पितृपक्ष एवं श्राद्ध के संदर्भ में किया जानेवाला दुष्प्रचार तथा उसका खण्डन

तथाकथित आधुनिकतावादी गिरोह हिन्दुओं के अन्य त्योहारों के भांति श्राद्धपक्ष के संदर्भ में भी हिन्दुओं का बुद्धिभ्रम करने का प्रयास कर हिन्दुओं को धर्माचरण से परावृत्त करने का प्रयास करते हैं ।

हिन्दू धर्म में छोटे बच्चों का श्राद्धकर्म न करने के कारण

यहां छोटे बच्चे वे होते हैं, जिनके दांत नहीं आए हों, साथ ही जिन में हड्डियां बनने की प्रक्रिया पूर्ण न हुई हो और उनकी मृत्यु हुई हो, तो उनका श्राद्ध नहीं किया जाता ।

श्राद्ध में पितरों तथा देवताओं को नेवैद्य दिखाना

दर्भ पर पितरों के लिए पिंड रखने पर, इससे निकलनेवाली तेजतत्वयुक्त तरंगों से लिंगदेह के सर्व ओर स्थित कालीशक्ति का विघटन होता है । तब, उस अन्न से लिंगदेह सहजता से सूक्ष्म-वायु ग्रहण कर पाती है ।

श्राद्ध में की जानेवाली विविध क्रियाओं का अध्यात्मशास्त्र

यह लेेख पढकर आप श्राद्ध में की जानेवाली अनेक छोटी-छोटी क्रियाओं का अध्यात्मशास्त्र समझ सकेंगे । इससे ‘श्राद्धकर्म’ की श्रेष्ठता ज्ञात होगी ।

अतृप्त पूर्वजों से कष्ट के कारण तथा उसका स्वरूप

अधिकांश लोग साधना नहीं करते । अतएव वे माया में अत्यधिक लिप्त होते हैं । इसलिए मृत्यु के उपरांत ऐसे व्यक्तियों की लिंगदेह अतृप्त रहती है ।

श्राद्धकर्म में वर्जित वस्तुएं एवं उसका अध्यात्मशास्त्रीय कारण

श्राद्ध के भोजन में उपर्युक्त पदार्थों का समावेश करने से पितरों को नीचे की योनियों में स्थान मिलता है; क्योंकि भारी तरंगों का गुणधर्म सदैव अधोदिशा में जाना होता है ।’ 

पितृपक्ष (महालय पक्ष)

प्रत्येक वर्ष पितृपक्ष के कृष्णपक्ष को महालय श्राद्ध किया जाता है । श्राद्ध करने का महत्त्व, पद्धति, श्राद्धपक्ष में शुभकार्य करना निषिद्ध क्यों है, इसका कारण इस लेख के माध्यम से जानेंं ।