भगवान दत्तात्रेय

दत्त अर्थात वह जिसने निर्गुणकी अनुभूति प्राप्त की है; वह जिसे यह अनुभूति प्रदान की गई है कि ‘मैं ब्रह्म ही हूं, मुक्त ही हूं, आत्मा ही हूं ।’

देवता के ‘तारक’ और ‘मारक’ नामजप का महत्त्व जानने हेतु अवश्य पढें

देवता के ‘तारक’ और ‘मारक’ नामजप का महत्त्व

श्री गुरुदेव दत्त का नामजप (Audio)

“श्री गुरुदेव दत्त तारक नामजप”

“श्री गुरुदेव दत्त मारक नामजप”

४. श्री दत्तात्रेय भगवान का नामजप कैसे करें ?

देवता के नामजप से अधिक लाभ होने के लिए संबंधित नामजप का उच्चार अध्यात्मशस्त्र के अनुसार करना आवश्यक होता है । इसके लिए हम, ‘श्री गुरुदेव दत्त’ यह नामजप करना सीखेंगे ।

‘श्री गुरुदेव दत्त’ यह नामजप तारक पद्धति से करते समय श्री दत्तात्रेय भगवान का रूप मन-ही-मन स्मरण करें और भाव रखें कि वे हमें होनेवाले अतृप्त पूर्वजों के कष्ट से हमारी रक्षा करने के लिए दौडे आएंगे तथा इस भाव के साथ नामजप के प्रत्येक अक्षर का उच्चारण करें ।

इसके विपरीत, मारक नामजप करते समय ‘श्री गुरुदेव दत्त’ इस जप का प्रत्येक अक्षर मारक स्वर में बोलें । ऐसा करते समय ‘दत्त’ शब्द के ‘द’ अक्षर पर अधिक बल दें ।

“ॐ ॐ श्री गुरुदेव दत्त ॐ ॐ तारक नामजप”

“ॐ ॐ श्री गुरुदेव दत्त ॐ ॐ मारक नामजप”

इन नामजपों के विषय में जानकारी अपने परिजनों, संबंधियों और मित्रों को बताएं, जिससे वे भी नामजप से लाभ ले सकें ।

साधक, इसके पहले दैनिक ‘सनातन प्रभात’ में प्रकाशित चौखट के अनुसार, ‘ॐ ॐ श्री गुरुदेव दत्त ॐ ॐ’ यह नामजप करें ।

कु. तेजल पात्रीकर, संगीत विशारद, संगीत संयोजिका, महर्षि अध्यात्म विश्‍वविद्यालय, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा.

‘सनातन चैतन्यवाणी’ इस मोबाइल एप पर भी यह नामजप उपलब्ध !

यह नामजप सुनते समय आपको कोई विशेष अनुभूति हो, तो हमें अवश्य बताएं ।

हमारा पता है – [email protected]

 

दत्त भगवान का नामजप करने से अतृप्त पूर्वजाें के कष्ट से रक्षा होना

अ. संरक्षक-कवच निर्माण होना

दत्त भगवान के नामजप से निर्माण होनेवाली शक्‍ती से नामजप करनेवाले व्यक्ति के चारों ओर सुरक्षा-कवच निर्माण होता है ।

आ. अतृप्त पूर्वजों को गति प्राप्त होना

अधिकांश लोग साधना नहीं करते । वे माया में फसें होते है । माया में अटके होने के कारण मृत्योपरांत एेसे लोगों का लिंगदेह अतृप्त रहता है । ये अतृप्त लिंगदेह मर्त्यलोक में (मृत्युलोक में) अटक जाते है । भगवान दत्त के नामजप से मृत्युलोक में अटके पूर्वजों को गति प्राप्त होती है । (भूलोक तथा भुवर्लोक के बीच में मृत्युलोक है ।) इसलिए इसके उपरांत वे अपने कर्मानुसार आगे आगे के लोकों में जानेपर सहजही उनके कारण व्यक्‍ति को होनेवाले कष्ट का प्रमाण कम होता है ।

इ. भगवान शिवची की शक्ती प्राप्त होना

भगवान दत्त के नामजप से जीव को भगवान शिव की भी शक्ती प्राप्त होती है ।

 

दत्तात्रेय का नामजप तथा अतृप्त पूर्वजों के कष्ट पर उपाययोजना

१. किसी भी प्रकार का कष्ट न हो, तो आगे जाकर भी कोई कष्ट न हों इसलिए, वैसेही थोडा कष्ट हो तो कम-से-कम १ से २ घंटे अथवा तीन घंटे `श्री गुरुदेव दत्त ।’ यह जप हमेशा करें । बाकी समय प्रारब्ध के कारण कष्ट न हों, तथा आध्यात्मिक उन्नति हों इसलिए सर्वसामान्य व्यक्ति ने अथवा प्राथमिक अवस्था के साधकने अपनी कुलदेवता का नामजप अधिकाधिक करना चाहिए ।

२. मध्यम स्वरूप का कष्ट है, तो कुलदेवता के नामजप के साथ-साथ `श्री गुरुदेव दत्त ।’ यह जप कम-से-कम २ से ४ घंटा करें । वैसेही गुरुवार के दिन भगवान दत्त के मंदिर में जाकर सात परिक्रमा करें तथा बैठकर एक-दो माला जप कम-से-कम वर्षभर करें । उसके उपरांत तीन माला जप करते रहे ।

३. तीव्र कष्ट हो, तो कम-से-कम ४ से ६ घंटा जप करें । किसी भी एक ज्योतिर्लिंग के तीर्थक्षेत्र जाकर नारायणबली, नागबली, त्रिपिंडी श्राद्ध, कालसर्पशांती जैसे विधि करें । उसके साथ किसी दत्तक्षेत्र में रहकर साधना करें अथवा संतसेवा कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें ।

४. पितृपक्ष में भगवान दत्तात्रेय का नामजप करने से पितरों को शीघ्र गति प्राप्त होती है; इसलिए इस कालावधि में प्रतिदिन दत्त भगवान का नामजप न्यूनतम ६ घंटा (७२ माला) करें ।

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