प्रभु श्रीरामजी से संबंधित श्रीलंका एवं भारत के विविध स्थानों का भावपूर्ण दर्शन करते हैं !

रामायण का काल अर्थात लाखों वर्ष प्राचीन है । उससे हिन्दू संस्कृति की महानता और प्राचीनता की प्रचीती होती है ।

श्रीरामरक्षास्तोत्र

जिस स्तोत्रका पाठ करनेवालोंका श्रीरामद्वारा रक्षण होता है, वह स्तोत्र है श्रीरामरक्षास्तोत्र । जो इस स्तोत्रका पाठ करेगा वह दीर्घायु, सुखी, संततिवान, विजयी तथा विनयसंपन्न होगा’, ऐसी फलश्रुति इस स्तोत्रमें बताई गई है ।

श्रीरामजीके उपासनाकी सामान्य कृतियां एवं उपासनाके विविध प्रकार

देवताके तत्त्वका निरंतर लाभ मिलता रहे, इस हेतु उनकी उपासना भी निरंतर होनी चाहिए और ऐसी एकमात्र उपासना है नामजप । कलियुगके लिए नामजप ही सरल एवं सर्वोत्तम उपासना है ।

श्रीरामनवमी उत्सव मनानेकी पद्धति

त्रेतायुगमें श्रीविष्णुके सातवें अवतार श्रीरामजीने पुष्य नक्षत्रपर, मध्याह्न कालमें अयोध्यामें जन्म लिया । वह दिन था, चैत्र शुक्ल नवमी । तबसे श्रीरामजीके जन्मप्रीत्यर्थ श्रीरामनवमी मनाई जाती है ।

श्रीरामजीके कुछ नामोंका अर्थ तथा विशेषताएं एवं तदनुसार उनका कार्य

श्री अर्थात शक्ति, सौंदर्य, सद्गुण इत्यादि, लंका विजयके पश्चात्, राम जब सीतासहित अयोध्यानगरी लौटे, तब सर्व अयोध्यावासी उन्हें ‘श्रीराम’ के नामसे संबोधित करने लगे । श्रीरामजी राजधर्मका पालन करनेमें तत्पर थे ।

प्रभु श्रीरामजीका नामजप

श्रीविष्णु, श्रीराम एवं श्रीकृष्ण, अनेक श्रद्धालुओंके आस्थाकेंद्र हैं । कुछ हिंदुओंके ये सांप्रदायिक उपास्यदेवता हैं । बहुतांश उपासकोंको देवतासंबंधी जो थोडी-बहुत जानकारी रहती है, वह अधिकतर पढी-सुनी कथाओंसे होती है । ऐसी अल्प जानकारीके कारण देवताओंपर उनका विश्वास भी अल्प ही होता है । देवताओंकी अध्यात्मशास्त्रीय जानकारीसे उनके प्रति श्रद्धा निर्माण होती है एवं श्रद्धासे भावपूर्ण उपासना होती है । … Read more

श्रीरामतत्त्वको आकृष्ट करनेवाली रंगोली

श्रीरामके मारक तत्त्वको आकृष्ट करनेवाली रंगोली १५ बिंदु : १५ रेखा   श्रीरामके तारक तत्त्वको आकृष्ट करनेवाली रंगोली १५ बिंदु : १५ रेखा