सार्वजनिक श्रीगणेशोत्सव : कैसा न हो तथा कैसा हो ?

सारिणी

१. उत्सवमें कौन-सी बातें न हों ?

२. व्यावसायिक उद्देश्यसे किए विज्ञापनोंके माध्यमसे अनादर

३. समाजविघातक विषयोंका प्रसार

४. जुलूसमें होनेवाले अनुचित प्रकरण

५. उत्सवमें क्या होना चाहिए ?

६. प्रवचन

७. धर्मप्रसार एवं धार्मिक कार्यमें कार्यकर्ताओंका वर्षभर सक्रिय रहना ।

 


 

हिंदूओंमें धर्मनिष्ठा एवं राष्ट्रनिष्ठा बढे, उन्हें संगठित करनेमें सहायता हो, लोकमान्य तिलकने इस उदात्त हेतु सार्वजनिक गणेशोत्सव आरंभ किया; परंतु आजकल सार्वजनिक गणेशोत्सवोंमें होनेवाले अनाचार एवं अनुशासनहीनताके कारण उत्सवका मूल उद्देश्य विफल होनेके साथ उसकी पवित्रता भी नष्ट होती जा रही है । ‘सार्वजनिक श्रीगणेशोत्सव कैसा न हो तथा कैसा हो’, आगे दिए सूत्रोंसे इसकी जानकारी हो सकती है ।

१. उत्सवमें कौन-सी बातें न हों ?

१ अ. बलपूर्वक चंदा उगाही

१ आ. अशास्त्रीय स्वरूपकी मूर्तियां

१ इ. ‘प्लास्टर ऑफ पैरिस’से बनी मूर्तियां

१ ई. विचित्र रूपकी मूर्तियां इ. विशालकाय मूर्तियां

१ उ. उत्सवमंडपसे संबंधित अनाचार

१ ऊ. मंडप बनाने हेतु ज्वलनशील पदार्थोंका प्रयोग

१ ए. मूर्तिकी सजावट, विद्युत जगमगाहट एवं संगीत कार्यक्रमपर अत्यधिक व्यय

१ ऐ. मंडपमें जुआ तथा मद्यपान

 

२. व्यावसायिक उद्देश्यसे किए विज्ञापनोंके माध्यमसे अनादर

श्रीगणेशको विविध रूपोंमें प्रदर्शित कर, उदा. ‘झंडु बाम’ लगानेवाले, ‘काइनेटिकपर सवारी करनेवाले’, ऐसे विज्ञापनोंद्वारा उनका अनादर करना

 

 

३. समाजविघातक विषयोंका प्रसार

सिगरेट, गुटका आदि हानिकारक पदार्थोंके उत्पादकोंसे (दानके स्वरूपमें) निधि लेकर, ऐसे उत्पादोंके विज्ञापनोंके संदेशोंद्वारा समाजको व्यसनाधीन बनानेमें सहायक होना, समाजमनपर अनुचित संस्कार डालनेवाले प्रसारण, चलचित्रके गीत, चलचित्रके संगीतपर / गीतोंकी तालपर आधारित उच्च स्वरमें देवताओंकी आरतियोंकी ध्वनिमुद्रिका (ऑडियो कैसेट) लगाना, वाद्यवृंद, पॉप संगीत एवं नृत्य जैसे संस्कारहीन कार्यक्रमोंका आयोजन, चलचित्रके गीत, संगीत एवं बिजलीकी सजावट आदिके फलस्वरूप ध्वनिप्रदूषण

 

४. जुलूसमें होनेवाले अनुचित प्रकरण

अ. आवागमन-तंत्रमें बाधक, कूर्मगतिसे चलनेवाला जुलूस
आ. अन्योंको बलपूर्वक गुलाल लगाना इ. मद्यपान
इ. विचित्र अंगचलन कर नाचना उ. महिलाओंके साथ असभ्य वर्तन
ई. बहरा कर देनेवाले पटाखे
उ. रात्रि १० बजेके उपरांत मूर्तिविसर्जन

 

५. उत्सवमें क्या होना चाहिए ?

