गुरुपूर्णिमा निमित्त परात्पर गुरु डॉ. जयंत आठवलेजी का संदेश (2021)

धर्मनिष्ठ हिन्दुओ, इस गुरुपूर्णिमा से धर्मसंस्थापना के लिए अर्थात धर्माधिष्ठित हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए सर्वस्व का त्याग करने की तैयारी करें और ऐसा त्याग करने से गुरुतत्त्व को अपेक्षित आध्यात्मिक उन्नति होगी, इसकी निश्‍चिति रखें !

सनातन संस्‍था के राष्‍ट्र-धर्म कार्य को श्री विद्याचौडेश्‍वरी देवी का आशीर्वाद है और देवी ही यह कार्य आगे चलानेवाली हैं !

राष्ट्र-धर्म का यह कार्य उत्तम हो तथा सनातन संस्था का आश्रम उसका साक्षी हो ! इन सभी कार्यों को श्री विद्याचौडेश्वरी देवी के आशीर्वाद हैं और देवी यह कार्य आगे चलानेवाली हैं ।

गुरुपूर्णिमाका अध्यात्मशास्त्रीय महत्त्व

गुरुदेव वे हैं, जो साधना बताते हैं, साधना करवाते हैं एवं आनंदकी अनुभूति प्रदान करते हैं । गुरुका ध्यान शिष्यके भौतिक सुखकी ओर नहीं, अपितु केवल उसकी आध्यात्मिक उन्नतिपर होता है ।

गुरुपूर्णिमाके दिन गुरुतत्त्व १ सहस्त्र गुना कार्यरत रहता है

गुरु ईश्वरके सगुण रूप होते हैं । उन्हें तन, मन, बुद्धि तथा धन समर्पित करनेसे उनकी कृपा अखंड रूपसे कार्यरत रहती है ।