सनातन संस्था द्वारा उज्जैन सिंहस्थपर्व में अध्यात्मप्रसार
उज्जैन सिंहस्थपर्व में अध्यात्मप्रसार हेतु सेवाएं करते समय, ईश्वर ही यह कार्य कर रहे हैं, इसकी प्रतीति समाज के लोगों से उत्तम प्रतिसाद मिलने पर हो रही है । – (पूज्य) डॉ. चारुदत्त पिंगळे
उज्जैन सिंहस्थपर्व में अध्यात्मप्रसार हेतु सेवाएं करते समय, ईश्वर ही यह कार्य कर रहे हैं, इसकी प्रतीति समाज के लोगों से उत्तम प्रतिसाद मिलने पर हो रही है । – (पूज्य) डॉ. चारुदत्त पिंगळे
सनातन संस्था का कार्य धर्मानुरूप है ! – श्रद्धेयप्रवर पूज्य गुणप्रकाश चैतन्यजी महाराज
नाडीपट्टिका के माध्यम से महर्षिजी ने किए मार्गदर्शनानुसार रामनाथी, गोवा के सनातन आश्रम पर ३ दैवी कलशों की अक्षय तृतीया को स्थापना हुई । काल का प्रतिनिधित्व करनेवाले इन कलशों की स्थापना से आश्रम को मंदिर का स्वरूप प्राप्त हो गया है ।
संतों का कार्य आध्यात्मिक (पारलौकिक) स्तर का होने से लौकिक सम्मान एवं पुरस्कारों के प्रति उनमें कोई आसक्ति नहीं होती । अपितु मनोलय एवं अहं का लय होने से वे सामाजिक प्रतिष्ठा को प्राप्त करनेवाले सम्मान एवं पुरस्कार के परे जा चुके होते हैं । ऐसा होनेपर भी केवल संत ही संत की पहचान कर सकते हैं और उनको ही अन्य संतों के कार्य का महत्त्व समझ में आता है ।
सेवा की लगन, ईश्वर द्वारा प्रदान परिस्थिति का स्वीकार करनेवाली महाराष्ट्र के वर्धा (विदर्भ ) की श्रीमती विजया बरडेजी के साथ-साथ दृढता और लगन से परिपूर्ण गुरुसेवा करे पुणे के श्री. जयहिंद सुतारजी ने ६१ प्रतिशत आध्यात्मिक स्तर प्राप्त कर सभी के समक्ष आदर्श रखा है ।
उज्जैन सिंहस्थ पर्व में २० अप्रैल को श्री बडा उदासीन अखाडा की ओर से हाथी, घोडे और ऊंटों पर साधुआें को बिठाकर भव्य पेशवाई (शोभायात्रा) निकाली गई ।
रामकथा भोग की नहीं त्याग की कथा हैं । यहां त्याग की प्रतियोगिता चल रही हैं और सभी प्रथम हैं, कोई पीछे नहीं रहा ।चारों भाइयों का प्रेम और त्याग एक दूसरे के प्रति अद्भुत-अभिनव और अलौकिक है ।
अधर्मरूपी रावण पर धर्म के प्रतीक राम की विजय एवं रावण के सर्वनाश की कथा को ही प्रमुखतः ‘रामायण’ कहते हैं ।
विविध धर्मों के लोगों के विषय में विचार करने पर हिन्दू सर्वाधिक सुखी हैं । हिन्दुओं के पश्चात ईसाई, सिक्ख, बौद्ध,ज्यू एवं अंत में मुसलमान लोगों का क्रम आता है, नास्तिकों का क्रम सब से नीचे है !
किसी भी संख्या पर १ शून्य, २ शून्य, इस प्रकार बढते क्रम से शून्य लिखें, उदा. १, १०,१००, १०००, १००००, ……… इत्यादि ।