अ. मूर्तिशास्त्रके अनुसार मूर्तिकी स्थापना
आ. पूजास्थान तथा उत्सवमंडपमें अनुशासन एवं पवित्रता
इ. धार्मिक विधि एवं देवताओंका अध्यात्मशास्त्रीय अर्थ समझकर, उत्सवकार्यको ‘सेवा’ मानकर करनेवाले कार्यकर्ता
ई. समाजसहायता, राष्ट्ररक्षा तथा धर्मजागृति हेतु कार्यक्रम

६. प्रवचन

अ. धर्म, साधना, गुरु, शिष्य जैसे आध्यात्मिक विषयोंसे संबंधित प्रवचनोंका आयोजन
आ. भ्रष्टाचार, जातिवाद, आतंकवाद, प्रांतवाद आदिके संदर्भमें जनताकी जागृति हेतु प्रवचन
इ. गुटका, मावा, मदिरा, एड्स इत्यादिसे संबंधित जनजागृति करनेवाले भाषण

६ अ. संगीत तथा भजन : राष्ट्रभक्तिकी प्रेरणा देनेवाले गीत, शास्त्रीय संगीत तथा संतरचित भजनोंके कार्यक्रम
६ आ. नाटक एवं पथनाट्य : देशभक्तिपर / सामाजिक समस्याओंपर आधारित
६ इ. राष्ट्ररक्षा तथा धर्मजागृतिसे संबंधित विषयोंपर ‘प्रश्नमंजूषा कार्यक्रम’
६ ई. अध्यात्मप्रसार, धार्मिक, सामाजिक एवं राष्ट्रीय कार्य हेतु अधिकांश निधिका उपयोग

 

७. वर्षभर धर्मप्रसार एवं धार्मिक कार्यमें कार्यकर्ताओंका सक्रिय रहना ।

७ अ. श्रीगणेशोत्सवोंकी संख्या मर्यादित हो

‘एक गांव – एक गणेश’ तथा नगरोंमें (शहरोंमें) ‘एक विभाग – एक गणपति’ सूत्रका पालन करें ।

७ आ. उत्सवमें होनेवाले अनाचारोंपर रोक लगे, उत्सव आदर्शरूपसे मनाया जाए,
इस हेतु ‘सनातन संस्था’ एवं ‘हिंदू जनजागृति समिति’द्वारा किए जानेवाले प्रयत्न

१. विविध अनुचित घटनाओंको उजागर करना
२. समाजविघातक अनुचित घटनाएं रोकने हेतु प्रत्येक स्थानपर भित्तिपत्रक (पोस्टर) तथा कपडेके फलक (बैनर) लगाना
३. अनाचार रोकने हेतु गणेशोत्सव मंडलोंसे मिलकर उनका प्रबोधन करना
४. बोधप्रद फलक लिखना : वर्ष २०१२ में गणेशोत्सवके समय महाराष्ट्र एवं कर्नाटक राज्यमें ६४१ स्थानोंपर ऐसे फलक लिखनेका नियोजन किया गया ।
५. धर्मशिक्षा फलक लगाना, उसी प्रकार क्रांतिकारियोंके इतिहाससंबंधी एवं ‘पैâक्ट’ निर्मित कश्मीरी हिंदुओंपर अत्याचार दर्शानेवाली प्रदर्शनी लगाना : वर्ष २०१२ में गणेशोत्सवके समय महाराष्ट्र, कर्नाटक एवं देहली (दिल्ली) आदि राज्योंमें १५० स्थानोंपर ऐसी प्रदर्शनी आयोजित की गई ।
६. अनुचित घटनाएं रोकने हेतु सामाजिक संगठन, प्रशासकीय अधिकारी एवं पुलिससे निवेदन करना
७. मूर्तिशास्त्रानुसार मूर्ति बनाने हेतु मूर्तिकारोंका प्रबोधन करना
८. ‘श्रीगणेशका उपासनाशास्त्र एवं श्रीगणेशोत्सव आदर्श पद्धतिसे मनाने हेतु’ संबंधित विषयपर प्रवचनोंका आयोजन करना
९. सनातन-निर्मित दृश्यश्रव्य-चक्रिका (वीडियो सीडी) ‘श्रीगणेशोत्सव : वास्तविकता एवं आदर्श’, ‘श्रीगणेश समग्र दर्शन (शास्त्रीय ज्ञान)’ तथा ‘पटाखोंके दुष्परिणाम’का प्रसारण करना : वर्ष २०१२ में गणेशोत्सवके समय भारतमें ५१ केबलद्वारा ३५,१९,००० दर्शकोंतक ‘गणेशोत्सव अध्यात्मशास्त्रीय पद्धतिसे कैसे मनाएं’, यह विषय कुछ मराठी दृश्यश्रव्य-चक्रिकाओंद्वारा पहुंचानेका नियोजन किया गया ।
१०. बोधप्रद नाटिका प्रस्तुत करना
११. आकाशवाणीपर भेंटवार्ता (इंटरव्यू) अथवा प्रवचन करना
१२. ‘राष्ट्ररक्षा एवं धर्मजागृति’के विषयपर विद्यार्थियोंके लिए ‘प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताका कार्यक्रम’ आयोजित करना

संदर्भ : सनातन-निर्मित ग्रंथ ‘श्री गणपति’