष’ ।