गुरुपूर्णिमा के उपलक्ष्य में सनातन संस्था के गुरुओं द्वारा संदेश (2026)

इस भीषण युद्धकाल में केवल स्वयं का विचार न करते हुए समाज के सात्त्विक हिंदुओं (जीवों) की रक्षा करना अत्यंत आवश्यक है । ऐसी कठिन परिस्थिति में सात्त्विक हिंदुओं (जीवों) की प्राणरक्षा हेतु निष्ठापूर्वक प्रयास करना, यही इस काल की वास्तविक समष्टि साधना सिद्ध होनेवाली है ।

गुरुपूर्णिमा पूजाविधि (संपूर्ण गुरु पूजन मंत्र एवं अर्थसहित)

आषाढ पूर्णिमा अर्थात व्यासपूजन अर्थात गुरुपूर्णिमा । इस दिन ईश्वर के सगुण रूप अर्थात गुरु का मनोभाव से पूजन

गुरुपूर्णिमाका अध्यात्मशास्त्रीय महत्त्व

गुरुदेव वे हैं, जो साधना बताते हैं, साधना करवाते हैं एवं आनंदकी अनुभूति प्रदान करते हैं । गुरुका ध्यान शिष्यके भौतिक सुखकी ओर नहीं, अपितु केवल उसकी आध्यात्मिक उन्नतिपर होता है ।

गुरुपूर्णिमाके दिन गुरुतत्त्व १ सहस्त्र गुना कार्यरत रहता है

गुरु ईश्वरके सगुण रूप होते हैं । उन्हें तन, मन, बुद्धि तथा धन समर्पित करनेसे उनकी कृपा अखंड रूपसे कार्यरत रहती है ।